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दुनिया मेरे आगे

बहुत काम है

अगर कार्यालयों के परिप्रेक्ष्य में इस वाक्य पर गौर किया जाए कि ‘बहुत काम है’, तो इसके साथ ही फाइलों का अंबार सामने आ...

गुड़ियों का संसार

किसी देश के बारे में जानकारियां जुटाने के कई तरीके हो सकते हैं। वहां के लोग, उनकी किताबें, बाजार, सिनेमा, संगीत। दिल्ली के ‘डॉल...

येलेना का स्टूडियो

यह नोवी साद है। सर्बिया का दूसरा बड़ा शहर। शहर के मुख्य चौक पर स्थित गैलरी पोदरम में मेरे कागज, कैनवस और कपड़े के...

कमलेश का न रहना

के. विक्रम राव कैसा इत्तिफाक है कि इन्हीं दिनों, चार दशक पहले कमलेश और मुझमें आत्मीयता प्रगाढ़ हुई थी। परिचय जॉर्ज फर्नांडीज की पत्रिका...

गांव का ठौर

सुधा मिश्र अपनी किशोरावस्था में एक कहावत अक्सर सुनती थी कि बच्चों को पढ़ाएं तो पढ़ाएं, नहीं तो शहर दिखाएं। अब इतने सालों के...

छूटना

राजकिशोर मानव जीवन में जितनी घटनाएं होती हैं, उनमें छूटना सबसे ज्यादा पीड़ादायक है। धार्मिक लोग बताते हैं कि एक दिन सभी कुछ छूटना...

कॉमरेड

अजेय कुमार मुझे मालूम था कि उन्हें कैंसर है। लेकिन मेरी इस जानकारी के बारे में उन्हें पता नहीं था। शायद इसीलिए अपने जीवन...

स्वच्छता और पवित्रता

विष्णु नागर मोदीजी के स्वच्छता अभियान के नतीजे पूरी तरह हमारे सामने आ चुके हैं। स्थिति वही की वही है। यों इस अभियान की...

पहचान खोते शहर

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी पहले हर शहर की अपनी संस्कृति थी, पहचान थी; रिवाज था। हर चीज के मिलने का स्थान तय था। कपड़े, अनाज, गहने,...

अनचीन्ही प्रतिभाएं

वीणा शर्मा असगर पच्चीस-तीस साल का युवक है। उसकी छवि दरवेश जैसी लगती है, पर वह मजदूर है। इमारतों में सफेदी का काम करता...

बैलों का संगीत

प्रेम सदानंद शाही बात पिछले साल गरमी की है। मैं छुट््िटयों में अपने गांव गया हुआ था। कुशीनगर जनपद के रामकोला कस्बे में हम...

रिक्शे के साथ

राजेंद्र रवि विद्यालय की शिक्षा पूरी करके मैं गया कॉलेज में प्रवेश लेकर भारतीय साम्यवादी दल की छात्र शाखा अखिल भारतीय छात्रसंघ में शामिल...

बगैर ताज के ताजपोशी

श्रीप्रकाश दीक्षित एक तरफ आम भारतीय इसे चुनावी जुमला न मान कर अच्छे दिनों की आस में मरा जा रहा है, तो दूसरी ओर...

तुरंता योग

सुमन केशरी पिछले दिनों टीवी देखते हुए एक चैनल पर ध्यान अटक गया। वहां ‘राज्य के योगीराज’ रामदेव दो मिनट में कुछ योगासनों के...

यह क्रिकेट नहीं

क्रिकेट के कारण देश की राजनीति में नैतिकता का युद्ध छिड़ गया है। नैतिकता के सवाल हर तरफ हैं लेकिन जवाब की नैतिकता कहीं...

अभाव के गांव

इस बार बहुत दिनों बाद गांव जाना हुआ। बुंदेलखंड के दक्षिणी छोर पर चंबल और यमुना नदी के किनारे बसे मेरे गांव के पास...

हक के लिए

निवेदिता सूरज ने आसमान पर कब्जा जमा लिया था। घरों के ऊपर झुलसाने वाली गरमी छा गई थी। दिन भर की तेज और तपती...

किसिम किसिम के लोग

उर्मिलेश उन दिनों मैं नवभारत टाइम्स के पटना संस्करण में संवाददाता था और राजनीतिक मामले ‘कवर’ करता था। सचिवालय, विधानसभा, राजनीतिक दलों के दफ्तर...

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