June 29, 2017

ताज़ा खबर
 

मुसीबत की थैली

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में प्लास्टिक की थैलियों की क्या भूमिका रही है, यह अब किसी से छिपा नहीं है।

Author April 12, 2017 05:18 am
बाजार से कोई भी वस्तु खरीदने जाते शायद ही किसी व्यक्ति के पास अपना थैला होता है।

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में प्लास्टिक की थैलियों की क्या भूमिका रही है, यह अब किसी से छिपा नहीं है। प्रदूषण से लेकर इसके दूसरे घातक प्रभावों की बाबत लंबे समय से चिंता जताई जा रही है। लेकिन दशकों से इससे निपटने और इस पर पाबंदी लगाने के दावों के बावजूद आज भी पॉलिथीन के इस्तेमाल को रोका नहीं जा सका है। अब मध्यप्रदेश सरकार ने अगले महीने की शुरुआत से प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है। इस पहल में नया यह है कि अब तक जहां प्लास्टिक को पर्यावरण के लिहाज से कई स्तरों पर खतरनाक बता कर इस पर रोक लगाने की बात की जा रही थी, वहीं मध्यप्रदेश सरकार ने पाबंदी के लिए पर्यावरण के अलावा गाय के लिए खतरे को भी मुख्य वजह बताया है। मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि चूंकि अपने लिए खाना तलाशती गायें प्लास्टिक की थैलियों को भी खा जाती हैं, इसलिए वे बीमार हो रही हैं और उनकी मौत भी हो जाती है। दरअसल, कचरे के ढेर में सड़ती प्लास्टिक की थैलियां आज न केवल गाय, बल्कि खुले में घूमने वाले दूसरे पशुओं को भी बुरी तरह अपनी चपेट में ले रही हैं।

बहरहाल, बाजार से कोई भी वस्तु खरीदने जाते शायद ही किसी व्यक्ति के पास अपना थैला होता है। सब्जियों से लेकर दूसरे उपयोग का कोई भी छोटा-मोटा सामान लाने के लिए लोग बिना किसी संकोच के प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल करते हैं। ये सारी थैलियां सड़कों के किनारे कचरे के ढेर पर जाती हैं और फिर नालियों में पानी के बहाव को रोकने की वजह बनती हैं। आज कोई भी देख सकता है कि कचरे के ढेर में दूसरी किसी भी वस्तु के मुकाबले प्लास्टिक की थैलियां ही ज्यादा होती हैं। मध्यप्रदेश सरकार के मुताबिक नए कानून में केवल प्लास्टिक की थैलियों और पन्नियों पर पाबंदी होगी, इससे बनने वाली बाल्टी या अन्य सामान पर कोई रोक नहीं होगा। आज घरेलू उपयोग की बहुत सारी वस्तुएं बाजार में उपलब्ध हैं जो प्लास्टिक से ही बनी होती हैं। सस्ता होने की वजह से ज्यादातर लोग धातुओं के बजाय इन्हीं प्लास्टिक से बनी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। शायद ऐसे सामानों पर निर्भरता को देखते हुए ही मध्यप्रदेश सरकार ने फिलहाल प्रतिबंध को प्लास्टिक की थैलियों तक सीमित रखा है।

लेकिन सच यह है कि थैलियों के साथ-साथ प्लास्टिक से बने सामानों को तैयार करने में भी कई तरह के खतरनाक रसायनों के घोल का इस्तेमाल होता है, जिसमें रखे गए खाने-पीने के सामान पर इसका सेहत के लिहाज से बुरा असर पड़ता है। इनमें कई ऐसे रसायन होते हैं जिनकी थोड़ी भी मात्रा अगर शरीर में चली जाए तो वह कैंसर की वजह बन सकती है, उससे इंसानी मस्तिष्क के ऊतकों या फिर हृदय पर घातक असर पड़ सकता है। मुश्किल यह है कि बाजार के फैलाव के साथ-साथ वस्तुओं की बिक्री में थैलियों और पैकिंग आदि में पॉलिथीन का जितना इस्तेमाल होने लगा है, उसका व्यावहारिक विकल्प निकाले बगैर इसे पूरी तरह रोक पाना शायद संभव नहीं हो। कागज और प्लास्टिक के मिश्रण से बनी गलनीय थैलियों को बढ़ावा देने के सुझाव अक्सर सामने आते रहे हैं। लेकिन अब तक उस ओर कोई ठोस पहल करने की जरूरत नहीं समझी गई।

कौन हैं कुलभूषण जाधव? जानिए क्या हैं उन पर आरोप

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on April 12, 2017 5:18 am

  1. No Comments.
सबरंग