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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे- बच्चे कहां हैं महफूज

जब स्कूलों में बच्चों के साथ गलत हरकतें की जाती हैं तो समाज को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि आखिर हमारे...

दुनिया मेरे आगे- बुद्ध और युद्ध

इसके बावजूद मैं निराश नहीं हूं। मुझे लगता है कि एक दिन वह साल भी आएगा जब हम अच्छाई का पर्व मना रहे होंगे।...

दुनिया मेरे आगे- उजाले अपनी यादों के

कोमल हरे पत्तों के बीच सहेज कर रखा हुआ नन्हा दीया गंगा आरती में घंटे-घड़ियाल और शंख ध्वनि की धूमधाम के साथ प्रवाहित...

दुनिया मेरे आगेः स्वच्छता के सवाल

आधुनिक काल में इस देश में स्वच्छता की ओर सबसे अधिक ध्यान महात्मा गांधी ने दिलाया था और बाकायदा इसका आग्रह आजीवन बनाए रखा...

दुनिया मेरे आगेः मुठ्टी से फिसलती रेत

किस्सों में सुना था कि फलां नदी का पुल नहीं बन रहा था तो वहां एक बलि दी गई, तब काम आगे बढ़ा। लेकिन...

अमन के रास्ते

हालात ये हैं कि कुछ गायक और कलाकार भी फनकारी के अलावा नफरतों का कारोबार करने लगे हैं, बहाना कभी अजान या गुरबानी का...

दुनिया मेरे आगे- सहमे हुए बच्चे

कुछ समय पहले ही एक कक्षा में सिर्फ हाजिरी के वक्त बोलने में चूक की वजह से लगातार थप्पड़ों से पीटा गया।

दुनिया मेरे आगे- यादों के मेले

मैं भी कुछ बच्चों के साथ खेल देखने लगा तो बचपन की यादें ताजा हो गर्इं कि किस तरह मदारी के कहने पर हम...

दुनिया मेरे आगे- गीली लकड़ियां

हर चिंता हमारी चिता की लकड़ी होती है, जिसे हम खुद इकट्ठा करते रहते हैं। इन लकड़ियों में कुछ लकड़ियां ‘सूखी’ होती हैं तो...

दुनिया मेरे आगेः कला का वैभव

चित्रकला के प्रति मनुष्य का प्रेम आदिकाल से रहा है। वह शुरू में पेड़-पत्तों और पत्थरों पर आड़ी-तिरछी रेखाओं से आकार उकेरा करता था।...

दुनिया मेरे आगेः तनाव की भट्टी

बात एक छोटे और सस्ते मकान में शिफ्ट होने की थी। भले ही मसला एक कमरे का ही क्यों न हो!

दुनिया मेरे आगे- निज भाषा

मेरठ की उस छात्रा को मैंने समझाया कि हिंदी की खड़ी बोली का जन्म तो तुम्हारे क्षेत्र से ही हुआ है और तुमने दसवीं...

दुनिया मेरे आगे- बरसात के बाद

यों मौसमों की विदाई कोई नई बात नहीं है। गरमी के बाद बारिश का मौसम आता है। फिर शीत ऋतु की आहट भी ठंडी...

दुनिया मेरे आगे- विज्ञान बनाम दृष्टि

वे प्रक्षेपण से पहले किसी तरह का कोई ‘जोखिम’ नहीं लेना चाहते और इस चक्कर में टोटके अपनाने से भी परहेज नहीं किया जाता,...

दुनिया मेरे आगे- गिनती के दिन

थोड़े दिनों पहले एक दोस्त आया था। चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। उसकी नब्बे साल पार दादी कई दिनों से बिस्तर...

दुनिया मेरे आगे-अपने शहर में पराए

गालिब तो बस गालिब हैं, जिनकी हस्ती को शब्दों में पिरोने की कला कोई उन्हीं के जैसा ही कर सकता है। और गालिब का...

दुनिया मेरे आगेः परिसर की दृष्टि

एक साथी ने मुझसे अपना अनुभव साझा किया। दरअसल, उनसे एक दिन ई-मेल द्वारा सूचना मांगी गई थी कि वे अगले सत्र में क्या...

दुनिया मेरे आगेः दहेज की देह यातना

हम प्राय: रोज ही अखबारों में दहेज के लिए किसी स्त्री को जलाए जाने या उसे प्रताड़ित किए जाने की खबर पढ़ते हैं।

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