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फजीहत की ओर

क्रिकेट के निजाम में सुधार के लिए गठित लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू न करने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) लगातार नई-नई फजीहत झेल रहा है।
Author November 23, 2016 03:52 am
बीसीसीआई प्रेसीडेंट अनुराग ठाकुर ।

भारत में क्रिकेट के निजाम में सुधार के लिए गठित लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू न करने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) लगातार नई-नई फजीहत झेल रहा है। इसके बावजूद, वह सिफारिशों को लागू करने से बचने के लिए तरह-तरह के बहाने तलाश रहा है। लोढ़ा समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल तीसरी स्टेटस रिपोर्ट को बीसीसीआइ के लिए तगड़ा झटका ही कहा जाएगा। इसमें अदालत से जिस तरह के निर्देश जारी करने की गुजारिश की गई है, वह अगर जारी हो गया तो बीसीसीआइ पदाधिकारियों के लिए शर्मिंदगी की ही बात होगी। लोढ़ा समिति ने दो टूक लहजे में बीसीसीआइ के पदाधिकारियों को बर्खास्त करने का सुझाव दिया है। समिति ने अपनी पहली रिपोर्ट चौदह सितंबर को दी थी, जिसमें बीसीसीआइ के पदाधिकारियों को हटा कर उनकी जगह प्रशासकों का पैनल बनाने का सुझाव दिया था, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर सिफारिशों को लागू करा सके। असल में, लोढ़ा समिति का गठन ही इसलिए हुआ था कि क्रिकेट संघों पर काबिज राजनीतिकों, पूंजीपतियों और नौकरशाहों की तिकड़ी के वरदहस्त को खत्म किया जा सके। लेकिन देखा यह गया कि बीसीसीआइ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर सहित दूसरे तमाम लोग जो पदाधिकारी हैं, अभी तक लोढ़ा समिति की सिफारिशों को दरकिनार करने के बहाने तलाशते रहे हैं या किसी तरह से इसमें हीलाहवाली करके पद पर बने रहने चाहते हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाले पीठ ने अनुराग ठाकुर से जवाब तलब भी किया था।

लोढ़ा समिति के अध्यक्ष रहे सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज आरएम लोढ़ा शुरू से यह कह रहे हैं कि बीसीसीआइ के पदाधिकारी सिफारिशों को लागू करने में अड़चनें डाल रहे हैं। इसलिए अपनी तीसरी स्टेटस रिपोर्ट में लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा है कि बीसीसीआइ के पदाधिकारियों को बर्खास्त करने के साथ पूर्व गृहसचिव जीके पिल्लै को बोर्ड का प्रशासन संभालने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाना चाहिए। पर्यवेक्षक फिलहाल ठेकों के आबंटन, पारदर्शिता के मापदंड, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आइपीएल मैचों के लिए मार्गदर्शन करेगा। लोढ़ा समिति ने बीसीसीआइ और राज्य संघों में सत्तर साल की आयु पार कर चुके पदाधिकारियों का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से खत्म करने की मांग की है। उन्हें सिर्फ भारतीय नागरिक होना चाहिए। यह भी कि इसमें किसी पदाधिकारी को क्रिकेट के अलावा अन्य खेल संगठन या महासंघ का पदाधिकारी नहीं होना चाहिए। नौ साल तक पदाधिकारी रह चुके व्यक्ति को भी हटाने की मांग है।

रिपोर्ट में बीसीसीआइ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा ही सारे काम किए जाने पर आपत्ति जताई गई है और सर्वोच्च न्यायालय से इस बारे में दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है। जाहिर है, बीसीसीआइ ने अभी तक लोढ़ा समिति की सिफारिशों के किसी भी हिस्से को लागू नहीं किया है। वैसे तो बीसीसीआइ तीस सितंबर, एक अक्तूबर और पांच अक्तूबर को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के संबंध में बैठक कर चुका है, लेकिन इसमें कोई सार्थक नतीजा नहीं निकल सका। बीसीसीआइ की एक रणनीति यह भी है कि अदालती प्रक्रिया को जहां तक हो सके, लंबा खींचा जाए। इससे, अंतिम फैसला आने तक, अगर वह उनके विरुद्ध भी हुआ तो भी, अपने पदों पर काबिज रहा जा सकता है। अगली सुनवाई पांच दिसंबर तय है। उम्मीद की जानी चाहिए जल्द ही कुछ फैसला हो जाएगा।

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