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त्रासदी का सफर

अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले को लेकर उपजा जनाक्रोश अभी शांत नहीं हुआ था कि इस धार्मिक यात्रा पर एक और कहर टूट पड़ा।
Author July 18, 2017 04:21 am
जम्मू कश्मीर: जो बस खाई में गिरी उसमें अमरनाथ यात्री थे।

अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले को लेकर उपजा जनाक्रोश अभी शांत नहीं हुआ था कि इस धार्मिक यात्रा पर एक और कहर टूट पड़ा। रविवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुई बस बनिहाल के नाचिलाना इलाके में खाई में जा गिरी। इस हादसे ने सोलह यात्रियों की जान ले ली। दस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि छह की मौत अस्पताल ले जाते वक्त हो गई। तीस घायल हैं और तीन के बारे में फिलहाल कुछ पता नहीं है। अमूमन ऐसे वाकयों को दुर्भाग्य या नियति का खेल मान कर इस तरह पेश किया जाता है मानो इनके लिए कोई जवाबदेह नहीं है, मानो इनके पीछे कुछ अबूझ कारण हैं जिनसे पार नहीं पाया जा सकता। लेकिन चाहे अमरनाथ यात्रा हो, या चार धाम यात्रा, हादसे का सिलसिला बंद होना चाहिए। हमारे देश में धार्मिक यात्राओं का एक प्रकार का महिमामंडन तो खूब होता है, पर यात्रियों की सुरक्षा और साफ-सफाई से लेकर यातायात के सुचारु संचालन तक, तमाम महत्त्वपूर्ण पहलू उपेक्षित ही रहते हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब अमरनाथ यात्रियों को लेकर जा रही बस सड़क हादसे की भेंट चढ़ गई हो। 2012 में पंद्रह यात्री इसी मार्गपर दुर्घटना में अपनी जान गंवा बैठे थे। लेकिन इतने बड़े हादसे के बाद भी यह सड़क उतनी ही जोखिम भरी बनी रही, उसकी देखरेखमें कोई खास फर्क नहीं पड़ा। पांच साल बाद हालत क्या है? अमरनाथ यात्रा को अभी तीन सप्ताह भी नहीं हुए कि चार सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें उन्नीस लोगों की मौत हुई और पचहत्तर लोग घायल हुए। आखिर इस भयावह सिलसिले की वजह क्या है। यह सही है कि दुर्गम इलाकों में या दुर्गम रास्तों पर वाहन के पलट जाने या खड््ड में जा गिरने का अंदेशा अधिक रहता है। लेकिन अमरनाथ यात्रा में ऐसा होने की बड़ी वजह यात्रा-मार्ग को लेकर बरती जा रही लापरवाही भी है। सड़क की हालत 2014 की बाढ़ के बाद से बद से बदतर होती गई है। कई जगह सड़क धंसने लगी है। थोड़ा-बहुत धंसकते रहना तो आए दिन की बात है। फिर, रही-सही कसर यातायात नियंत्रण को लेकर पुलिसकर्मियों का चलताऊ रवैया पूरी कर देता है, जिसके चलते इस संकरे मार्ग पर अक्सर कई जगह जाम लगा रहता है। संकरा रास्ता, ऊपर से गड््ढे, और सड़क जाम, इस सब के चलते रामसू से बनिहाल के बीच वाहन चलाना किसी दु:स्वप्न से गुजरने जैसा हो जाता है।

इस मार्ग पर खतरों को न्यूनतम करने के लिए जो ठोस प्रयास किए जाने चाहिए थे, नहीं किए गए। नतीजा सामने है। फिर, कई बार यातायात नियंत्रण में रही खामी भी हादसे का सबब बन जाती है। जैसे, कुछ दिन पहले अमरनाथ यात्रियों से भरी मिनी बस और ट्रक की टक्कर में बस के चालक और एक यात्री की मौत हो गई थी। इस हादसे में करीब बीस लोग घायल हुए थे। जुलाई के पहले हफ्ते में एक बस में गैस सिलेंडर फट जाने से एक यात्री की जान चली गई और पंद्रह लोग जख्मी हो गए। इसी तरह की घटनाएं चार धाम यात्रा के दौरान भी होती आई हैं। उनके पीछे भी इसी तरह के कारण रहते हैं। लेकिन उन्हें दूर करने की कारगर कोशिश नहीं होती। रस्मी ढंग से जांच का आदेश दे दिया जाता है, जैसा कि इस बार अमरनाथ यात्रा में हुए हादसे के मामले में भी हुआ है। फिर सब कुछ पहले की तरह चलता रहता है।

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First Published on July 18, 2017 4:21 am

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