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कर चोरी पर नजर

सरकार आयकर चोरी पर नकेल कसने को लेकर गंभीर है। वित्तमंत्री अरुण जेटली कई बार कर चोरी के खिलाफ अभियान छेड़ने की बात दोहरा चुके हैं। आयकर विभाग ने इस वित्तवर्ष..
Author नई दिल्ली | September 8, 2015 16:18 pm

सरकार आयकर चोरी पर नकेल कसने को लेकर गंभीर है। वित्तमंत्री अरुण जेटली कई बार कर चोरी के खिलाफ अभियान छेड़ने की बात दोहरा चुके हैं। आयकर विभाग ने इस वित्तवर्ष में एक करोड़ नए करदाताओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए क्षेत्रवार लक्ष्य तय किए गए हैं। उसी क्रम में अब उसने कर चोरी करने वालों के बारे में सूचना उपलब्ध कराने वालों को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। अगर कोई व्यक्ति कर चोरी करने वाले के बारे में पुख्ता सबूत के साथ जानकारी देता है तो उसे कुल रकम का दस प्रतिशत हिस्सा इनाम के तौर पर दिया जाएगा। इसमें पुरस्कार की राशि अधिकतम पंद्रह लाख रुपए तक रखी गई है।

ऐसी सूचनाएं उजागर करने वालों की पहचान गुप्त रखने का भी एलान किया गया है। आयकर न देने वालों के खिलाफ सरकार की इस सख्ती की वजहें साफ हैं। इस तरह उसे राजस्व घाटे से उबरने में काफी मदद मिल सकती है। मगर इस अभियान में उसे कितनी कामयाबी मिल पाएगी, कहना मुश्किल है। कर चोरी पुरानी समस्या है और इस पर नकेल कसना सरकारों के लिए हमेशा कठिन बना रहा है। नौकरी-पेशा वेतनभोगी लोगों की कमाई पर नजर रखना आसान है, उसे जांचने के लिए साधन मौजूद हैं। मगर व्यवसाय और स्वतंत्र रूप से कोई पेशा करने वालों की आमदनी का पता उनकी घोषणा के आधार पर चल पाता है।

विचित्र है कि हर साल करोड़पतियों की तादाद कुछ बढ़ जाती है, पर उस अनुपात में आयकर दाताओं का संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो पाती। यह एक प्रवृत्ति-सी बन गई है कि लोग आय के ब्योरे यह सोच कर छिपाते रहते हैं कि जब कानून का शिकंजा कसेगा, तब देखा जाएगा। यों आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में सरकारी कर्मचारियों पर आयकर विभाग के छापे पड़ते रहते हैं, पर व्यवसाय आदि करने वालों को इसका भय कम ही सताता देखा जाता है।

आयकर विभाग ने बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन आदि के जरिए लोगों की आमदनी का अंदाजा लगाने के लिए पुख्ता तंत्र विकसित किया हुआ है। बड़े लेन-देन में पैन कार्ड आदि की अनिवार्यता के चलते भी सूचनाएं आसानी से एकत्र हो जाती हैं, फिर भी कर चोरी करने वालों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए जा पाते, तो इसमें आयकर विभाग की शिथिलता बड़ा कारण है।

आमतौर पर बड़े कारोबारी आयकर चुकाने के मामले में ईमानदारी नहीं बरतते। फिर सरकार खुद अनेक मौकों पर औद्योगिक घरानों को वित्तीय सहूलियत देने के मकसद से उन्हें भारी कर माफी देती है। यह बात छिपी नहीं है कि अगर सिर्फ औद्योगिक घरानों पर कड़ी नजर रखी जाए और आयकर कानूनों के तहत कार्रवाई हो तो राजस्व घाटा काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। काले धन पर रोक लगाने के मकसद से अनेक उपाय किए गए, पर इस दिशा में अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाई है। कर चोरी से जुड़ी सूचनाएं उजागर करने के लिए आम नागरिकों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सरकार को आयकर विभाग के कर्मचारियों को भी कर्तव्यनिष्ठ बनाने के उपायों पर विचार करना चाहिए।

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