December 03, 2016

ताज़ा खबर

 

दुनिया मेरे आगेः सेवा की संवेदनाएं

नितिन अपनी परीक्षा के लिए ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ विषय पर निबंध तैयार कर रहा था और उसी संदर्भ में वह मुझसे सामाजिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों में गिरावट पर भी कुछ जान-समझ रहा था।

Author October 22, 2016 03:04 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

कविता भाटिया

नितिन अपनी परीक्षा के लिए ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ विषय पर निबंध तैयार कर रहा था और उसी संदर्भ में वह मुझसे सामाजिक, नैतिक और मानवीय मूल्यों में गिरावट पर भी कुछ जान-समझ रहा था। उसके साथ बातचीत में चिंता के कई पक्ष सामने आ रहे थे। इस बीच नजदीक बैठी उसकी दादी ने स्नेहवश उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- ‘इस दुनिया में अच्छाई आज भी कहीं न कहीं जिंदा है बेटा! तभी यह दुनिया टिकी है।’ यह मैंने सुना और फिर पिछले दिनों के अनुभवों ने मुझे घेर लिया। मेरे नजदीकी एक बुजुर्ग के पेट की सर्जरी के कारण कुछ समय उनके साथ मुझे अस्पताल में रुकना पड़ता था। वहीं मैंने पाया कि चारों तरफ दिखते मनुष्यता के घोर अभाव के बीच संवेदनाएं किस कदर अभी भी जिंदा हैं। अस्पताल के उस सघन चिकित्सा कक्ष में सभी बिस्तर मरीजों से भरे हुए थे। किसी के हृदय का तो किसी की किडनी या लीवर का आॅपरेशन हुआ था या फिर किसी अन्य गंभीर दिक्कत से वे वहां भर्ती थे। कुछ मरीजों के मुंह पर आॅक्सीजन लगी थी तो बहुतों को ड्रिप के सहारे कोई न कोई दवा दी जा रही थी। तो कोई विभिन्न नलियों, मशीनों के वृत्त में कैद… सभी बेबस, बेचैन और परेशान। उनमें से अधिकतर की उम्र साठ साल से ऊपर थी।

कुछ खुद उठने-बैठने में भी लाचार। मगर किसी मरीज की एक आह, मद्धिम चीख या पुकार पर फौरन नर्स हाजिर। किसी को अचानक कंपकंपी होने लगी तो कंबल लेकर झट उपस्थित। किसी को लघुशंका के लिए जाना हो तो तुरंत उसके लिए वार्ड ब्वॉय को भेज कर व्यवस्था करवाना। घड़ी की सुइयों के साथ सभी मरीजों की दवा लेकर हाजिर। मरीजों की मित्र, हितैषी सभी कुछ। थोड़ी-थोड़़ी देर में मरीजों के रक्तचाप, शुगर और ड्रिप की दवा चेक करना तो किसी जांच के लिए शरीर से खून निकालना और सबको विश्वास से भरी मुस्कान और ममत्व भाव से हौसला देना मुझे भीतर तक भिगो रहा था। उनके चलते पांव जैसे न थमने के लिए बने हों।

एक नर्स से बात करने पर पता चला कि एक नर्स पर पांच बेड की जिम्मेदारी है और मरीजों की संख्या बढ़ जाने पर जब अतिरिक्त बेड लगाने पड़ जाएं तो इस संख्या में इजाफा हो जाता है। प्रतीक्षा कक्ष में मैंने किसी से नर्सों के इस सेवाभाव की चर्चा की तो उन्होंने सधा-सा जवाब दिया कि यह तो उनका पेशा है, नौकरी है। मेरे दिमाग में यह सवाल उभरा कि आज हममें से कितने लोग स्वार्थ और आलस्य को त्याग कर अपने व्यवसाय या कर्म को निष्ठापूर्वक निभा रहे हैं? यों दो मरीज पर एक नर्स का अनुपात होना चाहिए। ज्यादा गंभीर मरीज होने पर एक मरीज पर एक नर्स की जरूरत होती है। लेकिन भारत में इस अनुपात के हिसाब से पचास फीसद नर्सों की कमी है। यह सच है कि मरीज का इलाज डॉक्टर करता है। मगर उस मरीज को बाहरी और भीतरी रूप से एक नर्स ही सशक्त बनाती है। निराशा और तनाव से जूझते मरीजों का हौसला बढ़ाती स्नेह और मदद का जज्बा लिए नर्सों को अपनी ड्यूटी के घंटों के अतिरिक्त बहुत बार ओवरटाइम भी करना पड़ता है। उनके लिए गलती या लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं। उन्हें अपने सारे दायित्व बड़ी सावधानी से निभाने पड़ते हैं। यह सब देखते-सुनते मैं आधुनिक नर्सिंग की शुरुआत करने वाली महिला नाइटिंगेल और फिर मदर टेरेसा के बारे में सोच रही थी।

सेवा, समर्पण, त्याग, करुणा की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा दीन-दुखियों के कष्टों पर मरहम लगाने के लिए छोटी उम्र में ही घर-बार, सांसारिक सुखों को त्याग कर उस मार्ग पर चल पड़ी थीं जो कांटों से भरा था। उन्होंने अपने जीवन में जो भी किया, उसके लिए उन्हें संत का दर्जा भले दिया गया हो, लेकिन वे शायद सबसे महान मानवीय मूल्य निभा रही थीं। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें संत घोषित करने के लिए उनके योगदान को चमत्कार बताने वाले पता नहीं किस आधार पर ऐसा कहते हैं।

आजकल कई लोग गरीबों, अपाहिजों, अनाथ बच्चों और वृद्धों के लिए समाजसेवा का दावा करते हैं। लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य आत्मप्रचार होता है। वे अपने नाम से सेवा संस्थान बना कर दानी लोगों से चंदा लेकर तथाकथित रूप से समाजसेवा करते हैं और अपनी इस छवि का प्रचार करते हैं। दरअसल, वे इस तरह अपनी समाजसेवा को विज्ञापन के रूप में इस्तेमाल करते है। जिस समाज में दधीचि और राजा शिवि के उदाहरण हों, परोपकार एक सद्गुण के रूप में जाना जाता हो, वहां आज समाजसेवा एक व्यापार की तरह हो गई है। जिंदगी की भागदौड़ में हर शख्स दूसरे को धकिया कर आगे निकल जाना चाहता है। वह दूसरों के दुख से नहीं, उनके सुखों को देख दुखी होता है। ऐसे में सेवा, निष्ठा और समर्पण भाव से लबरेज नर्सों को देख कर सिर झुक जाता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 22, 2016 3:03 am

सबरंग