June 25, 2017

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सरकार और आधार

तीन महीने से भी कम समय में, आधार कार्ड के मामले में सरकार को सर्वोच्च अदालत के फैसले से दूसरी बार झटका लगा है।

Author June 12, 2017 05:21 am
विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड।

तीन महीने से भी कम समय में, आधार कार्ड के मामले में सरकार को सर्वोच्च अदालत के फैसले से दूसरी बार झटका लगा है। बीते सप्ताह अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पैन कार्ड के आबंटन और आय कर रिटर्न दाखिल करने के लिए आधार नंबर अनिवार्य करने संबंधी आय कर कानून के प्रावधानों के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी। अलबत्ता अदालत ने यह भी कहा कि उसके फैसले से आय कर कानून में हुए संशोधन की संवैधानिक वैधता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आय कर कानून की धारा 139 एए वैध है, इस पर फिलहाल आंशिक रोक ही रहेगी। दरअसल, अदालत का फैसला इस तथ्य के मद््देनजर आया है कि निजता को मौलिक अधिकार मानने के कोण से आधार कार्ड को कुछ याचिकाओं के जरिए जो चुनौती दी गई है उस पर अभी संविधान पीठ का फैसला आना बाकी है। लेकिन वह फैसला कब आएगा? आधार को लेकर अदालत में चल रही कानूनी लड़ाई पर गौर करें तो ऐसा लगता है कि एक तरफ सरकार उतावली में है और दूसरी तरफ अदालत का रवैया तदर्थवादी है। कई साल से आधार को लेकर सुनवाई चल रही है, पर अब भी धुंधलका छंटा नहीं है। जबकि इस योजना पर भारत सरकार अपनी काफी ऊर्जा, संसाधन और समय लगा चुकी है, तो उचित यही होगा कि सर्वोच्च अदालत तेजी से सुनवाई करे, ताकि अनिश्चितता समाप्त हो।

मार्च में अपने एक अंतरिम फैसले में सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं बना सकती, पर साथ में यह भी कहा था कि गैर-लाभकारी कामों मसलन बैंक खाता खोलने या आय कर रिटर्न दाखिल करने के सिलसिले में वह आधार कार्ड मांग सकती है और उसे ऐसा करने से नहीं रोका जा सकता। लेकिन अब अदालत के फैसले के मुताबिक पैन कार्ड बनवाने और आय कर रिटर्न भरने के लिए आधार नंबर आवश्यक नहीं है। फिलहाल सिर्फ पैन नंबर देकर रिटर्न भर सकेंगे। यह सहूलियत तब तक रहेगी जब तक निजता को एक मौलिक अधिकार मानने और आधार से उस अधिकार का हनन होने का दावा करने वाली याचिका पर फैसला नहीं आ जाता। पर फैसला कब आएगा? आय कर कानून में हुए संशोधन के मुताबिक एक जुलाई से जो भी रिटर्न भरेंगे या पैन के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें अपना आधार नंबर देना होगा। सरकार ने आय कर कानून में संशोधन किया तो इसके पीछे उसके अपने तर्क थे।

पैन कार्ड बनवाने में बहुत सारी गड़बड़ियां उजागर हुई हैं; दस लाख पैन कार्ड रद््द हो चुके हैं। दूसरी तरफ याचिकाकर्ता की दलील थी कि जब आधार अधिनियम में आधार अनिवार्य नहीं है तो रिटर्न के लिए आय कर अधिनियम में कैसे अनिवार्य हो सकता है? बहरहाल, सीबीडीटी यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने फिर कहा है कि आगामी एक जुलाई से रिटर्न दाखिल करने अथवा स्थायी खाता संख्या (पैन नंबर) हासिल करने के लिए आधार नंबर का उल्लेख करना जरूरी होगा। सीबीडीटी के मुताबिक उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में केवल उन लोगों को आंशिक राहत दी है जिनके पास आधार नंबर नहीं है या जिन्होंने आधार में पंजीकरण नहीं कराया है। इस द्वंद्व का समाधान अदालत को करना है। तीन तलाक पर सुनवाई में उसने जैसी तेजी दिखाई वैसी आधार के मामले में क्यों नहीं हो सकती!

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First Published on June 12, 2017 5:21 am

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