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संपादकीयः फिर फ्लू

सवा महीने पहले केंद्र सरकार ने दावा किया था कि भारत अब एवियन इनफ्लुएंजा यानी एच5एन1 से मुक्त हो चुका है। लेकिन इस दावे की हकीकत यह है कि बर्ड फ्लू की धमक फिर से सुनाई पड़ रही है।
Author October 22, 2016 03:23 am

सवा महीने पहले केंद्र सरकार ने दावा किया था कि भारत अब एवियन इनफ्लुएंजा यानी एच5एन1 से मुक्त हो चुका है। लेकिन इस दावे की हकीकत यह है कि बर्ड फ्लू की धमक फिर से सुनाई पड़ रही है। दिल्ली के चिड़ियाघर और डियर पार्क में डेढ़ दर्जन विभिन्न प्रजाति के पक्षी मृत पाए गए हैं। समझा जा रहा है कि एवियन इन्फ्लुएंजा के कारण ऐसा हुआ है। चिड़ियाघर में पेलिकन पक्षियों की मौत के बाद बुधवार को उसे अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया था। बुधवार को दक्षिणी दिल्ली में स्थित डियर पार्क में एक पक्षी मरा पाया गया तो एहतियातन इसे भी बंद कर दिया गया। उधर, गाजीपुर की मुर्गा मंडी में पचास मृत मुर्गों में फ्लू के लक्षण की आशंका के मद््देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम की अगुआई में उन्हें जला दिया गया। इससे पहले उनके नमूने लिए गए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। हालांकि मुर्गों की बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ा है। दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि किसी भी कीमत पर इस बीमारी को फैलने नहीं दिया जाएगा और जो भी जरूरी उपाय होंगे, उन्हें अमल में लाया जाएगा।

आमतौर पर जिसे बर्ड फ्लू कहा जाता है, वह वैसे तो पक्षियों से पक्षियों में फैलता है, लेकिन कभी-कभार यह पक्षियों के जरिए इंसानों में भी पहुंच जाता है। यह ज्यादा चिंताजनक बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि साठ फीसद मामलों में यह संक्रमण घातक हो सकता है। भारत उन छह देशों में शामिल है, जहां पक्षियों में यह फ्लू पाया गया है। मई में कर्नाटक में बड़ी संख्या में संक्रमित मुर्गियों को मारना पड़ा था। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि एच5एन1 के लिए अभी तक कोई टीका ईजाद नहीं हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इस तरह का संक्रमण इंसानों में तभी होता है, जब वे संक्रमित पक्षियों या मुर्गी पालन केंद्रों के पास रहते हैं या उनमें घुलमिल जाते हैं।

इस नजरिए से देखें तो चिड़ियाघरों या मुर्गा मंडियों में काम करने वाले लोगों के संक्रमित होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। गाजीपुर मंडी में देखने में आया कि वहां कर्मचारियों या दूसरे लोगों के लिए कोई मास्क या अन्य एहतियाती उपाय नहीं किए गए थे। दिल्ली अभी चिकनगुनिया और डेंगू से उबर भी नहीं पाई थी कि नई आफत सिर पर मंडराने लगी है। बर्ड फ्लू के सबसे बड़े वाहक तो प्रवासी पक्षी होते हैं, जिनकी खेप अभी ठंडी के साथ ही उतरने वाली है। मध्य एशिया से आने वाले पक्षी कभी भी डेरा डाल सकते हैं और अगर बर्ड फ्लू का यह सिलसिला जारी रहा तो स्थिति क्या होगी, कहा नहीं जा सकता। मौसमी बीमारियों को लेकर सरकारी रवैया भी रस्मी होता जा रहा है। सवाल है कि क्या भारत बर्ड फ्लू से मुक्त हो पाएगा? इस संबंध में सबसे हास्यास्पद स्थिति में केंद्र सरकार खुद आ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने चौदह सितंबर को खुद कहा था कि गहन और सतत निगरानी का नतीजा है कि एवियन इन्फ्लुएंजा का कोई लक्षण नहीं मिला है। लिहाजा, भारत को पांच सितंबर, 2016 से इस रोग से मुक्त मान लिया गया है। इसकी सूचना विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन को भी दे दी गई थी। अब जबकि यह दावा सवालों के घेरे में आ चुका है, केंद्र सरकार क्या जवाब देगी?

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