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संपादकीयः सांसद की बदसलूकी

अधिक समय नहीं हुआ जब केंद्र सरकार ने गाड़ियों पर से लाल बत्ती हटाने का आदेश जारी कर वीआइपी कल्चर से निजात दिलाने की एक जोरदार शुरुआत की थी।
Author June 17, 2017 03:53 am
आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी तेलगुदेशम पार्टी यानी टीडीपी के सांसद जेसी दिवाकर रेड्डी

अधिक समय नहीं हुआ जब केंद्र सरकार ने गाड़ियों पर से लाल बत्ती हटाने का आदेश जारी कर वीआइपी कल्चर से निजात दिलाने की एक जोरदार शुरुआत की थी। पर लगता है वह पहल बस प्रतीकात्मक होकर रह गई है। हमेशा अति विशिष्ट होने के अहसास में जीते आए लोग अपने को आम नागरिक की तरह ही समझें और हर वक्त बस सेवा-भाव से ओत-प्रोत हों, यह उम्मीद शायद कुछ अधिक हो। पर शालीनता और लोक-लाज की अपेक्षा तो हर हाल में की ही जानी चाहिए। यह बेहद अफसोसनाक है कि कई बार इस न्यूनतम अपेक्षा की भी चिंदी-चिंदी हो जाती है। हमारे कई माननीय राजनीतिकों को यह तक गवारा नहीं है कि वे नियम-कायदों का लिहाज करें और सलीके से पेश आएं। इसके उदाहरण जब-तब सामने आते रहते हैं। कुछ महीने पहले शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड ने एअर इंडिया के एक कर्मचारी के साथ बदसलूकी की थी। उस घटना की याद धुंधली भी नहीं पड़ी थी कि वैसा ही एक और वाकया सामने आ गया।

तेलुगू देशम के सांसद जेसी दिवाकर रेड्डी को गुरुवार की सुबह विशाखापट््टनम से इंडिगो एअरलाइंस के एक विमान से हैदराबाद जाना था। लेकिन हवाई अड््डे पर वे देरी से पहुंचे। तब तक बोर्डिंग पास जारी करने का वक्त बीच चुका था। इसलिए एअरलाइंस के ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने उन्हें पास देने से मना कर दिया। इस पर रेड््डी आगबबूला हो उठे और उन्होंने आसमान सिर पर उठा लिया। उन्होंने कर्मचारी को भला-बुरा कहा, हंगामा किया और वहां रखा एक प्रिंटर उठा कर फेंक दिया। यह हालत तब थी जब रेड््डी को भरोसा दिलाया गया कि इंडिगो की अगली उड़ान से उनके हैदराबाद जाने की व्यवस्था कर दी जाएगी। इस पर भी रेड्डी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। मजे की बात है कि हवाई अड््डे पर अपनी बदसलूकी की वजह से रेड््डी पहली बार चर्चा में नहीं आए हैं। पिछले साल अक्तूबर में विजयवाड़ा हवाई अड्डे पर भी, देर से पहुंचने के बाद, उन्होंने इसी तरह हंगामा किया था। अगर अपनी तरफ से गलती होने पर यह व्यवहार है, तो दूसरे की गलती पर सांसद महोदय से पसीजने और उदार होने की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है! जो लोग वोट मांगने के समय हाथ जोड़े बड़े विनीत नजर आते हैं, चुन लिये जाने के बाद कैसे गरूर से भर जाते हैं!

एक कथित जन-सेवक हमेशा अपने रुतबे के अहसास से आक्रांत रहता है और रुआब दिखाने के लिए लोक-लाज की भी परवाह नहीं करता। सत्ता के गलियारे में विचरते रहने से वे खुद को नियम-कायदों से ऊपर समझने लगते हैं। इसलिए चाहे गायकवाड का मामला हो या रेड्डी का, सिर्फ वैयक्तिक व्यवहार या क्षणिक आवेश का मामला नहीं है। आरोपी राजनीतिक को बचाने के लिए होने वाली कवायद भी यही बताती है। गायकवाड की बदसलूकी के बाद एअर इंडिया ने अपने विमानों से उनके सफर करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। पर शायद शिवसेना के दबाव के चलते जल्दी ही वह प्रतिबंध हटा लिया गया। रेड््डी पर भी इंडिगो एअरलाइंस ने अपने विमानों से सफर करने पर पाबंदी लगाने की घोषणा की है। उससे एकजुटता दिखाते हुए दूसरी प्रमुख एअरलाइनों ने भी रेड््डी पर वैसे ही प्रतिबंध का एलान किया है। पर यह कितना टिकाऊ होगा? नागरिक उड््डयन मंत्री अशोक गजपति राजू भी तेलुगू देशम से ही ताल्लुक रखते हैं। यों उन्होंने मामले की जांच कराने का आदेश दे दिया है, पर सवाल है कि जांच से निकलेगा क्या! क्या हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में ऐसा वाकया नहीं होगा, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और संसद की गरिमा पर आंच आए!

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