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पाकिस्तान की मनमानी

पाकिस्तान ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठक में जम्मू-कश्मीर के विधानसभा अध्यक्ष को आमंत्रित न करके एक बार फिर से अपनी मनमानी जाहिर की है।
Author August 10, 2015 08:35 am
पाकिस्तान ने फिर किया संघर्षविराम का उल्लंघन, कई चौकियों को निशाना बनाया (Representational Photo)

पाकिस्तान ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठक में जम्मू-कश्मीर के विधानसभा अध्यक्ष को आमंत्रित न करके एक बार फिर से अपनी मनमानी जाहिर की है। स्वाभाविक ही उसके इस रवैए पर लोकसभा अध्यक्ष के साथ राज्य विधानसभाओं के अध्यक्षों की हुई बैठक में विरोध उभरा। तय किया गया कि अगर पाकिस्तान अगले महीने इस्लामाबाद में होने वाली राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठक में जम्मू-कश्मीर के विधानसभा अध्यक्ष को आमंत्रित नहीं करता है तो भारत इस बैठक का बहिष्कार करेगा।

बैठक किसी और जगह कराने की मांग की जाएगी। पाकिस्तान ने एक पुराने नियम के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को न्योता नहीं भेजा। हालांकि 2007 की राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठक में जम्मू-कश्मीर के विधानसभा अध्यक्ष ने शिरकत की थी। पाकिस्तान के इस रवैए से उसकी मंशा जाहिर है। जब भी भारत आतंकवादी गतिविधियों पर नकेल कसने के मकसद से उस पर दबाव बनाता या बातचीत की पहल करता है, पाकिस्तान कश्मीर मसले के जरिए उसमें अड़ंगा लगाने की कोशिश करता है।

शांति बहाली के लिए पिछले साल जब दोनों देशों के सचिव स्तर की बातचीत होनी थी, तब पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने हुर्रियत नेताओं को दावत देकर उसमें खलल पैदा की थी। इस महीने दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत होनी है। तय है कि उसमें भारत आतंकवादियों को पाकिस्तान की तरफ से मिल रही मदद और सीमा से घुसपैठ कराने को लेकर दबाव बनाएगा। गुरदासपुर और ऊधमपुर में हुए आतंकी हमलों में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं। फिर मुंबई हमलों के मुख्य जांचकर्ता तारिक खोसा ने लेख लिख कर पाकिस्तान के रवैए पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। इन तथ्यों से पाकिस्तान आंख चुराए रखना चाहता है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को न्योता न भेजे जाने का एक कारण यह भी है कि पाकिस्तान चूंकि कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानता, इस बैठक में उसके संवैधानिक प्रतिनिधि को आमंत्रित कर अपना पक्ष कमजोर नहीं करना चाहता होगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वह कई बार कश्मीर मसले को सुलझाने की पुरजोर मांग रख चुका है।

कुछ दिनों पहले जब भारत ने लश्कर-ए-तैयबा सरगना जकीउर रहमान लखवी की आवाज का नमूना मांगा, तब पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने साफ कहा कि भारत पहले कश्मीर समस्या को सुलझाए, फिर बाकी मसलों पर बात करे। ऐसे में जाहिर है, पाकिस्तान राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठक में जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को न्योता न भेज कर एक तरह से दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच होने वाली बैठक को रद्द कराने का आधार तैयार कर दिया है।

समझना मुश्किल नहीं है कि उसने ऐसा किसी नियम के तहत नहीं, बल्कि पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसी आइएसआइ के दबाव में किया है। मगर इस तरह भारत को खिझाने में उसे भले कुछ कामयाबी मिल गई हो, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसने अपने अलोकतांत्रिक रवैए का ही परिचय दिया है।

 

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