December 06, 2016

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संपादकीय: पड़ोस में

इससे पहले ढाका से झीनाइदह नामक जिले में पैंतालीस साल के एक हिंदू पुजारी की मंदिर में ही धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी।

Author November 8, 2016 05:18 am
बांग्लादेश में आतंकवादियों के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी में नौ संदिग्ध इस्लामी आतंकवादी मारे गए। (File Photo: Reuters)

बांग्लादेश में लंबे समय से अल्पसंख्यक हिंदुओं, मानवाधिकारवादियों, ब्लॉगरों और समलैंगिकों के अधिकारों की लड़ाने वालों के खिलाफ कट्टरपंथी ताकतों ने हमला बोल रखा है। 2013 से लेकर अब तक कई ब्लॉगरों की हत्या की चुकी है, कइयों की जान तो बच गई, पर वे बुरी तरह घायल हुए। अल्पसंख्यक समूह तो लगातार इन अतिवादियों के निशाने पर रहते हैं। पिछले हफ्ते मामूली-सी बात का बहाना बना कर कुछ कट्टरपंथियों ने दर्जनों हिंदू घरों और मंदिरों पर हमले किए और लूटपाट की। इस सिलसिले में पुलिस ने पूर्वी बांग्लादेश के एक जिले से पचास से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। यों तो इस क्षेत्र में महीने भर से दोनों समुदायों के बीच तनाव बना हुआ था। लेकिन पिछले शुक्रवार को कुछ कट्टरपंथी युवकों ने एक हिंदू युवक पर आरोप लगाया कि उसने फेसबुक पर एक ऐसी पोस्ट साझा की, जिसमें एक पवित्र मसजिद की तौहीन की गई थी। कुछ लोगों ने इस पर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग की। पुलिस प्रशासन ने बहुसंख्यकों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के आरोप में युवक को गिरफ्तार भी कर लिया। हालांकि युवक ऐसी किसी भी पोस्ट को साझा करने से इनकार करता रहा।

इस गिरफ्तारी के बावजूद न तनाव कम हुआ और न दंगे रुके। इससे पहले ढाका से झीनाइदह नामक जिले में पैंतालीस साल के एक हिंदू पुजारी की मंदिर में ही धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। इससे चिंताजनक स्थिति और क्या हो सकती है कि बांग्लादेश में इस तरह की घटनाएं तब हो रही हैं जब वहां अवामी लीग जैसी पार्टी की सरकार है जो सेक्युलर होने का दम भरती है। प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और जानमाल की रक्षा का आश्वासन देती रही हैं। पर हकीकत में हालात और क्यों बिगड़ते जा रहे हैं? यों तो बांग्लादेश मुसलिम बहुल देश है, जिसकी कुल आबादी करीब सोलह करोड़ है। बांग्लादेश के निर्माण के वक्त हिंदुओं की संख्या करीब नौ प्रतिशत थी, जो लगातार कम होती जा रही है। इसकी एक प्रमुख वजह वहां कट्टरपंथी राजनीतिकों और अतिवादी संगठनों का अल्पसंख्यकों के प्रति घृणा भरा प्रचार अभियान भी है, जो समय-समय पर हिंसा के रूप में भी फूटता रहता है।

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ब्लॉगरों पर पहला हमला आसिफ मोहिउद््दीन पर हुआ, जिन्हें जनवरी 2013 में जख्मी किया गया। इसके बाद फरवरी 2013 में अलकायदा से कथित रूप से संबद्ध अंसुराुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) ने फरवरी 2013 में धर्मनिरपेक्ष बलॉगर राजीव हैदर की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। तब से करीब एक दर्जन ब्लॉगरों की हत्या हो चुकी है। असल में 1971 में पाकिस्तान से आजाद होने के बाद बांग्लादेश यों तो धर्मनिरपेक्ष देश घोषित हुआ, लेकिन 1988 में सैनिक शासन आते ही इस्लाम को राष्ट्रीय धर्म का दर्जा दे दिया गया। माना जाता है कि यही फैसला कट्टरपंथियों और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के बीच झगड़े की वजह बना। इस्लाम को राष्ट्रीय धर्म का दर्जा मिलने के बाद अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार बढ़ा। अब तो स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। बांग्लादेश सरकार को चाहिए कि जितना जल्द हो सके, ऐसी घटनाओं को रोके। ऐसी घटनाओं से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर आंच सकती है। मगर कट््टरपंथी हिंसा पर काबू पाना खुद बांग्लादेश के बेहतर भविष्य के लिए भी जरूरी है।

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First Published on November 8, 2016 5:14 am

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