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आतंक के खिलाफ

इसी कड़ी में सोमवार को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब शोपियां इलाके में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में प्रमुख आतंकी जाहिद सहित हिज्बुल मुजाहिदीन के तीन आतंकियों को मार गिराया।
Author October 11, 2017 04:52 am
कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान। (File Photo)

इसमें कोई संदेह नहीं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी समूहों पर पूरी तरह काबू पाना फिलहाल मुमकिन नहीं हो सका है। लेकिन यह साफ देखा जा सकता है कि हाल के दिनों में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ कई कामयाबियां हासिल की हैं। मसलन, पिछले कुछ समय के दौरान आम आबादी पर बमबारी से लेकर सैन्य शिविरों तक पर हमले करने वाले आतंकियों को सुरक्षा बलों की चौकसी की वजह से मुंह की खानी पड़ी और उनमें से कई मारे भी गए। इसी कड़ी में सोमवार को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब शोपियां इलाके में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में प्रमुख आतंकी जाहिद सहित हिज्बुल मुजाहिदीन के तीन आतंकियों को मार गिराया। इसके साथ ही बारामूला जिले में एक अन्य मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद का एक शीर्ष कमांडर सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया। हालांकि इस मुठभेड़ के दौरान सेना के एक जवान की भी मौत हो गई। गौरतलब है कि कड़ी चौकसी के बावजूद पिछले दिनों आतंकवादियों ने सैन्य शिोविरों पर हमले किए और उनमें कई जवानों की जान भी गई। खासतौर पर पिछले साल उरी हमले में जिस तरह सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ, सत्रह जवान मारे गए और तीस घायल हुए थे, वह एक बड़ा सबक था।

उसके बाद की बढ़ी हुई चौकसी का ही नतीजा रहा कि हफ्ते भर पहले श्रीनगर हवाई अड्डे के नजदीक बीएसएफ के एक शिविर पर लगभग उसी तरह के आतंकी हमले का सामना करते हुए सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया था। उसके बरक्स बारामूला की ताजा मुठभेड़ खुफिया तंत्र की सूचना पर आधारित थी। बारामूला जिले के लदूरा इलाके को घेर कर सुरक्षा बल जब तलाशी अभियान चला रहे थे, तभी उन पर गोलीबारी शुरू हो गई। इसके बाद हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा खालिद उर्फ शाहिद शौकत मारा गया। उसके बारे में पुलिस का कहना है कि वह पिछले हफ्ते श्रीनगर हवाई अड्डे के नजदीक बीएसएफ के एक शिविर और पिछले महीने पुलवामा में जिला पुलिस लाइंस पर हुए आत्मघाती हमले का मास्टरमाइंड था। पुलिस की मानें तो खालिद का मारा जाना इसलिए भी अहम है कि वह खासतौर पर सुरक्षा बलों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले की संभावनाएं टटोलता था और भोले-भाले युवाओं को धन का लालच देकर अपने गुट में शामिल होने के लिए उकसाता था। ऐसे युवा ही आगे चल कर लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के जाल में फंस जाते हैं। जाहिर है, अधिकतम चौकसी के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी भरोसे में लेने की जरूरत है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान को मजबूती दी है। ब्रिक्स सम्मेलन से लेकर दूसरे मंचों पर भारत ने पाकिस्तान पर जो दबाव बनाया, उसी के बाद पाकिस्तान ने यह स्वीकार किया कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन अपनी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करते हैं। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को और पुख्ता करने के साथ ही स्थानीय आबादी से संवाद कायम करने और उन्हें आतंकी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों में शामिल करने की कोशिशें हुई हैं। नतीजतन, कुछ समय से जम्मू-कश्मीर के तमाम इलाकों में काम करने वाली आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी खुफिया एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर हुआ है। यही वजह है कि आतंकी हमलों से निपटने में कामयाबी की संभावनाएं बढ़ी हैं।

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