April 28, 2017

ताज़ा खबर

 

सरबजीत की राह पर जा रहा है कुलभूषण जाधव का मामला, पाकिस्तान छिपाना चाहता है अपनी नाकामी

संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों के मुताबिक जासूसी के आरोप में पकड़े गए व्यक्ति के नागरिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।

Author April 12, 2017 13:27 pm
भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)

एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती दिख रही है। पठानकोट और उड़ी में हुए आतंकी हमलों के कारण पिछले साल दोनों देशों के बीच तनाव रहा था। इस बार कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा सुनाई गई सजा तकरार का विषय बनी है। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोप में चार अप्रैल को फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर अब वहां के सेना प्रमुख ने भी मुहर लगा दी है। पर इसी के साथ भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी बढ़ गई है।

सरबजीत की तरह जाधव का मामला भी काफी भावनात्मक हो गया है, इसलिए तल्खी और बढ़ने के ही आसार हैं। भारत सरकार के रुख से जाहिर है कि वह जाधव के बचाव में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती। यह उचित भी है। सिर्फ इसलिए नहीं कि जाधव भारतीय नागरिक हैं और नौसेना में अधिकारी रह चुके हैं, बल्कि खासकर इसलिए कि उनके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही की विश्वसनीयता में ढेर सारे छेद हैं।

पाकिस्तान का दावा है कि जाधव रॉ के एजेंट हैं और बलूचिस्तान में जासूसी तथा विध्वंसक गतिविधियों में शामिल थे, तथा उन्हें बलूचिस्तान के चमान से गिरफ्तार किया गया था। जासूसी व आतंकवादी गतिविधि के आरोप की पुष्टि में पाकिस्तान ने जाधव के कथित कबूलनामे का वीडियो जारी किया था। लेकिन भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया और बाद में गिरफ्तारी दिखा दी गई। किसका दावा सही है इसे जाने दें, तब भी जाधव को सुनाई गई सजा को लेकर कई सवाल उठते हैं। खुद पाकिस्तान सरकार के सलाहकार सरताज अजीज ने पाकिस्तानी सीनेट को बताया था कि जाधव के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं। यह अलग बात है कि बाद में अपने इस बयान से वे पलट गए।

अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदों के मुताबिक किसी देश का जासूस कहीं पकड़ा जाता है तो उसके मुकदमे की सुनवाई के लिए उसके देश को वकील उपलब्ध कराने की इजाजत होनी चाहिए। लेकिन जाधव के मामले में पाकिस्तान ने वकील मुहैया कराने की इजाजत देना तो दूर, भारतीय अधिकारियों को उनसे मिलने तक नहीं दिया। संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों के मुताबिक जासूसी के आरोप में पकड़े गए व्यक्ति के नागरिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। अगर कोई देश उसे अपना नागरिक स्वीकार कर ले, तो उसके खिलाफ कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत करनी होगी। लेकिन पाकिस्तान ने किसी भी स्तर पर न विएना समझौैते का पालन किया न संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों का।

साक्ष्य पर्याप्त न होने की बात तो सरताज अजीज कह ही चुके थे, जाधव के कथित कबूलनामे के जिस वीडियो को सबसे खास सबूत बताया गया, उसमें उनतीस कट हैं, जो वीडियो के साथ छेड़छाड़ किए जाने की तरफ संकेत करते हैं। अगर संदिग्ध सबूतों के बावजूद जाधव को फांसी की सजा सुना दी गई, तो यह बात पाकिस्तान की एक खास मंशा या रणनीति की तरफ इशारा करती है।

पाकिस्तान जब-तब यह कहता रहा है कि बलूचिस्तान में भारत अस्थिरता फैलाने में मुब्तिला है और वहां विध्वंसक गतिविधियों के लिए चोरी-छिपे मदद करता है। इससे दो मतलब सधते हैं। एक, आतंकवाद को लेकर अपने ऊपर बराबर लगने वाले आरोपों से दुनिया का ध्यान हटाना, और दूसरा, भारत पर पलटवार। जब से मोदी ने बलूचिस्तान की दुखती रग पर हाथ रखा है, तब से पाकिस्तान और भी खफा रहा होगा। जाधव के मामले में उसे एक रणनीतिक मौका नजर आया होगा। लेकिन कूटनीतिक दांव-पेच का यह मतलब नहीं है कि तथ्यों की प्रामाणिकता तथा पारदर्शी न्यायिक कार्यवाही के तकाजे की बलि चढ़ा दी जाए।

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जारी हुआ जमानती वारंट; पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर की थी टिप्पणी

बीजेपी यूथ विंग के नेता ने कहा- "ममता बनर्जी का सिर काटकर लाने वाले को 11 लाख रुपए दूंगा"

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on April 12, 2017 5:03 am

  1. No Comments.

सबरंग