December 04, 2016

ताज़ा खबर

 

संपादकीयः हवा में जहर

दिल्ली में प्रदूषण की गहराती समस्या से निपटने के लिए समय-समय पर पर्यावरणविदों ने कई तरह के उपाय आजमाने की सलाह दी है।

Author November 5, 2016 02:23 am

दिल्ली में प्रदूषण की गहराती समस्या से निपटने के लिए समय-समय पर पर्यावरणविदों ने कई तरह के उपाय आजमाने की सलाह दी है। मगर सच यह है कि अलग-अलग सरकारी महकमों की कवायदों के बावजूद दिल्ली की हवा में अभी तक कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। यों दिवाली के मौके पर व्यापक आतिशबाजी के चलते हर साल यह समस्या अपने चरम पर होती है। मगर इस बार पिछले करीब एक हफ्ते से जिस तरह की धुंध छाई हुई है, वह हैरान करने वाली है। समूची दिल्ली में घरों में बंद या सड़कों पर निकले बहुत सारे लोगों ने आंखों में जलन से लेकर सांस की तकलीफ की शिकायत की और उन्हें उपचार कराना पड़ा। हालांकि दिल्ली की आपाधापी में ऐसे तमाम लोग होंगे, जिन्होंने अपने काम की व्यस्तता के चलते यह परेशानी होने के बावजूद इसकी अनदेखी की होगी। इस पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली के ऊपर हवा में सामान्य से दस गुना तक विषैले प्रदूषक तत्त्व मंडरा रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि इस बार की दिवाली में बेलगाम आतिशबाजी ने हवा को इस कदर प्रदूषित किया है, जिसके चलते यह समस्या गंभीर हुई है।

 
दिल्ली में भलस्वा डेयरी जैसे कचरा निपटान केंद्रों सहित जगह-जगह कूड़े के ढेर में लगी आग से फैलता धुआं पहले ही कई तरह की मुश्किलें पैदा कर रहा था। दूसरे, जहां-तहां कूड़े को जलाने के मामले में न आम लोगों को इसके खतरे और अपनी जिम्मेदारी का अहसास है, न सरकार को इसकी फिक्र जरूरी लगती है। इसमें समस्या यह भी जुड़ गई कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में फसलों की कटाई के बाद बचे हुए हिस्से को जलाने से निकला धुआं हल्की हवा के साथ दिल्ली तक आ गया और नमी ज्यादा होने के चलते यहां लगभग ठहर गया। हालत यह है कि पिछले दिनों दिल्ली में सामान्य दृश्यता अत्यंत न्यून दर्ज की गई। मगर सामान्य दिखती धुंध में जिस कदर पार्टिकुलेट मैटर या जहरीले तत्त्व घुल गए, उसने स्थिति को गंभीर बना दिया। विडंबना यह है कि हर साल इस मौसम में राजधानी की हवा की हालत कमोबेश ऐसी ही हो जाती है। मगर इससे निपटने के लिए सरकार को कोई पूर्व तैयारी करना जरूरी नहीं लगा।
अब जब समूची दिल्ली में चारों तरफ फैला जहरीला धुआं गहरा गया है, तब दिल्ली सरकार ने गुरुवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिख कर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में खेतों में बची फसलों को जलाने से लेकर एनसीआर में डीजल से चलने वाले आॅटो-टैक्सी के चलते राजधानी की हवा में प्रदूषण की गहराती समस्या का मुद्दा भी उठाया है। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह पहल आगे बढ़ती भी है तो इसमें कई दिन लग सकते हैं। यानी अगर आसमान साफ नहीं हुआ और हवा ने गति नहीं पकड़ी तो तब तक यह प्रदूषित हवा लोगों की सेहत पर भारी पड़ती रहेगी। अभी ठंड का मौसम आने वाला है और यह तय है कि आसमान में नमी के चलते कोहरे और धुंध से उपजी समस्या और गहरा सकती है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों से भारत में हर साल छह लाख लोगों की जान जा रही है। अगर इस समस्या की अनदेखी जारी रही तो आने वाले दिनों में नतीजे घातक

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 5, 2016 2:15 am

सबरंग