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बेकाबू आतंक

अमरनाथ यात्रा के जत्थे में शामिल नहीं थी और न ही उसे इस यात्रा के लिए पंजीकृत कराया गया था। अगर ऐसा था भी, तो पुलिस को बचने का कोई बहाना नहीं मिल जाता।
Author July 12, 2017 05:01 am
अमरनाथ यात्रियों पर सोमवार को हुए आतंकी हमले को लेकर देश भर में आक्रोश का माहौल है। ट्वीटर पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कई जानी-मानी हस्तियों ने इस हमले की निंदा की है। जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने अमरनाथ यात्रियों पर अनंतनाग जिले में सोमवार को हुए हमले के पीछे आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ बताया है। कश्मीर के पुलिस प्रमुख मुनीर खान ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि ऐसी कई पुख्ता जानकारियां हाथ लगी हैं, जिससे साफ है कि हमले के पीछे लश्कर का हाथ है। यहां आपको हमले के बाद जम्मू से लेकर देशभर में हुई गतिविधियों की तस्वीरें दिखा रहे हैं। (PTI)

पंद्रह साल बाद एक बार फिर अमरनाथ जाने वाले यात्रियों पर आतंकवाद का कहर टूटा है। आतंकियों ने हमला कर पांच महिलाओं समेत सात व्यक्तियों की हत्या कर दी और दो दर्जन लोगों को घायल कर दिया। श्रद्धालु गुजरात के थे और एक बस में सवार होकर जम्मू लौट रहे थे। इससे पहले आतंकियों ने सन 2000 में पहलगाम में तीस तीर्थयात्रियों की हत्या की थी। पुलिस ने ताजा हमले के पीछे पाकिस्तान से अपनी कारगुजारियां करने वाले लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबु इस्लाम का हाथ बताया है। अमेरिका और जर्मनी समेत दुनिया के कई देशों ने इस हमले की निंदा की है। घटना की गंभीरता को देखते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ स्थिति की समीक्षा के लिए आपात बैठक की। सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी खतरे के बारे में आगाह किया था। खुफिया रिपोर्टों के बाद ही सेना, पुलिस और अद्धसैनिक बलों के अस्सी हजार जवानों को तैनात किया गया था।

विडंबना यह है कि हमलावर इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को भेदने में कामयाब हो गए। हालांकि प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जिस यात्री बस पर हमला हुआ, वह अमरनाथ यात्रा के जत्थे में शामिल नहीं थी और न ही उसे इस यात्रा के लिए पंजीकृत कराया गया था। अगर ऐसा था भी, तो पुलिस को बचने का कोई बहाना नहीं मिल जाता। अलबत्ता यह जवाबदेही जरूर तय होनी चाहिए कि आखिर छप्पन यात्रियों से भरी बस किसकी इजाजत से वहां तक पहुंची। जैसा कि बस के मालिक ने कहा किउसने आरटीओ से परमिट ली थी। मगर दिक्कत यह है कि बस जिस व्यक्ति के नाम से पंजीकृत है वह कोई और है, तथा जो संचालन कर रहा है वह कोई और है। पहली नजर में तो यह परिवहन विभाग में पसरे भ्रष्टाचार का भी एक नमूना है। राजमार्ग पर पुलिस की ओर से शाम सात बजे तक ही यात्री-बसों को सुरक्षा दी जाती है। उसके बाद यात्री-बसों को ले जाने की अनुमति नहीं है। यानी बस संचालक ने तीर्थयात्रा के नियमों की अनदेखी की, और रात आठ बजे के बाद वह बस ले जा रहा था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा है कि आतंकियों के निशाने पर पुलिस और सेना के जवान थे, यह यात्री-बस तो दुर्भाग्यवश चपेट में आ गई। हुआ यों कि मोटरसाइकिल पर सवार तीन आतंकियों ने आठ बज कर दस मिनट पर पहले सुरक्षा बलों के बंकर पर हमला किया। जवाबी कार्रवाई हुई, जिसमें कोई घायल नहीं हुआ। इसके बाद आतंकियों ने पुलिस की एक दूसरी टुकड़ी पर गोली चलाई। पुलिस की ओर से फायरिंग हुई तो आतंकी भागने लगे। इसी दौरान बस वहां से गुजरी तो आतंकियों ने बस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बार-बार यही उभर रहा है कि राज्य और केंद्र की तरफ से कई बार यह दावा किया गया कि सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता हैं। ऐसे में एक यात्री-बस बिना किसी रोकटोक के, और वह भी नियम-विरुद्ध, वहां तक पहुंच गई तो इससे यह भी साबित होता है कि पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में समन्वय की कमी है; एक विभाग का दूसरे विभाग से अपेक्षित तालमेल नहीं है। अगर यह बस अवैध रूप से दाखिल हुई, तो इसकी जांच कहीं भी क्यों नहीं की गई?

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First Published on July 12, 2017 5:00 am

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