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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे- ध्वनियों के खेल

विवाह के लिए छपे सुंदर से निमंत्रण पत्र के सबसे नीचे विशेष ‘बाल मनुहार’ में एक पंक्ति छपी थी- ‘मेले मामा ती छादी मे...

दुनिया मेरे आगे- ज्ञान का दायरा

अक्सर घरेलू महिलाओं को नौकरीपेशा महिलाओं के मुकाबले कमतर आंका जाता है। यों समझा जाता है कि ऐसी महिलाएं जरूर कम-पढ़ी लिखी होंगी।

दुनिया मेरे आगे- गांव की छांव

गांव से अब गांव ही दूर होते जा रहे हैं। लोग मुआवजे लेकर स्वेच्छा से अपनी जमीन, अपने खेत-खलिहान बेच कर शहरों की मलिन...

दुनिया मेरे आगेः समझ की सीढ़ियां

किसी भी बात को समझाने का हर किसी के पास अलग-अलग तरीका होता है। उसे पक्का भरोसा होता है कि वह समझाने में सफल...

दुनिया मेरे आगेः धरोहर की शहादत

अल-हदबा’ भी जमींदोज हो गई। अल-नूरानी मस्जिद का नाम भी अब गुजरे जमाने के पन्नों में बंद होकर रह गया है।

दुनिया मेरे आगे- लेखन की परिधि

दिन भर के अनुभवों से जुड़ा जो भी मैं लिखने की सोच रही हूं, वह लिखने लायक है या नहीं! शुरुआती कुछ दिनों में...

दुनिया मेरे आगे- घुमक्कड़ी के कोने

तीर्थयात्री नदी की पूजा-अर्चना में व्यस्त थे। कहीं अगरबत्ती सुलगती छोड़ दी तो कहीं कोई अर्पित पुष्प पत्थरों से उलझे छोड़ कर दूसरे कर्मकांड...

संवाद के सेतु

एक साथ काम करते अलग-अलग समूहों में थोड़ी-बहुत बातचीत होना लाजिमी है। एक दूसरे के बारे में जानने की इच्छा भी लोगों के बीच...

वह कागज की कश्ती

जब भी मूसलाधार बारिश होती थी, पानी कई दिन तक झमाझम बरसता रहता। कुछ समय के लिए घरों के सामने पानी भी जमा हो...

दुनिया मेरे आगेः हाशिए के लोग

अक्सर हम सबको बराबर नजर से देखने की वकालत करते हैं। निश्चित रूप से यह हमारी सभ्य होती चेतना का प्रतीक भी है।

दुनिया मेरे आगेः काबिलियत की कसौटी

कहां काम करती हो, रहती कहां हो, अपना फ्लैट लिया है क्या, कितनी तनख्वाह है...! सब तो बहुत बढ़िया है!

चौपालः सुरक्षा का अभ्यास

अमेरिका, भारत और जापान की नौसेनाओं के बंगाल की खाड़ी में सोमवार से जारी त्रिपक्षीय ‘मालाबार’ अभ्यास को चीन के बढ़ते दखल के खिलाफ...

तराजू पर भरोसा

आमतौर पर पत्रकारिता या मीडिया के लिए टिप्पणी की जाती है कि अब उसकी विश्वसनीयता घट गई है।

चेतना का पाठ

बचपन के वे दिन जब हम छिपते-छिपाते मोहल्ले की एक छोटी-सी दुकान से अठन्नी और एक रुपए के हिसाब से बिल्लू, रमन, पिंकी और...

परीक्षा की समीक्षा

आधुनिक लोकतंत्रों में से बहुतों ने सामान्य बहुमत की व्यवस्था का चयन करके एक ऐसा शासन दिया जहां शासक और उसकी पार्टी आमतौर पर...

वर्चस्व की हिंसा

मेरे दिल-दिमाग में वह दृश्य कई दिनों तक घूमता रहा। उस लड़की का अपराध क्या था? क्या उसका बोलना अपराध है? क्या शादी होते...

दुनिया मेरे आगे -स्मृति छंद घड़ीसर

रावल घड़सी ने राजगद््दी पर बैठने के तुरंत बाद विक्रम संवत 1392 में वर्षा जल संग्रहण के लिए इस वृहद तालाब को बनवाया।

दुनिया मेरे आगेः विवेक का पाठ

अध्यापन को एक बेहद सरल कार्य के तौर पर देखा-समझा गया है। शिक्षकों के इस पिरामिड में प्राथमिक अध्यापक के दायित्व सबसे सामान्य और...

सबरंग