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विकास के टापू

हर बार नई जनगणना के आंकड़े जनसंख्या में हुई वृद्धि के साथ-साथ शहरीकरण की रफ्तार भी बताते हैं। एक समय था कि भारत को गांवों का देश कहा जाता था
Author January 30, 2016 03:20 am

हर बार नई जनगणना के आंकड़े जनसंख्या में हुई वृद्धि के साथ-साथ शहरीकरण की रफ्तार भी बताते हैं। एक समय था कि भारत को गांवों का देश कहा जाता था। अब भी देश की आधी से अधिक आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। पर शहरीकरण के विस्तार ने काफी हद तक देश की छवि बदल दी है। बहुत सारे कस्बे शहरों में बदल चुके हैं और शहर बड़े शहरों में। महानगर कहे जाने वाले शहर अब इतने बड़े हैं कि वे नगर-राज्य हो चुके हैं। भारत में शहरों के इस जबर्दस्त विस्तार ने बहुत सारी मुश्किलें खड़ी की हैं। शहरों में परिवहन और साफ-सफाई से लेकर बिजली और पानी की आपूर्ति जैसे मसलों को हल करना दिनोंदिन कठिन होता गया है।

प्रदूषण का बढ़ता स्तर संकट की हद तक पहुंच गया है। सुविधाओं के मुकाबले समस्याओं का अंबार दिखाई देता है, जिनसे शहरी विकास मंत्रालय बरसों से जूझता रहा है। अब स्मार्ट सिटी योजना के रूप में शहरी विकास की एक और योजना पेश की गई है। शहरों को स्मार्ट बनाया जाएगा, पर फिलहाल यह पूरे शहरी भारत के लिए नहीं है। स्मार्ट सिटी योजना में अभी सिर्फ बीस शहरों को जगह मिली है। दिल्ली का एनडीएमसी क्षेत्र भी इसमें शामिल है।

आखिर इस योजना में शामिल शहरों की क्या विशेषता होगी? इन शहरों में जल और बिजली आपूर्ति, साफ-सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली, सुचारु और तीव्र आवागमन तथा पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन, आईटी कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस और इसमें नागरिकों की भागीदारी आदि को सुनिश्चित किया जाएगा। योजना के लिए बीस शहरों का चयन स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, आॅनलाइन सेवा और नवीकरण तथा विस्तार के लिए मांगे गए सुझावों के आधार पर किया गया है। योजना पर छियानबे हजार करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। आधा धन केंद्र देगा और आधा संबंधित राज्य को मुहैया कराना होगा।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है कि देश में पहली बार और संभवत: दुनिया में पहली बार प्रतियोगिता के आधार पर शहरी विकास में निवेश के लिए शहरों का चयन हुआ है। लेकिन इस चयन में राज्यों की कितनी चली? चुने गए बीस में से बारह शहर राजग-शासित राज्यों के हैं। बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराख्रंड जैसे तेईस राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का कोई शहर इस सूची में नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने तो सभी मानदंड पूरे करने के बावजूद देहरादून को शामिल न किए जाने पर खुलकर नाराजगी जताई है। दिल्ली का एनडीएमसी क्षेत्र जरूर इस योजना में शामिल किया गया, पर वीआईपी लोगों के आवास वाला यह इलाका दिल्ली का एक बहुत छोटा-सा हिस्सा है और पहले से ही तमाम सुविधाओं से लैस है।

इस बात का बहुत ढिंढोरा पीटा गया था कि स्मार्ट सिटी योजना में जमकर विदेशी निवेश आएगा। पर घोषित सूची में केवल दो शहरों में कुछ हद तक विदेशी निवेश आने के संकेत हैं। फ्रांस ने पुणे में दिलचस्पी दिखाई है और अमेरिका ने विशाखापट््टनम में। स्मार्ट सिटी योजना के लिए धनराशि जुटाना तो एक बड़ी चुनौती है ही, क्रियान्वयन संबंधी भी कई तरह की अड़चनें आ सकती हैं। मसलन, घने बसे शहरों के स्वरूप में अधिक फेरफार करना बहुत कठिन होगा, क्योंकि तब विस्थापन की भी नौबत आ सकती है, जिसमें स्थानीय लोगों की नाराजगी मोल लेनी पड़ेगी, या पुनर्वास का प्रबंध करना होगा।

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