December 06, 2016

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राहत और आफत

नोटबंदी से देश भर में हो रही चौतरफा परेशानियों के मद््देनजर सरकार ने सोमवार को कुछ और राहत का एलान किया।

Author November 23, 2016 04:09 am
दिल्‍ली में बैंकों के बाहर भारी भीड़ है। किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस तैनात की गई है। (Source: Twitter)

नोटबंदी से देश भर में हो रही चौतरफा परेशानियों के मद््देनजर सरकार ने सोमवार को कुछ और राहत का एलान किया। ये घोषणाएं यही बताती हैं कि सरकार को देर से ही सही, परोक्ष रूप से यह मानना पड़ रहा है कि हर कहीं लोग काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। दूसरे, ये घोषणाएं यह भी साबित करती हैं कि इतने बड़े फैसले को लागू करने की सरकार की तैयारी एकदम लचर थी। जबकि सरकार यह दावा करती है कि उसकी तैयारी महीनों से चल रही थी। क्या यही सुशासन और स्किल इंडिया की झलक है? नई घोषणा में सरकार ने मुख्य रूप से किसानों और उन लोगों को राहत दी है जिन्होंने कोई बैंक-कर्ज ले रखा है। प्रधानमंत्री ने जिन नोटों को आठ नवंबर को अमान्य घोषित कर दिया, अब उनका इस्तेमाल किसान बीज खरीदने के लिए कर सकेंगे। लेकिन इस सुविधा की बदौलत वे चाहे जहां से बीज नहीं खरीद सकते। किसान अपना पहचान-पत्र दिखा कर सरकारी बिक्री केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों, बीज निगमों या भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से बीज खरीद सकेंगे। सवाल है कि क्या इन संस्थानों की पहुंच दूरदराज तक सब कहीं है? सरकार को यह इलहाम इतनी देर से क्यों हुआ कि उसके फैसले का रबी की बुआई पर क्या असर पड़ेगा?

जो राहत अब दी जा रही है, क्या उसकी तजवीज पहले से नहीं की जा सकती थी? इससे पहले सरकार ने किसानों को अपने केवाईसी अनुपालन वाले खाते से पच्चीस हजार रुपए की नकदी निकालने की छूट दी थी। साथ ही फसल बीमा प्रीमियम के भुगतान की अवधि पंद्रह दिन बढ़ा दी। लेकिन हालत यह है कि अधिकांश जगह बैंकों में नकदी की भारी किल्लत बनी हुई है। इसलिए निकासी सीमा बढ़ाने का कोई व्यावहारिक नतीजा नहीं आ पा रहा है। बैंक जाने पर नगदी न होने की तख्ती टंगी दिखती है। ऊपर से, तरह-तरह की शर्तें राहत पाने की प्रक्रिया को जटिल बना दे रही हैं। जिनके यहां शादी है उन्हें अपने खाते से ढाई लाख रुपए निकालने की छूट मिली है। पर इसके साथ ढेर सारी शर्तें जोड़ दी गई हैं जो झुंझलाहट का ही सबब बनेंगी। जबकि सरकार यह दावा दोहराते नहीं थकती कि विमुद्रीकरण के उसके फैसले से सब लोग खुश हैं। नित नए फैसलों से तैयारी की कमी तो जाहिर होती ही है, गलतफहमी भी फैलती है। कई बार बैंककर्मी भी गफलत में दिखते हैं कि ताजातरीन नियम क्या है। सरकार के फैसलों जैसा ही हाल उसके आश्वासनों का भी है।

नगदी की समस्या को देखते हुए घर और कार सहित सभी ऋणों की किस्तों की अदायगी पर साठ दिनों की मोहलत दी गई है। लेकिन मकान और कार की खातिर लिये गए कर्जों की किस्तें नगद कौन भरता है? ये किस्तें तो बैंक खातों के जरिए ही जमा होती रहती हैं। एलआइसी का प्रीमियम अलबत्ता बहुत-से लोग नगद चुकाते हैं। घर और कार के कर्जों की किस्तें चुकाने में साठ दिन की मोहलत राहत की गिनती बढ़ाने के सिवा क्या है! नोटबंदी का एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी ज्यादातर एटीएम सूखे हैं और नगदी की भारी कमी कायम है। राहत की जो घोषणाएं हुई हैं उनसे ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। रोज नए-नए फैसलों और घोषित निर्णयों में जल्दी-जल्दी फेरबदल से कोई खास राहत तो नहीं दिख रही है, हां आफत जरूर पहले की तरह बनी हुई है।

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First Published on November 23, 2016 3:49 am

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