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निष्ठुर अस्पताल

अगर ये मौतें जापानी बुखार से हुर्इं, तो उनमें इतनी तेजी क्यों थी? छत्तीस घंटों में तीस बच्चों और पांच दिनों के भीतर साठ बच्चों की मौत की बाबत राज्य सरकार की सफाई आसानी से गले नहीं उतरती।
Author August 14, 2017 06:25 am
गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर को चेक करता अस्पताल का स्टाफ (Photo-PTI)

गोरखपुर में पिछले हफ्ते सिर्फ छत्तीस घंटों के भीतर तीस बच्चों की मौत किसी प्राकृतिक हादसे की वजह से नहीं हुई। ये मौतें बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में हुर्इं, जो कि एक सरकारी अस्पताल है। इसलिए ये मौतें यही बताती हैं कि हमारी सार्वजनिक चिकित्सा व्यवस्था आपराधिक होने की हद तक लापरवाह और संवेदनहीन है। इन मौतों की खबरें आनी शुरू हुर्इं तो उनमें यही बताया गया था कि अस्पताल में आक्सीजन की कमी से ये मौतें हुर्इं। बाद में अस्पताल प्रशासन और जिलाधिकारी से लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तक, सबने यही दोहराया कि आक्सीजन की कमी के कारण ये मौतें नहीं हुर्इं। फिर किस वजह से हुर्इं? खंडन करने वालों का कहना है कि इन मौतों का कारण इंसेफेलाइटिस यानी जापानी बुखार था। यह सही है कि कई सालों से उत्तर प्रदेश में और खासकर गोरखपुर में जापानी बुखार का कहर टूटता रहा है। इसी के मद्देनजर वहां के बीआरडी कॉलेज में इंसेफेलाइटिस की चिकित्सा के लिए अलग से वार्ड बनाया गया। पर सवाल है कि अगर ये मौतें जापानी बुखार से हुर्इं, तो उनमें इतनी तेजी क्यों थी? छत्तीस घंटों में तीस बच्चों और पांच दिनों के भीतर साठ बच्चों की मौत की बाबत राज्य सरकार की सफाई आसानी से गले नहीं उतरती।

वे चाहे जितना खंडन करें, इस तथ्य को झुठलाया नहीं जा सकता कि अस्पताल में जरूरत भर का आक्सीजन नहीं था। आक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो गई थी, क्योंकि आपूर्तिकर्ता के ढेर सारे बकाए का भुगतान काफी समय से लंबित था। बार-बार तगादा करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। जब कई बच्चों की मौत हो गई, तब जाकर अस्पताल प्रशासन को होश आया और उसने बकाए के एक अंश का भुगतान किया और आक्सीजन की आपूर्ति बहाल हुई। क्या वाकई बीआरडी कॉलेज में हुई इस त्रासदी का आक्सीजन की आपूर्ति ठप पड़ जाने से कोई संबंध नहीं रहा होगा? विवाद को देखते हुए मामले की जांच का आदेश दे दिया गया है। लेकिन जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि इन मौतों की असल वजह आक्सीजन की कमी नहीं थी, तो क्या जांच का निष्कर्ष इससे भिन्न होगा? जो हो, अगर एकबारगी मान लें कि ये मौतें जापानी बुखार से हुर्इं, और आक्सीजन उपलब्ध न होना कोई कारण नहीं था, तब भी कई सवाल उठते हैं।

इन मौतों से दो दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर का दौरा किया था। वे बीआरडी कॉलेज भी गए थे और अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वार्ड को सारी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया था। तब उन्हें अस्पताल की वित्तीय कठिनाई और इसके चलते आक्सीजन आपूर्तिकर्ता के बकाए के बारे में क्यों नहीं बताया गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई वित्तीय कठिनाई नहीं थी, और बकाए का भुगतान किसी संदिग्ध कारण से न हुआ हो? मान लें कि जिन बच्चों की मौत हुई वे सब जापानी बुखार से ही पीड़ित थे। पर सवाल है कि इंसेफेलाइटिस वार्ड को हर जरूरी सुविधा मुहैया कराने के मुख्यमंत्री के निर्देश के सिर्फ दो दिन बाद दो दिन से भी कम समय में तीस बच्चों की मौत कैसे हो गई? क्या घोर कुप्रबंध और भयावह संवेदनहीनता का यह आलम इसलिए है कि जान गंवाने वाले बच्चे गरीब, कमजोर परिवारों के थे? क्या इसी तरह से सबका साथ सबका विकास के नारे पर अमल होगा?

 

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