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चिंता का दायरा

फरीदाबाद के सरकारी स्कूल में जो घटना हुई उसके लिए क्या वहां के शिक्षकों को जिम्मेवार नहीं ठहराया जाना चाहिए?
Author September 13, 2017 00:26 am
रेयान इंटरनेशनल स्कूल।

स्कूलों में बच्चों के यौन शोषण और हत्या जैसी वारदातों ने जनमानस को झकझोर दिया है। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के मासूम प्रद्युम्न की हत्या के बाद एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सीकरी गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले सातवीं कक्षा के छात्र के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी और शव को पास की झाड़ियों में फेंक दिया गया था। पुलिस ने छात्र का कंकाल बरामद कर लिया है और आरोपी भी गिरफ्त में आ गया है। दिल्ली के गांधीनगर के एक प्राइवेट स्कूल में भी बच्ची के यौन शोषण की घटना सामने है। अब एक और गंभीर व शर्मनाक घटना पर गौर करें। यह घटना हैदराबाद की है। एक छात्रा को उसकी शिक्षिका ने लड़कों के लिए बने शौचालय में खड़े रहने की सजा दे डाली, सिर्फ इसलिए कि छात्रा स्कूल की वर्दी में नहीं आई थी। गौर करें, फरीदाबाद और हैदराबाद की घटनाएं मीडिया में वह जगह और गंभीरता नहीं पा सकीं जो रेयान इंटरनेशनल की घटना को मिली।

हालांकि इसमें दो राय नहीं कि रेयान इंटरनेशनल की घटना वाकई दहला देने वाली है। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए केंद्र, हरियाणा सरकार, सीबीएसई और रेयान इंटरनेशनल स्कूल को नोटिस भेजा है और तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि यह एक स्कूल भर का मामला नहीं, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा व्यापक मसला है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाले तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश बनाने को भी कहा है। बच्चों के यौन शोषण, अपहरण, हत्या जैसी घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अलबत्ता ज्यादातर मामलों में खुलासा नहीं होता। और होता है भी तो वह मीडिया में उस तरह नहीं छा पाता जैसे कि रेयान इंटरनेशनल की घटना छा गई। पर मामला कुल मिलाकर गंभीर इसलिए है क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। चाहे वाकया दिल्ली का हो या दिल्ली से बाहर का, चाहे प्राइवेट स्कूल का हो या सरकारी स्कूल का, हमारी चिंता सब घटनाओं को लेकर होनी चाहिए। फरीदाबाद के सरकारी स्कूल में जो घटना हुई उसके लिए क्या वहां के शिक्षकों को जिम्मेवार नहीं ठहराया जाना चाहिए?

फरीदाबाद के सीकरी गांव के इस सरकारी स्कूल की सातवीं कक्षा के छात्र संजीव को गांव का ही एक लड़का भरी कक्षा के बीच से बुला कर ले गया था। किसी शिक्षक ने न तो उसे रोका, न कुछ पूछा। जब मामला गरमाया तो संकट में फंसता देख स्कूल के प्रधानाध्यापक ने अपना तबादला करवा कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। राजधानी या कुछ बड़े शहरों को छोड़ दें तो कहीं और होने वाली इस तरह की घटनाओं को मीडिया में शायद ही आवाज मिल पाती हो। इन्हें मामूली मानते हुए और ‘यह तो होता रहता है’ मान कर कोई इन्हें उजागर करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती। नतीजा यह होता है कि ऐसे बहुत-से मामले दबे रह जाते हैं और दोषियों का कुछ नहीं बिगड़ता। यों भी दूरदराज से इस तरह के अपराधों की खबरें मीडिया तक नहीं पहुंच पातीं और न मीडिया उनके प्रति उत्साहित रहता है। रेयान को लेकर चिंता वाजिब है, पर इस तरह के दूसरे मामलों पर खामोशी क्यों!

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