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आतंक पर चोट

सेना ने पिछले दिनों 258 आतंकियों की एक सूची बनाई थी और आॅलआउट आॅपरेशन शुरू किया था। तेरह महीनों के भीतर अलग-अलग आतंकी संगठनों के पांच सरगनाओं समेत 119 आतंकियों को ढेर किया जा चुका है।
Author August 2, 2017 05:42 am
भारतीय सेना के जवान (Source: Express Photo by Shuaib Masoodi)

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के एक गांव में मंगलवार को तड़के तलाशी अभियान के दौरान भारतीय सेना के खोजी दस्ते ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर और पाक नागरिक अबु दुजाना समेत दो आतंकियों को मार गिराया। दुजाना के सिर पर दस लाख रुपए का इनाम था। हाकिरपोरा में सात घंटे तक चले अभियान में एक और लश्कर आतंकी आरिफ लेलहारी भी मारा गया। दुजाना इस इलाके में 2009 से सक्रिय था और एक दर्जन ‘अतिवांछित’ दहशतगर्दों में शामिल था। भारतीय सेना ने आंतकियों की जो सूची पिछले दिनों बनाई थी, उसके हिसाब से दुजाना को ‘ए डबल प्लस’ श्रेणी में रखा गया था। सीआरपीएफ और बीएसएफ जवानों की हत्या करने, बैंक लूटने समेत बीस से अधिक मामले इसके खिलाफ दर्ज थे। भारतीय सेना को फिलहाल यह तीसरी बड़ी सफलता मिली है। इससे पहले 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी और उसके बाद नियुक्त किए गए सब्जार भट्ट को सेना ने पिछले दिनों मार गिराया था। सेना ने पिछले दिनों 258 आतंकियों की एक सूची बनाई थी और आॅलआउट आॅपरेशन शुरू किया था। तेरह महीनों के भीतर अलग-अलग आतंकी संगठनों के पांच सरगनाओं समेत 119 आतंकियों को ढेर किया जा चुका है। दुजाना के बारे में कहा जाता था कि वह बुरहानी वानी और जुनैद मट्ट से भी ज्यादा खूंख्वार था। वह अलकायदा के आतंकी जाकिर मूसा से तालमेल करके हमले करता था।

लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ एनआइए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कई अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार गिरफ्त में लिया है। इनमें हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद समेत कई लोग शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों पर आरोप है कि वे पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से गुपचुप धन प्राप्त कर रहे थे और उसका इस्तेमाल राज्य में उपद्रव फैलाने में कर रहे थे। कश्मीरियों को लालच देकर उनसे सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी कराई जा रही थी। इधर सेना ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है और अब उसे स्थानीय पुलिस तथा उसकी खुफिया शाखा से बेहतर सहयोग मिल रहा है। पिछले दिनों आतंकवादियों ने अनंतनाग जिले में स्थानीय पुलिस के छह जवानों की हत्या कर दी थी। एक पुलिस अधिकारी अयूब पंडित को भी लोगों ने पीट-पीट कर मार डाला था। इस वाकये के बाद पुलिस कहीं अधिक सक्रियता से सेना का साथ दे रही है।

हालांकि तमाम सैनिक अभियानों की सफलता के बावजूद कई ऐसे बिंदु हैं जो पूरी तरह आश्वस्त नहीं करते। जिस मुठभेड़ में दुजाना को मार गिराया गया, उसमें सेना को कई बार दुश्वारियां भी झेलनी पड़ीं। तलाशी के दौरान दर्जनों नागरिकों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया, जिसके बदले में जवानों ने आंसू गैस छोड़े और पैलेट गन दागे और कई राउंड गोलियां चलार्इं। इसमें आधा दर्जन लोग घायल हो गए। एक नागरिक की मौत होने की भी अपुष्ट खबर है। घटना की जानकारी आसपास न फैलने पाए, इस कारण इंटरनेट वगैरह की सेवाएं भी ठप करनी पड़ीं। इसे गंभीरता से समझने की जरूरत है कि आखिर स्थानीय नागरिक क्यों कई बार आतंकियों के समर्थन में उतर आते हैं और पत्थरबाजी करने लगते हैं? बुरहानी वानी को मार गिराने के बाद तो काफी दिनों तक घाटी के कुछ हिस्से बेहद अशांत बने रहे थे। आतंकियों के सफाए के साथ ही यह भी जरूरी है कि स्थानीय नागरिक समाज को भरोसे में लिया जाए।

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  1. R
    raj kumar
    Aug 2, 2017 at 8:05 am
    कश्मीर की ऐसी स्थिति एक दिन में नहीं हो गई हमारे नेताओं की सेलेक्टिव पंथ निरपेछता और करीब करीब हिन्दुओ के सभी मान्यताओं और अपनी सांस्कृतिक परम्पराओ का मखौल उड़ाना और मुस्लिम कट्टरता के प्रति चुप्पी साध लेना इस सबका परिणाम यही आना था अगर ऐसा ही चलता रहा तो ये तो ट्रेलर हे अभी पूरे देश का क्या हल होगा सोचकर रूह कांप जाती है टीवी की बहस देखो सबमे वही सब कुछ इसमें मिडिया भी काम जिम्मेदार नहीं है अगर हम देश को दुसरो की नजर से देखते रहे तो यही होगा
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