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आतंक के खिलाफ

इमाम, मौलवियों और मुसलिम विद्वानों ने एक साथ सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि इस्लाम की पहचान समझे जाने वाले इस तरह के दूसरे नैतिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए हम गुनहगारों के लिए पारंपरिक जनाजे की नमाज नहीं पढ़ेंगे।
Author June 8, 2017 05:17 am
इस्लामिक स्टेट के आतंकी। (फाइल फोटो)

दुनिया भर में आतंक का चेहरा बन चुका आइएस यानी इस्लामिक स्टेट आज न सिर्फ समूची मानवता के सामने एक बड़ी चुनौती है, बल्कि खुद उस धार्मिक समुदाय के लिए भी एक बड़ी समस्या बन चुका है, जिसके नाम पर वह लड़ने का दावा करता है। हालत यह है कि चंद लोगों के इस गिरोह की करतूतों की वजह से कुछ लोगों को समूचे समुदाय पर अंगुली उठाने का मौका मिलता है। जबकि सच यह है कि आइएस के बरक्स इस्लाम में विश्वास रखने वाले वे तमाम लोग खड़े हैं, जो इंसानियत को अपना मजहबी और सामाजिक मूल्य मानते हैं। यह बेवजह नहीं है कि हाल ही में लंदन में हमला करने वाले तीन आतंकियों के मारे जाने के बाद उनके जनाजे की नमाज पढ़ने से ब्रिटेन के एक सौ तीस से ज्यादा इमामों ने साफ इनकार कर दिया। समूचे देश के इमाम, मौलवियों और मुसलिम विद्वानों ने एक साथ सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि इस्लाम की पहचान समझे जाने वाले इस तरह के दूसरे नैतिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए हम गुनहगारों के लिए पारंपरिक जनाजे की नमाज नहीं पढ़ेंगे। उन्होंने तमाम साथी इमामों और धार्मिक प्राधिकारों से भी ऐसा नहीं करने की अपील की।

एक ओर जहां कट्टरता के पैरोकार बने आइएस या तालिबान ने इस्लाम को हिंसा का चेहरा बनाने की कोशिश की है, वहीं मुसलिम विद्वानों का यह बयान दुनिया के लिए संदेश देने के साथ-साथ आतंक में यकीन रखने वालों को भी आईना दिखाता है कि आतंकी हमलों का बचाव नहीं किया जा सकता और ये इस्लाम की सर्वोच्च शिक्षाओं के उलट हैं। मुश्किल यह है कि धर्म को अपने मन-मुताबिक चलाने की मंशा से खुद को सर्वेसर्वा घोषित किए धर्माधिकारियों के बहकावे में कुछ लोग आ जाते हैं और उनकी बेलगाम गतिविधियों को ही संबंधित समुदाय के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में देखा जाने लगता है। जबकि सच यह है कि किसी भी धर्म या फिर समुदाय के ज्यादातर लोग इंसानी संवेदनाओं के साथ जीने वाले साधारण लोग होते हैं और अपनी मजहबी आस्थाओं के साथ सहज तरीके से जीते हैं। जहां तक आइएस या तालिबान के हिंसा के दर्शन का सवाल है, लंदन के इमाम, मौलवियों और मुसलिम विद्वानों के हमलावरों के जनाजे की नमाज पढ़ने से मना करने के फैसले के अलावा भी ऐसे तमाम उदाहरण रहे हैं, जिनमें इस्लाम में विश्वास रखने वाले लोगों ने आतंक के खिलाफ आवाज उठाई है।

सितंबर, 2015 में ही मुसलिम धर्मगुरुओं की ओर से आइएस के खिलाफ एक फतवा जारी किया गया था, जिस पर दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम सहित भारत के एक हजार सत्तर मुफ्तियों और इमामों ने दस्तखत किए थे। इसी तरह, केरल स्थित एक मुसलिम संगठन नदवातुल मुजाहिदीन ने आइएस और अलकायदा के खिलाफ एक सघन अभियान शुरू किया हुआ है। बुधवार को मुसलमानों की सामाजिक और धार्मिक तंजीमों के संगठन आॅल इंडिया मुसलिम मजलिस-ए-मुशावरात की ओर से हिज्बुल आतंकवादी जाकिर मूसा को करारा जवाब देते हुए कहा गया कि भारतीय मुसलमानों को यहां के संविधान में विश्वास है और उन्हें आतंकियों या उन लोगों के भाषण सुनने की कोई जरूरत नहीं है, जो अपने सियासी मकसद से लिए हिंसा का रास्ता अपनाते हैं। कोई समुदाय जब अपने भीतर विकसित हो गई मान्यताओं की विकृतियों से खुद लड़ता है तो उसका हल ज्यादा ठोस शक्ल में सामने आता है। आइएस या तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ खुद मुसलिम समुदाय के भीतर से उठने वाली आवाज की अहमियत बहुत ज्यादा है।

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  1. Mahalaxmi Vrat 16 days for 16 years
    Jun 8, 2017 at 8:13 am
    धन सबकी किस्मत में है। सबके लिये विष्णु-लक्ष्मी जी, संपत्ति से भरी तिजोरी भेजते हैं। बस उस तिजोरी की चाबी उनके पास होती है। धनी बनने के लिए इसी तिजोरी की चाबी को खोजना है। चाबी कैसे मिलेगी यह बड़ा सवाल है। तो इसके लिए करने होंगे लक्ष्मी जी के उपाय। वैसे भी महालक्ष्मी व्रत August/September से शुरू होंगे। लक्ष्मी जी आपके घर में, उत्तर दिशा से आयेंगी। तो धन संपत्ति पाने के लिये, लक्ष्मी जी को उत्तर दिशा से पुकारें। 16 दिन लक्ष्मी की आराधना से जन्म-जन्म की कंगाली दूर होगी। Amit Shah My email is pulkit5225@rediffmail or mahalaxmivrat@rediffmail If you want to do MAHALAXMI VRAT then email me. Mahalaxmi vrat 16 days every year fast for 16 years fast will be observed and you will get everything which you really deserved then no need to depend on any other Vrat or Upvas, just contact me for full Mahalaxmi Vrat details in brief. Mahalaxmi Vrat will generally starts in August or Sepember. My e-mail is pulkit5225@rediffmail
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