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घपले की उड़ान

कुछ सालों से जो घोटाले या संदिग्ध सौदे चर्चा में रहे हैं उनमें अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर की खरीद का मामला भी शामिल है।
Author December 12, 2016 00:57 am
विवादास्पद अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर। (फाइल फोटो)

कुछ सालों से जो घोटाले या संदिग्ध सौदे चर्चा में रहे हैं उनमें अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर की खरीद का मामला भी शामिल है। एक बार फिर यह मामला सुर्खियों का विषय बना, जब सीबीआइ ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी, उनके चेचेरे भाई संजीव उर्फ जूली त्यागी और उनके सहयोगी रहे गौतम खेतान को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। यह पहला मौका है जब सेना के किसी अंग के पूर्व प्रमुख की गिरफ्तारी हुई है। लिहाजा, यह गिरफ्तारी बताती है कि रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी से हमारे राज्यतंत्र का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं रह पाया है। अगस्ता-वेस्टलैंड घोटाला बारह वीवीआइपी हेलिकॉप्टरों की खरीद से जुड़ा है। इसमें रिश्वत लिये जाने की बात उजागर होने पर यूपीए सरकार ने 2013 में इस सौदे को रद््द कर दिया था। पर सौदे को लेकर उठा विवाद कांग्रेस का पीछा अब भी नहीं छोड़ रहा है। यों सौदे की बातचीत 2003 में यानी वाजपेयी सरकार के दौरान ही शुरू हो गई थी, पर इसकी अधिकांश प्रक्रिया चली और पूरी हुई यूपीए सरकार के समय। एसपी त्यागी 2004 से 2007 तक वायुसेना के प्रमुख रहे। आरोप है कि उन्होंने वीवीआइपी हेलिकॉप्टरों की खरीद की खातिर ऊंचाई की सीमा घटा दी थी, ऐसा इसलिए कि अगस्ता-वेस्टलैंड निविदा-प्रक्रिया में शामिल हो सके। कसौटी हल्की करने का फैसला उन्होंने क्यों किया, इसका कोई संतोषजनक जवाब त्यागी के पास शायद अब भी नहीं है, पर उन्होंने कहा है कि यह फैसला उनका अकेले का नहीं बल्कि सामूहिक था।

सीबीआइ के मुताबिक अगस्ता-वेस्टलैंड सौदे में कुल भुगतान 3767 करोड़ रुपए का रहा और इसके लिए बारह फीसद रकम बतौर रिश्वत चुकाई गई। ऊंचाई की सीमा घटाने के अलावा कई और बातों ने भी एसपी त्यागी को संदेह के घेरे में ला दिया था। मसलन, वे अगस्ता-वेस्टलैंड की मूल कंपनी फिनमेकेनिका के अधिकारियों से मिले थे। उनके चचेरे भाई संजीव त्यागी ने बिचौलियों को साधा और रिश्वतखोरी को अंजाम तक पहुंचाने में गौतम खेतान की अहम भूमिका रही। सीबीआइ के मुताबिक खेतान ने कुछ महीने पहले पूछताछ में माना था कि उन्होंने अपनी कंपनी आइडीएस इंफोटेक की ट्यूनीशिया स्थित सहयोगी कंपनी के जरिए दलाली की रकम ली थी। शुरू में त्यागी इस बात से इनकार करते रहे कि उन्होंने फिनमेकेनिका के अधिकारियों से मुलाकात की थी। पर जब जांच कर रहे सीबीआइ के अधिकारियों ने विजिटर्स डायरी समेत कई और सबूत उनके सामने रखे तो उन्हें मुलाकात का तथ्य कबूल करना पड़ा। मिलान (इटली) की एक अदालत ने भी अपने फैसले में माना था कि सौदे में भ्रष्टाचार हुआ और इसमें त्यागी शामिल थे।

बहरहाल, एसपी त्यागी की गिरफ्तारी के बाद अगस्ता-वेस्टलैंड को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान चढ़ सकता है। संसद के पिछले बजट सत्र में इस मामले को लेकर काफी हंगामा हुआ था। तब रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा था कि एसपी त्यागी और गौतम खेतान तो छोटे नाम हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धोए हैं, सरकार यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि यह नदी बह कर कहां जा रही है। भाजपा एक बार फिर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने की भरपूर कोशिश करेगी। कांग्रेस अपने बचाव में यह कहती आई है कि रिश्वतखोरी की भनक लगने पर यूपीए सरकार ने ही सौदा रद््द किया था और उसी ने जांच शुरू कराई थी। अगस्ता-वेस्टलैंड मामले को लेकर एक बार फिर वैसी ही रस्साकशी दिख सकती है।

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