December 04, 2016

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संपादकीय: टूटते कगार

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव और उनके करीबी समझे जाने वाले चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

Author October 24, 2016 03:35 am
(बाएं से दाएं) शिवपाल सिंह यादव, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।

समाजवादी पार्टी में लंबे समय से चल रहा विवाद अब सतह पर आ गया है। दो दिन पहले तक कयास लगाए जा रहे थे कि मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रहा झगड़ा सुलह-समझौते से निपटा लिया जाएगा और पार्टी में टूट की संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी। मगर अब उसकी गुंजाइश खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के बीच पार्टी में दो धड़े आमने-सामने आ गए हैं और नेताओं की बर्खातगी का सिलसिला शुरू हो गया है। पहले अखिलेश यादव के पक्ष में उतरने वाले उदयवीर सिंह को पार्टी से बाहर निकाला गया, उसके बाद जब रामगोपाल यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चिट्ठी लिखी और मुलायम सिंह के करीबी लोगों पर खुला निशाना साधा तो उन्हें भी छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया।

उधर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव और उनके करीबी समझे जाने वाले चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। सोमवार को होने वाली विधायकों-कार्यकर्ताओं की बैठक का भी इंतजार नहीं किया गया और अब दोनों गुटों के नेता-कार्यकर्ता खुलेआम एक-दूसरे पर दोषारोपण करते सड़कों पर उतर आए हैं। कयास है कि रामगोपाल यादव के साथ मिल कर अखिलेश यादव अलग पार्टी बना सकते हैं। हालांकि अखिलेश का कहना है कि न तो उन्हें अपने पिता से कोई शिकायत है और न वे पार्टी के खिलाफ हैं। मगर वे शुरू से कहते आ रहे हैं कि अमर सिंह और उनके करीबियों का पार्टी में रहना उन्हें गवारा नहीं। नवंबर में पार्टी के पच्चीस साल पूरे होने का जलसा है, अखिलेश यादव ने उसमें शरीक होने का संकेत दिया है। मगर उससे दो दिन पहले ही उन्होंने प्रदेश में रथयात्रा शुरू करने का भी एलान कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं और समाजवादी पार्टी में यह फूट उसके लिए अच्छा संकेत नहीं है। समाजवादी पार्टी के शासन से पहले ही लोग नाखुश हैं। अब पार्टी के भीतर से ही एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने शुरू हो गए हैं। रामगोपाल यादव पर निशाना साधते हुए शिवपाल यादव ने उनके बेटे-बहू के भ्रष्टाचार और इससे बचने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने का आरोप लगाया। उधर उदयवीर सिंह और रामगोपाल यादव ने नाम लिए बगैर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर अनियमितताओं और मनमानी के आरोप लगाए हैं। इससे लोगों में समाजवादी पार्टी के खिलाफ संकेत गए हैं। इसे किसी भी रूप में दुरुस्त कर पाना न तो मुलायम सिंह यादव के वश की बात रह गई है और न किसी दूसरे नेता के। इस स्थिति में पार्टी को टूट से रोकने का एक ही रास्ता हो सकता है कि शिवपाल यादव और अमर सिंह खुद पार्टी से इस्तीफा दे दें।

मगर मुलायम सिंह यादव इन दोनों को इतनी आसानी से अलग नहीं करना चाहेंगे। फिर अगर ऐसा होता भी है तो पार्टी की एकता लौट पाएगी, दावा करना मुश्किल है। क्योंकि अखिलेश के समर्थन में उतरे और पार्टी से बाहर किए गए नेताओं को मुलायम समर्थक शायद ही आसानी से स्वीकार कर पाएं। समाजवादी पार्टी का झगड़ा अब परिवार में वर्चस्व की लड़ाई का रूप ले चुका है। पहले से साफ है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रहने वाली है, उसमें परिवार के झगड़े की वजह से उसकी स्थिति और खराब हो गई है।

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First Published on October 24, 2016 3:34 am

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