December 10, 2016

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नापाक हरकत

पिछले एक महीने में यह दूसरी बार है जब पाकिस्तानी हमलावरों ने नियंत्रण रेखा पर मारे गए एक भारतीय सैनिक का शव क्षत-विक्षत कर दिया।

Author November 24, 2016 04:30 am
कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान। (File Photo)

पिछले एक महीने में यह दूसरी बार है जब पाकिस्तानी हमलावरों ने नियंत्रण रेखा पर मारे गए एक भारतीय सैनिक का शव क्षत-विक्षत कर दिया। कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में भारतीय सेना के आतंकवाद निरोधक दस्ते पर पाकिस्तान की तरफ से आए कथित आतंकवादियों ने घात लगा कर हमला किया। हमले से पहले पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलीबारी की। उसी का फायदा उठा कर आतंकियों ने घुसपैठ की थी। सैनिक के शव को क्षत-विक्षत करने को लेकर स्वाभाविक ही लोगों में आक्रोश है। दिवाली से एक दिन पहले भी इसी तरह एक सैनिक के शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया था। इससे कुछ साल पहले एक सैनिक का गला काट दिया गया था। ऐसी हरकतें पेशेवर हत्यारे करते हैं, न कि किसी देश की सेना अपने दुश्मन देश के सैनिक के साथ ऐसा सलूक करती है। इस हरकत से एक बार फिर पाकिस्तान की हताशा, कायरता और बौखलाहट उजागर हुई है।

उड़ी के भारतीय सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत की तरफ से चलाए गए विशेष सैन्य अभियान यानी सर्जिकल स्ट्राइक और विश्व बिरादरी में उसे अलग-थलग करने के प्रयासों के बाद से पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ गई है। वह लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करता आ रहा है। नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी करके अपने यहां प्रशिक्षण पाए आतंकवादियों को सीमा पार कराने की कोशिश करता है। इस तरह घाटी में अशांति का माहौल बनाए रख कर वह अपनी खीज निकालता है। फिर जब उसके खिलाफ आवाज उठती है तो वह उल्टा भारत पर आरोप लगा कर अपने को पाक-साफ साबित करने की कोशिश करता है। यह तो शुरू से जाहिर है कि पाकिस्तान की आतंकवाद पर नकेल कसने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अब उसे इस मर्यादा का भी खयाल नहीं रहा कि एक सैनिक के शव के साथ कैसा सलूक करना चाहिए। कायदे से युद्ध या संघर्ष में मारे गए सैनिक के शव को अंतिम संस्कार के लिए संबंधित देश को सौंप दिया जाता है, मगर पाकिस्तान की सेना या फिर उसके पोसे हुए तथाकथित जिहादियों को अब जैसे किसी नियम-कायदे की परवाह भी नहीं रह गई है।

यह छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तान आतंकवाद को भारत के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। वहां की सेना के लिए सीधे लड़ाई के बजाय यह रास्ता ज्यादा मुफीद जान पड़ता है कि प्रशिक्षित आतंकियों की भारत में घुसपैठ करा कर अशांति का माहौल बनाए और भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे। जब से आतंकवाद को लेकर विश्व बिरादरी के सामने पाकिस्तान की असलियत खुलने लगी है और वह अलग-थलग पड़ने लगा है, भारत के खिलाफ उसकी खीज खुल कर प्रकट होने लगी है। जबकि आतंकवाद सिर्फ भारत के नहीं, खुद पाकिस्तान के लिए भी बड़ी समस्या बन चुका है। आतंकवादी संगठन वहां के अतिसुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों पर भी हमला कर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते रहते हैं। मगर वहां की सेना, खुफिया एजेंसी आइएसआइ और कट््टरपंथी ताकतों को लगता है कि आतंकवाद के जरिए ही वे भारत को परेशान कर सकते हैं। अब ये ताकतें इस कदर प्रभावी हैं कि वहां की सरकार पर उनका दबदबा रहता है। इस तरह पाकिस्तान में आतंकवाद एक जटिल तंत्र बन चुका है। वहां की सरकार इस तंत्र को खत्म करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। वरना नियंत्रण रेखा पर नापाक हरकतों को रोकने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद से आतंकवाद के खात्मे का प्रयास जरूर करती।

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First Published on November 24, 2016 4:30 am

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