March 27, 2017

ताज़ा खबर

 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे- अनोखा संगम

मौत की घड़ी के चुनाव यानी स्वैच्छिक मृत्यु को लेकर कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संरक्षकों के बीच चल रही बहस के पक्ष और विपक्ष...

दुनिया मेरे आगेः सरोकार का हाशिया

इतिहास में दर्ज बहुत सारी बातें अक्सर राजनीति का मोहरा बनती रही हैं और आमतौर पर यह सत्ता की सुविधा और उसके अनुकूल होने...

दुनिया मेरे आगेः लाचारी का सफर

सुबह का समय था। ट्रेन अपनी पूरी गति से चाय बागान के बीच से गंतव्य की ओर जा रही थी। चाय के पेड़ों पर...

नाम बनाम पहचान

मुझे वह कहावत याद आती रही कि ‘नाम में क्या रखा है’। अपने भारत में दीपक अपने घर में ‘चुन्नू’ हो सकता है या...

मनमानी का इलाज

एक अनुमान के मुताबिक भारत में तीन क रोड़ से ज्यादा दिल के मरीज हैं।

ज्ञान की सीमा

यह पिछले महीने की बात है जब प्रदीप रेलवे में नौकरी के लिए परीक्षा देने लखनऊ गया था। इस परीक्षा के लिए उसने रात-दिन...

दुनिया मेरे आगे: गांवों में बहार है

वाकई इस असुरक्षा के बीच जो लोग रहते हैं, उनके जीवट का जवाब नहीं। सरकारी स्कूल बिल्कुल चौपट।

दुनिया मेरे आगेः पहचान का दंश

कुछ बातें आपके अंदर गहरी बैठ जाती हैं। उनसे आप लाख पीछा छुड़ाना चाहें, लेकिन छुड़ा नहीं पाते। मुझे दिल्ली में रहते हुए बीस...

दुनिया मेरे आगेः मस्तिष्क की तासीर

हमारे यहां स्कूली शिक्षा को लेकर हर कहीं चर्चा सुनी जा सकती है। एक प्रमुख कारण गिनाया जा रहा है कि स्कूलों की कक्षाओं...

दुनिया मेरे आगे- प्रकृति की गोद

सामान्य से दिखने वाले इस पेड़ की सूरत कुछ दिनों से बदल गई है। अब इसके नीचे एक छोटी-सी बांस की सीढ़ी लगी है।

तंग नजर

इससे पहले क्रिकेटर मोहम्मद शमी को भी फेसबुक पर अपनी बीवी के साथ फोटो डालने के कारण कई लोगों के विरोध का सामना...

दृष्टि के धुंधलके

कलात्मक वस्तुएं दुकान पर सस्ते में बिक रही थीं। वहां एक सजावटी सामान के रूप में गौतम बुद्ध की प्रतिमा थी, जिसमें पेड़ के...

दुनिया मेरे आगे: कीर्तिमान के करतब

कीर्तिमान भी किस्म-किस्म के होते हैं। वे सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों ही गतिविधियों के होते हैं।

दुनिया मेरे आगेः गठबंधन के सहारे उम्मीद की नाव

बुंदेलखंड के चित्रकूट में कालूपुर के पास बंद पड़े जागेश्वर प्राइवेट अस्पताल के परिसर में गुलाबी साड़ी पहने कुछ महिलाएं पूड़ियां बना रही थीं।

दुनिया मेरे आगेः आधुनिकता की कठपुतली

बिहार के रोहतास जिले के हथनी गांव के सत्तर वर्षीय सुदामा का परिवार कई पीढ़ियों से कठपुतली के करतब दिखाता आ रहा है।

दुनिया मेरे आगे: शिक्षा और परीक्षा

परीक्षा के दिनों में इसका खौफ जिस तरह शुरू हो जाता है, शिक्षण तंत्र से बाहर निकल कर ही समझ में आता है कि...

दुनिया मेरे आगे- ममता का जीवन

जब वहां मौजूद बाकी भिखारी चले गए तो मैं उस महिला के पास पहुंचा। वह उस वक्त भीख में मिले चंद पैसों को समेट...

दुनिया मेरे आगे- अहसास के आईने में

प्रेम है तो जीवन है, अन्यथा जिंदगी नीरस और ऊबाउ है। प्रेम का धरातल बहुत विशाल है और इसकी सच्चाई की परख बहुत ही...

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