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खतरे का परीक्षण

अमेरिका कई बार उसे कड़ी चेतावनी दे चुका है। लेकिन चीन के समर्थन के कारण वह अमेरिका से हर वक्त दो-दो हाथ करने की मुद्रा बनाए रखता है। हालांकि अब यह दुनिया किसी परमाणु हमले को सहन करने को तैयार नहीं है।
Author September 5, 2017 04:13 am
नॉर्थ कोरिया लीडर किम जोन (एजेंसी)

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अमेरिकी चेतावनियों को दरकिनार करते हुए उत्तर कोरिया के साम्यवादी तानाशाह किम जोंग ने आखिरकार रविवार को उच्च तकनीक और अत्यधिक क्षमता वाले हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर दिया। उसके इस छठे परीक्षण की जापान और दक्षिण कोरिया ने भी पुष्टि की है तथा अमेरिका ने विस्फोट को रिक्टर स्केल पर 6.3 स्तर का बताया है। इससे पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। भारत, अमेरिका, जापान, रूस तथा दक्षिण कोरिया समेत तमाम देशों ने इसकी खुल कर निंदा की है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट कर चेतावनी दी है कि जो भी देश उत्तर कोरिया से आर्थिक संबंध रखेगा, वह उससे अपने आर्थिक रिश्ते खत्म कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिलहाल किसी सैनिक कार्रवाई से इनकार किया है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा राजनीतिक और आर्थिक समर्थक चीन है। जापान ने कहा है कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह अस्वीकार्य है। उसने तुरंत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की है।

उत्तर कोरिया सरकार ने परीक्षण को पूरी तरह सफल बताया गया है। दावे के मुताबिक यह विस्फोट पिछले पांचों परीक्षणों की तुलना में छह गुना ज्यादा ताकतवर था और इसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल पर लादा जा सकता है। विस्फोट से चीन-रूस के भवन तथा दक्षिण कोरिया की धरती भी हिल गई। वास्तव में देखा जाए तो दूसरे विश्वयुद्ध के पहले और शांति-युद्ध काल में भी दुनिया के तमाम देशों में परमाणु शक्ति संपन्न होने की एक होड़ लगी हुई थी। कालांतर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य देशों ने महसूस किया गया कि बमों की यह होड़ दुनिया को सर्वनाश के रास्ते पर ले जा रही है। आखिरकार अपने परमाणु अस्त्रों में कटौती करने और परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाने पर आम सहमति बनी। लेकिन उत्तर कोरिया की सरकार तमाम मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को नहीं मानती।

अमेरिका कई बार उसे कड़ी चेतावनी दे चुका है। लेकिन चीन के समर्थन के कारण वह अमेरिका से हर वक्त दो-दो हाथ करने की मुद्रा बनाए रखता है। हालांकि अब यह दुनिया किसी परमाणु हमले को सहन करने को तैयार नहीं है। इसलिए किसी सनकी तानाशाह के हाथों में इतना विनाशकारी बम होना पूरी दुनिया के लिए खतरे का संकेत है। जापान में 1945 में हुए परमाणु हमले में दो लाख लोग एक ही झटके में खत्म हो गए थे। उस हमले के जख्म आज तक भरे नहीं हैं। जापान ने उचित ही सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की है। जितना जल्द हो सके, इस मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए और इस पर रोक लगनी चाहिए। जानकारों का कहना है कि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन मिल कर जल्द ही इस बारे में कोई निर्णय ले सकते हैं। अगर चीन अब भी उत्तर कोरिया का समर्थक बना रहता है तो बहुत संभव है कि अमेरिका से उसके कारोबारी रिश्तों पर गहरा असर पड़े। फिलहाल चीन, अमेरिका से बिगाड़ करने की स्थिति में नहीं है। यही वह पेच है, जहां से उत्तर कोरिया की नकेल कसी जा सकती है।

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