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खतरे की सरहद

संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं पर विदेश मंत्रालय ने उचित ही पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया। हालांकि इस तरह की घटनाएं दस दिन पहले से जारी थीं, मगर शनिवार को इनमें जबर्दस्त तेजी आ गई और यह क्रम दूसरे दिन भी जारी रहा। पाकिस्तान की तरफ से नियंत्रण रेखा और पुंछ क्षेत्र में होती रही गोलाबारी के चलते दो दिन में एक सरपंच सहित छह लोगों की मौत हो गई। इसके चलते पुंछ क्षेत्र में दहशत है और कई गांव खाली हो गए हैं।
Author August 18, 2015 08:41 am
संघर्षविराम तोड़ने पर भारत का कड़ा विरोध (फोटो: भाषा)

संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं पर विदेश मंत्रालय ने उचित ही पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया। हालांकि इस तरह की घटनाएं दस दिन पहले से जारी थीं, मगर शनिवार को इनमें जबर्दस्त तेजी आ गई और यह क्रम दूसरे दिन भी जारी रहा। पाकिस्तान की तरफ से नियंत्रण रेखा और पुंछ क्षेत्र में होती रही गोलाबारी के चलते दो दिन में एक सरपंच सहित छह लोगों की मौत हो गई। इसके चलते पुंछ क्षेत्र में दहशत है और कई गांव खाली हो गए हैं।

अपने घरबार छोड़ कर भागे लोगों को सुरक्षित ठौर और राहत पहुंचाना सरकार का दायित्व है। बासित ने भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए उलटे आरोप लगाया कि जुलाई और अगस्त में संघर्ष विराम उल्लंघन की अधिकतर घटनाएं उनके देश की तरफ से नहीं, भारत की तरफ से हुई हैं। अगर ऐसा होता तो पाकिस्तान के फौजी या नागरिक हताहत हुए होते।

साफ है कि बासित आक्रामकता में बचाव का रास्ता खोज रहे हैं। संघर्ष विराम उल्लंघन का सबसे ज्यादा कहर पंद्रह अगस्त को बरपा। इस दिन का चुनाव जान-बूझ कर ही किया गया होगा। दूसरे, ये घटनाएं दोनों तरफ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की प्रस्तावित बैठक से हफ्ते भर पहले हुर्इं। तो क्या इसके पीछे इस संभावित बैठक को पलीता लगाने की मंशा काम कर रही है? दूसरी वजह घुसपैठ से जुड़ी हो सकती है। पाक रेंजर्स चाहते होंगे कि भारत के सीमाक्षेत्र के ग्रामीण दहशत से दुबक जाएं, ताकि घुसपैठ कराना आसान हो।

संघर्ष विराम की दुर्दशा से पहले आतंकवादी गुटों के हमले की भी कई घटनाएं हुर्इं। लश्कर-ए-तैयबा का एक सदस्य मोहम्मद नवेद याकूब पकड़ा भी गया और उसके पाकिस्तानी नागरिक होने की पुष्टि हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भारत की ओर से संभवत: ऐसे प्रमाण पेश किए जाएंगे, जो सीमापार से आतंकवाद को बढ़ावा मिलने की शिकायत को सही ठहराते हों। नवेद याकूब का ताजा उदाहरण सामने होगा।

मगर जब भी ऐसे तथ्य रखे जाते हैं, पाकिस्तान की दलील होती है कि ये तत्त्व उसकी नुमाइंदगी नहीं करते; राज्य-व्यवस्था से बाहर के किसी घटक के लिए वह कैसे जवाबदेह माना जा सकता है? लेकिन संघर्ष विराम के उल्लंघन में तो सीधे पाकिस्तानी सेना का हाथ है। फिर, पाकिस्तान जवाबदेही से कैसे बच सकता है? अब्दुल बासित ने कहा है कि संघर्ष विराम उल्लंघन रोकने के लिए एक प्रभावी प्रणाली की जरूरत है।

दोनों तरफ के सैन्य कार्रवाई महानिदेशकों और अन्य आला अफसरों के स्तर पर समय-समय पर बैठकें आयोजित करने जैसी तजवीजें इसीलिए की गर्इं। गलतफहमी, तनाव और टकराव से बचने के लिए कुछ और भी उपाय किए जा सकते हैं। पर इस सबका अपेक्षित परिणाम तभी निकलेगा जब उन पर संजीदगी से अमल हो। रविवार को एक फिदायीन हमलावर ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गृहमंत्री शुजा खानजादा की हत्या कर दी।

हत्या की जिम्मेवारी प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-झांगवी ने ली है। पाकिस्तान को समझना होगा कि घुसपैठ और आतंकवाद को एक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल करने की उसकी अघोषित नीति ने खुद उसे कहां पहुंचा दिया है।

 

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