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बाखबरः लगभग जयहिंद

राहुल अक्सर ऐसी छेड़छाड़ से खबरों में छा जाते हैं। वे जितने कोसे जाते हैं उतनी ही बाइट पाते हैं। वे निरंकुशता को ‘एब्सर्डिटी’ से टक्कर देते हैं। कई बार निरंकुशता पर यह ‘एब्सर्डिटी’ भारी पड़ती है। दो हजार उन्नीस तक इसी तरह लगे रहो मुन्ना भाई!
Author September 17, 2017 03:05 am
यों तो दोनों में कोई सीधा संबंध नहीं दिखता, लेकिन कुछ एंकरों ने छात्रसंघ में दो सीटों की हार को दो हजार उन्नीस से जोड़ दिया कि क्या चक्रवर्तित्व का जादू टूट रहा है।

हर खबर दो हजार उन्नीस की ओर दौड़ने लगती है। एंकर आए दिन पूछते रहते हैं: क्या होगा उन्नीस में?
राहुल बर्कले में बोलें तो एंकर उन्नीस का हिसाब लगाने लगते हैं। मोदी, शिंजो आबे बुलेट ट्रेन का शिलान्यास करें, तो यार लोग उन्नीस का गणित देखने लगते हैं। सौ रुपए का सिक्का एमजीआर के नाम पर होने की खबर आती है, तो एंकर पूछने लगते हैं: क्या यह दक्षिण विजय की तैयारी है? दो हजार उन्नीस की तैयारी है?

भाजपा का एक विधायक रोहिंग्याओं को देख कर कह उठा कि इनको नहीं रखना। क्या यह भी उन्नीस की तैयारी है?
पांच लाख रुपए के कर्ज में डूबे एक किसान को एक सरकार ने तीन रुपए का कर्ज माफ कर दिया!
कैसे औढरदानी हैं सर जी कि तीन तो कम किए। अब उसे पूरे पांच लाख नहीं चुकाने! यह दया भी उन्नीस के नाम हुई!
एक सरकार ने खुले में शौच करने वालों की बिजली ही काट दी। अब तो बनाओगे बच्चू शौचालय?

राहुल भैया बर्कले में अपना सच बोल दिए कि आज भारत में घृणा हिंसा एक विचार को थोपने का उपक्रम है। सवाल करने वाले को हिंसा का निशाना बनना पड़ता है। असहनशीलता का वातावरण रहेगा तो कौन निवेश करेगा? संग में यह भी टीप दिया कि भारत वंशवाद से ही चलता है। अखिलेश, स्टालिन, अंबानी, अभिषेक लाइन से वंशवादी! इस स्पष्टवादिता पर बर्कले वालों ने ताली मार दी। लेकिन भाजपा की ओर से धुलाई शुरू हो गई। भाजपा के दो मंत्रियों ने आकर ‘जनतंत्र’ में ‘वंशवादी’ राहुल बाबा की धुलाई की तो जवाब में आनंद शर्मा ने प्रति-धुलाई की!

राहुल अक्सर ऐसी छेड़छाड़ से खबरों में छा जाते हैं। वे जितने कोसे जाते हैं उतनी ही बाइट पाते हैं। वे निरंकुशता को ‘एब्सर्डिटी’ से टक्कर देते हैं। कई बार निरंकुशता पर यह ‘एब्सर्डिटी’ भारी पड़ती है। दो हजार उन्नीस तक इसी तरह लगे रहो मुन्ना भाई! कहीं यह भी दो हजार उन्नीस इस एब्सर्डिटी के नाम न खिसक जाए, इसलिए चिंतक चिंता करने लगे। एक उदारतावादी अंग्रेजी चैनल ने ज्यों ही बहस का मुंह खोला, त्यों ही एक संघ विचारक जी ने इसे राहुल की ‘रिवर्स डेमोक्रेसी’ कहा। इस झटकेदार सूत्रीकरण को सुन कर एंकर तक दंग रह गई कि क्या मतलब? फिर बात ऐसी सहनशीलता पर आ टिकी तो विचारक जी ने फरमाया कि अगर कोई आरएसएस को अटैक करने वाले पर अटैक करेगा, तो मैं अपनी जान दे दूंगा! धुर दक्षिण और धुर वाम दोनों को बोलने का हक है!

