December 07, 2016

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संपादकीय: चेतावनी के मायने

सारे सबूत पाकिस्तान को सौंपे गए, लेकिन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर्रहमान लखवी को फिर भी जेल से रिहा कर दिया गया।

Author October 25, 2016 02:57 am
अमेरिका (बाएं) और पाकिस्तान का झंडा।

अमेरिका ने पाकिस्तान को चेताया है कि उसकी जमीन पर चल रहे आतंकी नेटवर्क को तबाह करने के लिए वह अकेले भी कार्रवाई कर सकता है। अमेरिका ने कहा है कि उसकी जानकारी में यह तथ्य है कि अपनी खुफिया एजेंसी आइएसआइ द्वारा संचालित ऐसे सभी नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई करने में पाकिस्तान हिचकिचा रहा है। हालांकि अमेरिका की यह चेतावनी काबुल से सटे पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर प्रांत में चल रहे आतंकी शिविरों, हक्कानी नेटवर्क आदि के बारे में ज्यादा है, बजाय पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे शिविरों के। बेहतर होता कि अमेरिका ने भारत को निशाना बनाने वाले आतंकी समूहों का भी थोड़ा-बहुत संदर्भ उठाया होता।

‘काउंटरिंग द फाइनेंसिंग आॅफ टेररिज्म’ के कार्यवाहक अवर सचिव एडम एसजुबिन ने वाशिंगटन में रविवार को कहा कि पाकिस्तानी सरकार के भीतर ही, खासतौर पर आइएसआइ में, कुछ ताकतें हैं जो वहां सक्रिय सारे आतंकी समूहों के खिलाफ कदम उठाने से बचती हैं। एडम ने कहा, लेकिन उनकी चेतावनी है कि पाकिस्तान अपने देश में आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करे। अमेरिका इसमें पाकिस्तान का साथ देगा। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका, पाकिस्तान की मदद के बिना, अकेले ही इन आतंकी ठिकानों को तबाह करने में झिझकेगा नहीं। अलबत्ता एडम ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान यों तो खुद भी आतंकी हमलों का शिकार रहा है। कई मामलों में आतंकवाद-रोधी अभियानों में सक्रिय और अमेरिका का अहम साझेदार भी। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान काफी समय से यह आरोप लगाता रहा है कि हक्कानी नेटवर्क और तहरीक-ए-तालिबान उसके यहां हमले करते रहे हैं। उसका यह भी आरोप है कि इन आतंकी समूहों को आइएसआइ का वरदहस्त प्राप्त है।

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इससे पहले, सितंबर में, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मार्क टोनर ने नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के संदर्भ में दोहराया था कि उनका देश पाकिस्तान पर कार्रवाई का दबाव बढ़ाने के पक्ष में है। इस हमले में छह अमेरिकियों समेत एक सौ छियासठ लोग मारे गए थे। मुंबई मामले में सबूतों की कमी नहीं है। अजमल कसाब नामक एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया था। इस हमले की तैयारी में शामिल रहे डेविड हेडली ने अपनी गवाही में यहां तक बताया था कि पूरी योजना पाकिस्तान में बनी और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर समेत कौन-कौन इसमें शामिल थे। इस कांड की जांच भारत के अलावा अमेरिका की संघीय एजेंसी ने भी की थी।

सारे सबूत पाकिस्तान को सौंपे गए, लेकिन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर्रहमान लखवी को फिर भी जेल से रिहा कर दिया गया। सवाल है कि क्या अमेरिका समूचे आतंकी नेटवर्क को लेकर चिंतित है, या उसकी चिंता अफ-पाक इलाकों तक सीमित है। पाकिस्तान कई बार अमेरिकी दबाव में इन इलाकों में आतंकवाद से लड़ता दिखा है। मगर भारत के संदर्भ में अमेरिकी दबाव कुछ खास असर नहीं डाल पाया है। क्या अमेरिका की सक्रिय दिलचस्पी उसी आतंकवाद के खात्मे में है, जहां उसके हित सीधे प्रभावित हो रहे हैं या उसके सैनिकों की जान जोखिम में है? पाक की धरती पर चल रहे आतंकी नेटवर्क को अमेरिका अकेले भी खत्म कर सकता है, यह चेतावनी स्वागत-योग्य है, पर अमेरिका को इस पर भी गंभीरता से गौर करना चाहिए कि यह नेटवर्क अफ-पाक के सरहदी इलाकों तक सीमित नहीं है, पाक अधिकृत कश्मीर और दूसरे इलाकों में भी मौजूद है।

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First Published on October 25, 2016 2:57 am

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