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संपादकीय: पाकिस्तान का द्वंद्व

भारत के कूटनीतिक प्रयासों के चलते जिस तरह पाकिस्तान अलग-थलग पड़ता जा रहा है, नवाज शरीफ का यह रुख उसी का नतीजा है।
Author October 8, 2016 04:53 am
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ। (REUTERS/Faisal Mahmood/23 March, 2016)

उड़ी हमले के बाद पाक अधिकृत कश्मीर में भारत की तरफ से की गई सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में अजीब द्वंद्व की स्थिति बन गई है। वहां के एक अखबार के हवाले से कहा गया है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सेना को चेतावनी दी है कि वह आतंकी संगठनों को शह देने से बाज आए। उन्होंने मुंबई और पठानकोट हमलों की जांच कराने को भी कहा है। माना जा रहा है कि भारत के कूटनीतिक प्रयासों के चलते जिस तरह पाकिस्तान अलग-थलग पड़ता जा रहा है, नवाज शरीफ का यह रुख उसी का नतीजा है। मगर पाकिस्तानी सेना के प्रमुख राहिल शरीफ का सुर अब भी भारत के खिलाफ बना हुआ है। उन्होंने भारत की सैन्य कार्रवाई को झूठ का पुलिंदा करार दिया है।

उधर पाकिस्तान के विपक्षी नेता नवाज शरीफ के अड़ियल रवैए पर अब खुल कर बोलने लगे हैं। अगर सचमुच नवाज शरीफ का मन बदल रहा है, तो इसे दोनों देशों के लिए अच्छा संकेत माना जाना चाहिए। पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का चौतरफा दबाव बना हुआ है। सार्क के शिखर सम्मेलन में भारत सहित अधिकतर देशों के शिरकत न करने से पाकिस्तान के खिलाफ एक कड़ा संदेश गया है। अब भारत आसियान देशों को भी अपने पक्ष में जुटाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में पाकिस्तान इस तनाव की स्थिति को सामान्य करने की पहल करता है, तो उसके बेहतर नतीजे निकल सकते हैं। मगर देखने की बात होगी कि नवाज शरीफ प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और मुंबई, पठानकोट आदि हमलों में शामिल हाफिज सईद जैसे नेताओं के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए सेना को किस हद तक तैयार करते हैं।

हालांकि यह पहला मौका नहीं होगा, जब अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की पहल करेगा। पहले भी जब अमेरिका ने दबाव बनाया था, तो उसने अफगानिस्तान की सीमा पर चल रहे आतंकी शिविरों को तहस-नहस करने के लिए हवाई हमले किए थे। पर बाद में पता चला कि वह कार्रवाई सोची-समझी रणनीति के तहत की गई थी। सिर्फ उन्हीं संगठनों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए थे जो पाकिस्तान के लिए भी सिरदर्द बने हुए थे। जिन संगठनों को पाकिस्तानी सेना और फिर आइएसआइ अपना मकसद साधने के लिए भारत के खिलाफ इस्तेमाल करते रहे हैं, उन्हें महफूज रहने दिया गया। उन पर प्रतिबंध जरूर लगा दिया गया, पर उनके नेता खुलेआम घूमते रहे।

हाफिज सईद आज भी भारत के खिलाफ रैलियां आयोजित और दहशतगर्दी फैलाने की खुलेआम घोषणा करता है, पर पाकिस्तान सरकार उसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाती। जबकि उसके खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के ढेर सबूत हैं। पर जब भी भारत ऐसा कोई सबूत पेश करता है, पाकिस्तान उसे सिरे से खारिज कर देता है। सवाल है कि अब अगर वहां के हुक्मरान का मन बदल रहा है तो कहीं वह भी पहले की तरह दिखावे की कार्रवाई तो बन कर नहीं रह जाएगा। भारत की पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति के चलते अब वहां के लोगों में भी सुगबुगाहट होने लगी है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद वहां कई जगहों पर लोगों ने पाक सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। ऐसे में पाकिस्तान अपने यहां के लोगों को शांत करने और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अपना चेहरा छिपाने के लिए मन बदलने का नाटक करने के बजाय हकीकत का सामना करे तो उसके लिए बेहतर होगा।

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