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दुनिया मेरे आगे

किसान की जान

विजय विद्रोही दिल्ली के जंतर मंतर पर आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान गजेंद्र सिंह राजपूत नाम के एक किसान ने पेड़ पर...

आस्था की दीवार

प्रेमपाल शर्मा तिरुपति शहर को ‘भगवान तिरुमाला तिरुपति बालाजी’ के नाम से ज्यादा जाना जाता है। कुछ समय पहले सरकारी ड्यूटी की मजबूरी में...

शहर की हवा

लक्ष्मीकांता चावला दिल्ली को सुंदर बनाने की चर्चा और इस दिशा में कुछ काम हर सरकार करती रही है, पर इस सुंदरता के साथ...

जिंदा रहेंगी किताबें

रामधारी सिंह दिवाकर मुख्य रूप से हिंदी पट्टी में, जहां किताबों के लिए घर में कोई कोना-अंतरा नहीं बचा है, जहां पुस्तक-संस्कृति का लगभग...

अलबेला खिलाड़ी

के. विक्रम राव कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम की ऐतिहासिकता रिशी बेनो के चले जाने से गहरा जाती है। लखनऊ के हम श्रमजीवी पत्रकारों के...

विकृत पूजा

विष्णु नागर जिस दिन भारत के अधिकतर क्रिकेटप्रेमी भारत-आस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट का विश्वकप मैच देख रहे थे, उस दिन एक खबर के अनुसार...

अभाव के सामने

केसी बब्बर पिछले दिनों एक मित्र के साथ रेलगाड़ी से दिल्ली जाने का सुयोग बना। हालांकि हमारे शहर हांसी से दिल्ली के लिए सार्वजनिक...

भाड़े की खुशी

पम्मी सिंह विवाह समारोह के शोर-शराबे और हंसी-ठिठोली के बीच एक आवाज मुझे चौंका गई। एक पुरुष स्त्री जैसी आवाज में विवाह की रस्मों...

निज भाषा

हेमंत कुमार फ्रांस की निवासी और जर्मनी की शोधार्थी कैमिली बुआ इन दिनों बिहार के दौरे पर हैं। वे बिहार में पलायन के इतिहास...

जीत की हार

रागिनी नायक सुदर्शन की कहानी में तो ‘हार की जीत’ हो जाती है! दीन दुखिया अपाहिज का वेश धर कर डाकू खड्ग सिंह बाबा...

दिखावे की शिक्षा

महेंद्र राजा जैन आजकल अंगरेजी का आकर्षण इस कदर बढ़ गया है कि हर मां-बाप और अच्छे खाते-पीते या संपन्न घरों के लोगों से...

लैपटॉप की लॉलीपॉप

श्रीप्रकाश दीक्षित लोकसभा चुनाव में जब अस्सी सीटों वाले उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को चार-पांच सीटें ही मिलीं तो नेताजी खिसियाए और...

चकमक की रोशनी

विष्णु नागर मेरे घर में शुरू से ‘चकमक’ पत्रिका आती रही है। मैंने अपने दोनों बच्चों को इसे पढ़ाया है और खुद भी पढ़ता...

अपना बेगाना

नीरा जलक्षत्रि कुछ समय पहले बरसों पुरानी मित्र का फोन आया। उसने बताया कि वह भारत लौट रही है। उसके पति को यहां एक...

झील और झुरमुट

प्रयाग शुक्ल कभी-कभी कोई झुरमुट, पौधों का पुंज, कोई कोना अपनी ओर इस तरह खींचता है कि उसमें किसी अरण्य जैसी स्मृति शामिल हो...

नाजुक रेशे रिश्तों के

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी हमारे आसपास, आंखों के सामने और नाक के ठीक नीचे इतना सब घटित होता रहता है और हम उसके प्रति अनजान बने...

प्रकंपित विश्वास

गिरिराज किशोर चौबीस मार्च को प्राइम टाइम में एनडीटीवी पर हाशिमपुरा के नरसंहार पर चर्चा थी। उसमें हिस्सा लेने वालों में उत्तर प्रदेश सरकार...

सेवानिवृत्ति के करीब

प्रेमपाल शर्मा बड़ी विचित्र स्थिति है। सरकारी नौकरी से रिटायर मैं हो रहा हूं, हलचल आसपास हो रही है। कल एक फोन आया, कुछ...

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