ताज़ा खबर
 

मौत की बस

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में जिस तरह की हृदय विदारक सड़क दुर्घटना में दो दर्जन से ज्यादा स्कूली बच्चों की मौत हुई और ढाई दर्जन गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, वह घोर चिंता का विषय है।
Author January 20, 2017 02:44 am
हादसे में कुछ बच्चों के घायल होने की भी संभावना जताई जा रही है। (Photo Source: ANI)

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में जिस तरह की हृदय विदारक सड़क दुर्घटना में दो दर्जन से ज्यादा स्कूली बच्चों की मौत हुई और ढाई दर्जन गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, वह घोर चिंता का विषय है। खबर है कि जिला प्रशासन के स्कूल-बंदी के आदेश के बावजूद जेएस विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल खुला था। गांवों में रहने वाले छात्रों को लेकर स्कूल-बस अलीगंज जा रही थी कि कोहरे की वजह से रास्ते में बालू-लदे ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस के सामने के परखचे उड़ गए और वह खड््ड में जा गिरी। इतनी बड़ी दुर्घटना सिर्फ दो वाहन चालकों की लापरवाही का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गुनाहों की लंबी फेहरिस्त है, जिसकी शिनाख्त जरूरी है। सामान्य तौर पर तो इसे सड़क दुर्घटना के खाते में डाल दिया जाएगा, कुछ मुआवजे घोषित होंगे, खानापूरी के लिए जांच कमेटियां बनेंगी। लेकिन यह इसका अंत नहीं है और न ही भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने का कोई कारगर उपाय है।

गहराई में जाकर देखें तो कस्बों और छोटे शहरों में बड़े महानगरों की देखादेखी पब्लिक स्कूलों की बाढ़ आ गई है। ये स्कूल ज्यादातर किसी स्थानीय नेता, नवधनाढ्य या ठेकेदार आदि के होते हैं, जिनका शिक्षा से कोई सरोकार नहीं होता, जिनका मसकद सिर्फ मुनाफाखोरी होता है। वे स्कूल तो खोल लेते हैं, लेकिन मानक कभी पूरे नहीं किए जाते। न निर्धारित खेल मैदान होते हैं, न पुस्तकालय, न प्रयोगशाला। यहां तक कि शिक्षक भी दिहाड़ी मजदूरों जैसे ही रखे जाते हैं। छात्रों को लाने-ले जाने के लिए जिस तरह की बसें और चालक रखने चाहिए, उसका भी कोई मानक पूरा नहीं किया जाता। अधिकारियों को रिश्वत खिलाकर मान्यता ले ली जाती है। जब सब कुछ रामभरोसे ही चल रहा होता है तो उसका नतीजा इसी रूप में सामने आता है। जिस स्कूली बस से दुर्घटना हुई है, उसका पंजीकरण तक नहीं था। ग्रामीण क्षेत्रों में डग्गामार बसों को अक्सर स्कूलों में लगा दिया जाता है। चालकों-परिचालकों की काबिलियत व अनुभव का कोई परीक्षण नहीं किया जाता। अगर सचमुच कस्बों-देहातों में चल रहे पब्लिक स्कूलों की जांच कराई जाए तो दो-चार प्रतिशत भी निर्धारित मानकों का पालन करते हुए नहीं मिलेंगे।

स्कूली वाहनों की दुर्घटनाएं पहले भी हुई हैं। लेकिन यह हाल के बरसों का कहीं ज्यादा भीषण हादसा है। जिन परिवारों के अपने नौनिहाल खो गए हैं, उन पर क्या बीत रही होगी! क्या उनके दुख को किसी मौखिक सांत्वना या मुआवजा राशि से हल्का किया जा सकता है? जिला प्रशासन ने उस स्कूल की मान्यता रद््द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके प्रबंधकों ने स्कूल बंद रखने के प्रशासनिक आदेश को नहीं माना। लेकिन जिला प्रशासन को इसकी खबर पहले क्यों नहीं हुई? अक्सर देखा जाता है कि जिला प्रशासन के आदेश को निजी यानी पब्लिक स्कूल नहीं मानते। राज्यों के शिक्षाधिकारियों की भी वे नहीं सुनते। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पब्लिक स्कूल न वाहनों की गुणवत्ता का ध्यान रखते हैं और न सेवा-शर्तें पूरी करते हैं। जब तक नियमावली का कड़ाई से पालन नहीं किया जाएगा, तब तक किसी निरापद स्थिति की कल्पना एक भूल ही होगी।

सपा 300 और कांग्रेस बाकी सीटों पर लड़ेगी चुनाव; नहीं होगा RLD के साथ गठबंधन

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग