December 08, 2016

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मकसद बनाम तैयारी

पांच सौ और हजार रुपए के नोट अमान्य करने के पांच दिन बाद देश में स्थिति सामान्य होती नजर आनी चाहिए थी, पर हालात और विकट नजर आए।

Author November 15, 2016 03:16 am
एक युवक 500 रुपये का नया नोट दिखाते हुए। (Source: ANI)

पांच सौ और हजार रुपए के नोट अमान्य करने के पांच दिन बाद देश में स्थिति सामान्य होती नजर आनी चाहिए थी, पर हालात और विकट नजर आए। वरना प्रधानमंत्री को लोगों से सहयोग की ऐसी भावुक अपील करने की जरूरत न पड़ती। रविवार को एक के बाद एक, अपने तीन भाषणों में उन्होंने लोगों का सहयोग मांगा। पहले पणजी, फिर पुणे और कर्नाटक के बेलगावी में उन्होंने कहा कि काले धन के खिलाफ जो मुहिम उन्होंने छेड़ी है, उसमें लोग साथ दें और सरकार को पचास दिनों का वक्त दें। उन्होंने कहा कि यह अंत नहीं है, बल्कि अभी तो शुरुआत हुई; उनके दिमाग में कई योजनाएं हैं और उन्हें वे हर कीमत पर लागू करेंगे। ये योजनाएं क्या-क्या हैं, सबके बारे में तो प्रधानमंत्री ने कोई साफ संकेत नहीं दिया, पर यह जरूर जता दिया कि उनका अगला कदम बेनामी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई का होगा। बहुत सारे अर्थशास्त्रियों ने भी कहा है कि पुराने की जगह नए नोट जारी करने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि काले धन का एक छोटा हिस्सा ही नगदी के रूप में होता है। इसलिए सरकार को कई और कदम उठाने चाहिए।

काले धन के खिलाफ सरकार की मुहिम तार्किक परिणति की ओर बढ़े, इससे अच्छी बात और क्या होगी! पर नोटबंदी के फैसले का दंश लोगों को पचास दिनों तक क्यों झेलना पड़ेगा? माना जा रहा था कि बैंकों में और एटीएम पर भीड़ तो होगी, पर चार-दिनों में या हफ्ते भर में स्थिति असामान्य नहीं तो, राहत की जरूर हो जाएगी। लेकिन अंतहीन भीड़ ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया। अनगिनत लोगों को नोट बदलने और पैसा निकालने के लिए इतनी तकलीफें उठानी पड़ी हैं कि सारा कुछ बयान नहीं किया जा सकता। और यही कारण है कि सरकार का जो फैसला शुरू में अमूमन सराहना का विषय था, वह सवालों में घिर गया। लोग अब भी मानते हैं कि नोटबंदी के फैसले के पीछे मकसद नेक है, पर वे यह भी कहते हैं कि सरकार ने इतना बड़ा कदम जल्दबाजी में, बिना तैयारी के क्यों उठाया। पर यह मानना मुश्किल है कि सरकार ने अचानक या कुछ ही दिन पहले यह फैसला किया होगा। सच यही होगा कि महीनों से इसकी तैयारी की गई होगी। पर एटीएम मशीनें नए नोट के उपयुक्त हैं या नहीं, इसका परीक्षण क्यों नहीं किया गया?

पांच सौ और हजार के नोट बंद करने के बाद सिर्फ दो हजार का नोट जारी करने पर खुले पैसे की कितनी दिक्कत होगी, इतनी मोटी-सी बात का अंदाजा बड़े-बड़े वित्त विशेषज्ञ क्यों नहीं लगा पाए? अब सरकार ने राहत के कुछ कदम उठाए हैं। एटीएम से एक दिन में ढाई हजार और बैंक से एक हफ्ते में चौबीस हजार रुपए निकालने की इजाजत देकर निकासी राशि की सीमा में बढ़ोतरी कर दी है। पर पिछले दिनों के अनुभव बताते हैं कि ज्यादातर एटीएम काम नहीं कर रहे, जो काम करते भी हैं, जल्दी ही सूख जाते हैं। बैंकों की शाखाओं पर लगातार इतनी भीड़ बनी रहती है कि बहुत-से लोग कतार में लगने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाते। दो-तीन हफ्ते में स्थिति सामान्य होने के वित्तमंत्री के संकेत और पचास दिन तक धीरज रखने की प्रधानमंत्री की अपील से यही लगता है कि परेशानी अभी बनी रहेगी। यह नितांत अप्रत्याशित है। लोग पूछ रहे हैं कि बिना तैयारी के सरकार ने नोट बंद करने का एलान क्यों कर दिया। इसकी जवाबदेही किसकी है?

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First Published on November 15, 2016 3:16 am

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