जनतंत्र के अर्दब में फंसा विचार कुछ देर के लिए ही सही, उदार हो उठता है। स्वागत है सर जी!
गौरी लंकेश की कहानी अब उतार पर लगती है। एक अंग्रेजी चैनल खबर बे्रक कर चुका है कि एक हिस्ट्री शीटर गिरि पुलिस की नजर में है, बाकी छह अन्य आरोपियों पर नजर है!

लंकेश की हत्या को लेकर उठी बहसें अक्सर पूर्व निश्चित निष्कर्ष की गली में फंस कर हांफने लगतीं कि हो न हो इसमें दक्षिणपंथी हिंदुओं का हाथ है। सबसे बड़ी खबर ‘आयम गौरी’ वाली बड़ी रैली ने बनाई। सिविल सोसाइटी की यह एक असरदार कार्रवाई नजर आई! कई बहसों में कई लिबरल प्रवक्ताआें की पीएम से शिकायत रही कि वे उन ट्विटर हैंडिलों को क्यों फॉलो करते हैं, जिन्होंने लंकेश की हत्या पर खुशियां मनार्इं। हेट मेल भेजे। इससे ऐसे तत्त्वों का हौंसला बढ़ता है। कई भक्त प्रवक्ता यही कहते रहे कि वे तो राहुल केजरी को भी फॉलो करते हैं।

रायन इंटरनेशनल में पढ़ने वाले बालक प्रद्युम्न की नृशंस हत्या की खबर ऐसी लोमहर्षक थी कि लगभग सभी चैनल उसी के पीछे लगे रहे। गुरुग्राम में माता-पिता निकल पड़े। चार दिन तक खबर छाई रही। प्रद्युम्न के माता-पिता न्याय की मांग करते रहे। चैनलों ने इस केस में जनता का पक्ष लिया! अच्छा किया!
टीवी भी ऐसा बेमुरौव्वत माध्यम है कि वह किसी का किसी पर उधार नहीं रहने देता। इधर मोदी ने विवेकानंद के शिकागो भाषण की सवा सौवीं जयंती के उपलक्ष्य में युवाओं को संबोधित किया। उनको अच्छी तरह प्रबोधा और स्वच्छ भारत अभियान पर बल दिया, लेकिन अगले ही रोज दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने छात्रसंघ के चुनाव में अध्यक्ष का पद एबीवीपी के हाथ से निकाल कर एनएसयूआई को सौंप दिया!

यों तो दोनों में कोई सीधा संबंध नहीं दिखता, लेकिन कुछ एंकरों ने छात्रसंघ में दो सीटों की हार को दो हजार उन्नीस से जोड़ दिया कि क्या चक्रवर्तित्व का जादू टूट रहा है। युवा कहीं मोदी-विमुख तो नहीं हो रहे? ‘बिग फाइट’ में इस बार ‘चार सौ अठानबे ए’ पर सार्थक चर्चा होती दिखी। एक्टिविस्ट अमित लखानी ने पूछा कि बेटा अत्याचार करे तो कानून है, लेकिन बहू अत्याचार करे तो कोई कानून नहीं है। ऐसे कानून क्यों बनाए जाते हैं जो एकतरफा झुके होते हैं!
मध्यप्रदेश के देशभक्त मंत्री ने बोला कि क्लास के बच्चे ‘प्रेजेंट सर’ कहने की जगह ‘जय हिंद’ बोला करेंगे। यह भी उन्नीस के लिए दिखा। अभी से देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी जाएगी तभी वह उन्नीस में फल देगी!

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