June 27, 2017

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राहत के सहारे

कुछ राज्यों और उद्योग जगत के बार-बार मांग करने पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने एक बार फिर से छियासठ वस्तुओं और सेवाओं पर करों में कटौती करने का निर्णय लिया है।

Author June 13, 2017 05:33 am
सरकार ने 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी लागू करने का फैसला लिया है। (Photo-financialexpres)

कुछ राज्यों और उद्योग जगत के बार-बार मांग करने पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने एक बार फिर से छियासठ वस्तुओं और सेवाओं पर करों में कटौती करने का निर्णय लिया है। इससे मधुमेह के रोगियों, छात्रों, गृहणियों, छोटे कारोबारियों, उत्पादकों और रेस्तरां मालिकों को राहत मिलेगी। दिल्ली में परिषद की रविवार को हुई बैठक के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दावा किया कि इससे आम लोगों के उपयोग की वस्तुओं पर कर का बोझ कम हो जाएगा। इससे पहले मई के दूसरे पखवाड़े में श्रीनगर में परिषद की बैठक में 1205 वस्तुओं के करों की दर और छूट की सूची को अंतिम रूप दिया गया था। तभी से कुछ राज्य और कारोबारी संगठन जारी की गई सूची में से कम से कम 133 वस्तुओं और सेवाओं के करों को काफी ज्यादा बता रहे थे, जिसे कम करने का दबाव निरंतर पड़ रहा था। परिषद ने इनमें से सिर्फ छियासठ वस्तुओं और सेवाओं के करों में कमी की है। जिनके करों में कमी की गई है उनमें इंसुलिन, काजू, किशमिश, अचार-मुरब्बा, नमक, केचप-सॉस, अगरबत्ती, काजल, प्लास्टिक तिरपाल, कंप्यूटर प्रिंटर, स्कूल बैग वगैरह शामिल हैं। बच्चों की कलरिंग बुक और नमक वगैरह पर कोई कर नहीं लगेगा। सौ रुपए से कम मूल्य के सिनेमा टिकट पर कर की दर अट्ठाईस फीसद से घटा कर अठारह फीसद कर दी गई है।

पचहत्तर लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले कारोबारी, निर्माता और रेस्तरां मालिकों को एकमुश्त समाधान योजना की जद में लाया गया है, जबकि पहले यह पचास लाख रुपए था। जानकारों का कहना है कि इस योजना से राज्य सरकारों को नुकसान होगा। हालांकि वित्तमंत्री ने यह कह कर इसका समर्थन किया है कि राज्य सरकारों का राजस्व घटेगा, लेकिन छोटे कारोबारियों को इससे लाभ पहुंचेगा। छोटे कारोबारी और रेस्तरां मालिक बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं, इसलिए इसका फायदा उन्हें मिलना चाहिए। दूरसंचार सेवाओं के लिए दरों में कोई कमी नहीं की गई है। कई महिला और सामाजिक संगठन तथा चिकित्सा संस्थान सैनेटरी नैपकिंस की कर-दर में छूट की मांग कर रहे थे, लेकिन परिषद इस पर नहीं पसीजी। हाइब्रिड कारों पर तैंतालीस फीसद कर पहले से तय है। परिषद की बैठक में इस पर विचार होना था, लेकिन नहीं हुआ। परिषद की अगली बैठक 18 जून को होने वाली है, जिसमें लाटरी और इ-वे बिल पर फैसला होना है।

विचारणीय पहलू यह है कि एक तरफ तो केंद्र सरकार लंबे समय से जीएसटी को आजादी के बाद का सबसे बड़ा कर-सुधार बता कर वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ उसका असमंजस और फूंक-फूंक कर कदम रखने की रणनीति उसके भीतरी भय को भी सामने ला रही है। सरकार की दुविधा का अंदाजा इससे भी लगता है कि पहले उसने कहा था कि जीएसटी को 2017 की पहली अप्रैल से लागू किया जाएगा। फिर तारीख बदल कर पहली जुलाई की गई। ऐसा लगता है कि सरकार अपने इस प्रयोग को लेकर खुद सहमी हुई है कि कहीं उसका बड़बोलापन और अति आत्मविश्वास का पांसा उलट न पड़ जाए। जीएसटी से विकास दर तेज होने का भरोसा दिलाया जा रहा है, जबकि नजीरें और कुछ कहानी कह रही हैं। जापान, कनाडा, सिंगापुर, आस्टेÑलिया, मलेशिया आदि के उदाहरण बताते हैं कि वहां जीएसटी लागू होने के बाद जीडीपी में गिरावट ही दर्ज हुई।

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First Published on June 13, 2017 5:33 am

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