June 28, 2017

ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे-सिमटती संवेदनाएं

संकीर्ण धार्मिकता और राजनीति के दो औजार हैं जो सामाजिक रिश्तों के तानेबाने को गुंथा हुआ नहीं रहने देते। वक्त के साथ इन औजारों...

कहां है हमारा ठौर

हमें माफ कर दो मेरी नन्हीं बच्ची नैन्सी! हम सब तुम्हें बचा नहीं पाए! तुम्हारे रक्त से भीगे इस जमीन पर हम जिंदगी की...

दुनिया मेरे आगेः वंचना की परतें

आमतौर पर व्यवस्था में घुली-मिली बातों, व्यवहारों और गतिविधियों को सामान्य मान कर हम अपने काम में लग जाते हैं, क्योंकि उसका सीधा असर...

दुनिया मेरे आगेः नए जमाने के पात्र

समय के साथ-साथ कई चीजें बदलती हैं। मनुष्य का रहन-सहन, उसके आचार-विचार से लेकर खानपान, परिधान, पात्र और भी बहुत कुछ।

दुनिया मेरे आगे- सवालों का सामना

प्रार्थना शुरू करने से पहले कुछ श्रद्धालु आसपास कटोरे में दूध भर कर रखते हैं और प्रार्थना के बाद दूध के कटोरों को...

गांव का पानी

बहुत अरसे बाद गांव में एक माह से अधिक रहना हुआ। यों मेरा गांव से दामन कभी नहीं छूटा। शायद अंतिम सांस ही कभी...

दुनिया मेरे आगे- आभासी दुनिया के दीवाने

मां अपने मोबाइल पर व्यस्त हो गई और खेलते-खलते वह छोटा बच्चा स्वीमिंग पूल के पानी में उतर गया और डूब गया। बहुत देर...

दुनिया मेरे आगे- बदलाव की इबारत

हमारी एक आदत हो गई है कि हम दूसरों पर मजाक के साथ टीका-टिप्पणी करें और जब खुद उन्हीं हालात से गुजरना पड़े तो...

दुनिया मेरे आगेः मुस्कान की खोज

अपने घर के पास स्थित एक किराने की दुकान चलाने वाले युवक से बाकी बातें करने के बाद संदर्भ आने पर मैंने पूछा कि...

दुनिया मेरे आगेः वे दिन वे बातें

आज भी छोटे शहरों में जब वर्तमान से मिलने अतीत आता है, तो खूब बातें होती हैं।

दुनिया मेरे आगे- निराशा का बोझ

हाल ही में एक जन प्रतिनिधि से मुलाकात हुई तो उन्होेंने मेरे काम के बारे में भी जानना चाहा।

दुनिया मेरे आगे- सवालों की उड़ान

नुकीले पत्थर और टकराहट की दौड़ती-भागती छाया का प्रतिबिंब अब भी कायम था। हवा में ताजगी, झूमते हुए हरे पत्तों का हुजूम, पक्षियों का...

दुनिया मेरे आगे- दीवार के पार

उस दिन भी घर से निकलना रोज की तरह ही सामान्य था। मन में कई तरह के कामों को पूरा कर लेने का संकल्प,...

दुनिया मेरे आगे- मेले का झमेला

पड़ोसन के रोने की आवाज कानों में आई तो उनकी फिक्र हुई। सांत्वना देते हुए वजह पूछा तो उन्होंने बताया कि वे हनुमान मंदिर...

दुनिया मेरे आगेः साथ छोड़ गई परछार्इं

आमतौर पर यह माना जाता है कि परछार्इं कभी आपका पीछा नहीं छोड़ती। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि साल में अमूमन दो बार...

दुनिया मेरे आगेः स्वच्छता का ठौर

हाल ही के सर्वेक्षण के बाद मध्यप्रदेश के कुछ शहर देश के स्वच्छ शहरों में शुमार हुए हैं। भोपाल उनमें से दूसरा है और...

दुनिया मेरे आगे- धारणा के बरक्स

सरकारी स्कूलों में काम कर रहे अध्यापकों के प्रति कई प्रकार की धारणाएं बनी हुई हैं। ये धारणाएं शिक्षकों के अपने कर्तव्य से विमुख...

दुनिया मेरे आगे-चिड़िया का मन

कविता और चिड़िया में कोई साम्य हो, न हो, ‘उड़ान’ की अद्भुत क्षमता होती है। दरअसल, यह उड़ान ही दोनों की जीवंतता का रहस्य...

सबरंग