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एक और चोट

आम आदमी पार्टी से निष्कासित दिल्ली के पूर्व जलमंत्री कपिल मिश्र ने एक बार फिर अरविंद केजरीवाल पर करारी चोट की है।
Author May 15, 2017 05:11 am
कपिल मिश्रा की मां ने लिखा कि मैंने ऐसा नहीं सोचा था कि मेरा बेटा तुमसे सवाल पूछेगा और तुम (अरविंद केजरीवाल) सवालों से बचोगे। (Source: PTI)

आम आदमी पार्टी से निष्कासित दिल्ली के पूर्व जलमंत्री कपिल मिश्र ने एक बार फिर अरविंद केजरीवाल पर करारी चोट की है। करीब दस दिन पहले जब उन्हें केजरीवाल मंत्रिमंडल से बाहर करने का फैसला किया गया तो वे विद्रोह कर बैठे और सबसे पहले सीधे मुख्यमंत्री और उनकी सरकार में एक मंत्री सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस बुला कर दावा किया कि उनकी आंखों के सामने सत्येंद्र जैन ने अरविंद केजरीवाल को दो करोड़ रुपए नगद दिए। सत्येंद्र जैन ने केजरीवाल के करीबी रिश्तेदार के लिए पचास करोड़ रुपए की जमीन का सौदा कराया। उन्होंने केजरीवाल पर शीला दीक्षित सरकार के समय हुए चार सौ करोड़ रुपए के जल टैंकर घोटाले को दबाए रखने का भी आरोप लगाया। इन आरोपों पर अरविंद केजरीवाल अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। इसके विरोध में कपिल मिश्र भूख हड़ताल पर बैठ गए और पांच दिन बाद उन्होंने तमाम सबूतों के साथ मीडिया के सामने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने चंदे की लेन-देन में बड़ी हेराफेरी की। 2013-14 में करीब पैंतालीस करोड़ रुपए चंदे के रूप में आए, पर चुनाव आयोग के सामने महज उन्नीस करोड़ रुपए का हिसाब-किताब दिया गया। कपिल मिश्र का अरविंद केजरीवाल पर यह दूसरा बड़ा संगीन आरोप है।

हालांकि आम आदमी पार्टी की तरफ से कपिल मिश्र के आरोपों को यह कह कर खारिज किया जा रहा है कि वे वही बातें कह रहे हैं, जो भारतीय जनता पार्टी कहती रही है। चंदे के लेन-देन का आरोप पुराना है और इस मामले में पार्टी अपनी सफाई पहले ही पेश कर चुकी है। कपिल मिश्र मीडिया के सामने बोलते-बोलते तब बेहोश हो गए जब उनसे सवाल-जवाब शुरू होने वाले थे। ऐसे में शक जताया जा रहा है कि ऐसा उन्होंने सोची-समझी रणनीति के तहत जान बूझ कर किया होगा। शायद कपिल मिश्र के आरोपों का आम आदमी पार्टी पर वैसा गंभीर असर नहीं हो पा रहा, जैसा उन्होंने उम्मीद की होगी, इसलिए भी उनमें हताशा का भाव रहा होगा। फिर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जो बातें उन्हें जांच एजेंसियों के सामने या फिर निर्वाचन आयोग के पास जाकर कहनी चाहिए थीं, उन्हें बताने के लिए मीडिया का रास्ता क्यों चुना। जो हो, पर आम आदमी पार्टी और खासकर अरविंद केजरीवाल की विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में आती गई है।

अरविंद केजरीवाल से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने ऊपर लगे आरोपों का तार्किक और सप्रमाण खंडन करें, पार्टी को बिखराव से रोकने के लिए व्यावहारिक उपायों पर अमल करें, पर वे ऐसा कुछ करते नजर नहीं आ रहे। जिस शुचिता और पारदर्शिता के दावे के साथ आम आदमी पार्टी भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई थी, इन दो सालों में वह कहीं खोती गई है। यह सिर्फ पिछले दो विधानसभा और दिल्ली नगर निगम चुनावों में उम्मीद के उलट आए नतीजों की वजह से पार्टी में बिखराव के संकेतों तक सीमित नहीं है, केजरीवाल सरकार के कामकाज के तरीकों पर भी सवाल उठते रहे हैं। मगर अरविंद केजरीवाल फिलहाल यह साबित करने पर तुले हुए हैं कि वोटिंग मशीन में गड़बड़ी करके उनकी पार्टी को हराने का षड्यंत्र रचा गया। फिलहाल जरूरत इस बात की है कि वे अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई दें और पार्टी को बिखरने और दूसरे किसी विद्रोह की संभावना को रोकने का प्रयास करें।

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