April 23, 2017

ताज़ा खबर

 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः परिवेश का पाठ

बारिश का मौसम था। मैं उत्तराखंड के उधमसिंह नगर में बाजपुर ब्लॉक के एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय में गया था।

दुनिया मेरे आगेः देह का दायरा

मैकलोडगंज की गलियों में घूमते हुए एक साधारण-सी दिखने वाली महिला पर नजर ठहरी, एक मित्र ने बताया कि वे आमा आद्धे हैं।

दुनिया मेरे आगेः सुकून की उड़ान

मेरी एक मित्र को मोबाइल के वाट्सऐप पर एक बुरा समाचार मिला तो उससे पैदा हुए तनाव से उसकी हालत बिगड़ गई।

दुनिया मेरे आगेः प्रेम पर पहरा

मुझे आज भी याद है कि जब उसके घरवालों को पता चला था कि उसे किसी से प्यार हो गया है तो किस तरह...

दुनिया मेरे आगेः मायूस प्रतिभाएं

हम लगातार सामाजिक-राजनीतिक मसलों पर बात करने के क्रम में कई ऐसे क्षेत्रों की समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं जिन्हें विकास का आधार...

कहावतों के रंग

हम कह सकते हैं कि कहावत एक ऐसा बिंदु है, जिसमें असंख्य अनुभवों की कड़ियां संयुक्त रहती हैं।

नशे के विरुद्ध

जेएनयू, शिमला, सागर और वर्धा विश्वविद्यालयों के परिसर भी काफी बड़े हैं। लेकिन इनमें से कोई भी विश्वविद्यालय यह दावा नहीं कर सकता कि...

अंतिम अरण्य

गीता में कृष्ण ने कहा है- ‘नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: / न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत:।’

अपने का मोल

भारत में इसका बाजार आज दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा हो चुका है। भारत में इन दिनों ‘अपना बच्चा’...

पैसे का पाठ

हमारे राज्य पश्चिम बंगाल के सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए आजकल बीएड डिग्री अनिवार्य कर दी गई है।

दुनिया मेरे आगे: तनाव में मुस्कान…

ये घटनाएं नए दौर के काम के तनाव और उनसे उबरने के तात्कालिक और स्थानीय उपायों के उदाहरण हैं।

दुनिया मेरे आगे- भ्रम का भविष्य

हमारा देश दुनिया की बड़ी ताकत बनने जा रहा है और प्रयास, विज्ञान के शिखर पर नए मुहावरे गढ़ रहा है। ऐसे में अखबार...

दुनिया मेरे आगेः रंगकर्म में नौटंकी

पिछले दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की एक ग्रेजुएट साजिदा के निर्देशन में एक नाटक ‘तमाशा-ए-नौटंकी’ देखने का मौका मिला।

दुनिया मेरे आगेः हर रंग मुहब्बत का

मैं जब बड़ी हो रही थी तो मेरे आसपास अनेक बोली और भाषा के रंग थे। मैथिली, मगही, बांग्ला, उर्दू, पंजाबी, तेलुगू समेत बिहार...

दुनिया मेरे आगे- जिंदगी के घटते नंबर

उस अहसास के आधार पर सोचने को बदला भी है कई बार। क्योंकि सोचने और बात करने और जीने के बीच अगर कोई...

दुनिया मेरे आगे- दिखावे के दिवस

ज्यादा उम्र के लोग भी मात्र पैसा कमाने या उसे जोड़ने के नुस्खों में जुटे हैं। एक-दूसरे की होड़ में न जाने कितना...

रंग रसायन

घर के सब सदस्य मिलजुल कर कमर कस लेते थे। गुझिया, बेसन पापड़ी और मीठे, नमकीन शकलपारे बनाने के लिए। स्वागत में सत्कार का...

दुनिया मेरे आगे: चित्र में होली

होली भारतीय जन-जीवन का सबसे बड़ा और प्रिय त्योहार रहा है। आदि संस्कृति से जुड़ा होने के कारण होली का स्वरूप अत्यंत प्राचीन है।...

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