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संपादकीयः खुदकुशी की कड़ियां

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने किन हालात में खुदकुशी की, अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
Author August 11, 2016 02:36 am

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने किन हालात में खुदकुशी की, अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। मगर उनके जान देने का रास्ता चुनने की वजह अवसाद बताया जा रहा है। अगर वास्तव में यही मुख्य कारण था, तो यह सोचने की बात है कि समाज और राजनीति में संघर्ष के कई चरण पार कर एक ऊंचाई पर पहुंचा व्यक्ति भी आखिर किन हालात में इस कदर टूट जाता है कि उसे आत्महत्या अंतिम रास्ता नजर आता है। उनकी खुदकुशी भी देश में रोजाना होने वाली ऐसी तमाम घटनाओं की एक कड़ी है। पर उनका मौत को गले लगाना इसलिए भी ज्यादा चर्चा का विषय है कि अब वे अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर जाने जा रहे थे। गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस में बगावत के बाद भाजपा के समर्थन से उन्हें वहां का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला था। राजनीति में अचानक अर्श से फर्श पर आ जाना कोई नई बात नहीं है। पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सरकार को हटाने का आदेश दिया और उन्हें पद छोड़ना पड़ा।

संभव है कि इसी उथल-पुथल का असर उनकी मनोदशा पर पड़ा हो और वे अवसाद में चले गए हों। यों अवसाद की स्थिति में पहुंचने के पहले व्यक्ति किसी मसले पर नाकामी के बाद सामान्य निराशा की हालत में जाता है। यही वह बिंदु होता है जब उसके आसपास के लोगों को उसकी मानसिक दशा की पहचान करनी पड़ती है। मगर हमारे समाज में जिस तरह सामान्य व्यवहारों में उतार-चढ़ाव को हल्के ढंग से लेने की आदत रही है, उसमें शायद ही कोई अपनी ओर से अपने आसपास के एक परेशान व्यक्ति को कुरेद कर उसकी समस्या पर बात करता है। जबकि शुरुआती निराशा के दौर में अगर मनोदशा को प्रभावित करने वाले कारकों और उनसे पैदा उथल-पुथल का विश्लेषण कर लिया जाए तो शायद हालत को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। लेकिन कई बार गंभीर परेशानी से जूझते लोगों के व्यवहार में असामान्य उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज किया जाता है और निराशा को अवसाद में तब्दील होने का मौका मिलता है, जो सीधे-सीधे मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है।

आधुनिक जीवन की समस्याओं और जटिलताओं से उपजी मन:स्थितियों के चलते खुदकुशी की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। करीब नौ महीने पहले विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर चिकित्सकों ने कहा था कि खुदकुशी के नब्बे फीसद से ज्यादा मामले अलग-अलग प्रकार के अवसाद का नतीजा होते हैं। हमारे समाज में घर से लेकर कामकाज तक की तमाम जगहों पर संबंधों से लेकर इच्छा, महत्त्वाकांक्षा, अपेक्षा की मन:स्थितियों में जिस तरह के टकराव और जद्दोजहद मौजूद होते हैं, उसमें इस स्थिति का शिकार कोई भी हो सकता है। महानगरों में किसी किशोर से लेकर चमक-दमक की दुनिया में जीने वाली फिल्मी हस्तियों के भी खुदकुशी करने की खबरें आती रहती हैं। हालांकि ऐसे तमाम लोग हैं, जो भयानक प्रतिकूल हालात के बावजूद समस्याओं का सामना करते हैं और जान देने जैसा कदम नहीं उठाते। फिर भी यह सच है कि आत्महत्या एक गंभीर समस्या के रूप में हमारे सामने है। जरूरत है कि समाज में निजी और सामान्य संबंधों के मामले में किसी समस्या को देखने के तौर-तरीकों और नजरिए में बदलाव लाया जाए। अगर यह समाज के सामान्य व्यवहार और सोच में उतरे तो शायद कई परेशान लोगों को खुदकुशी से बचाया जा सकेगा।

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