May 23, 2017

ताज़ा खबर

 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे- सम्मान का पैमाना

कद-काठी का उतना महत्त्व नहीं है, जितना इस बात का कि व्यक्ति अपने व्यक्तित्व के बल पर अपना कद कितनी ऊंचाई तक ले...

दुनिया मेरे आगे- उदास व्यवहार का मौसम

हर तरफ रास्ते ऊबड़-खाबड़ हो गए हैं। यहां-वहां कांटे उग आए हैं। गलती कहां हुई। बच्चे जब छोटी-छोटी उद््दंडताएं करते हैं, तो हम सभी...

दुनिया मेरे आगेः कामयाबी का चेहरा

परीक्षाओं में ज्यादा से ज्यादा नंबर लाने की फिक्र बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों और यहां तक कि शिक्षकों को भी तनाव में डाल देती...

दुनिया मेरे आगेः नाम की पहचान

अपने नाम से मेरा असल वास्ता स्कूल में दाखिला लेने के बाद ही पड़ा। वरना उसका इस्तेमाल आमतौर पर मुझे पुकारने के लिए ही...

दुनिया मेरे आगे- इतिहास की छवियां

एक मुहावरा बहुत प्रचलित था उस समय- ‘हिस्ट्री जौगरफी बड़ी बेवफा, रात को रटो तो दिन में सफा।’

दुनिया मेरे आगे- दोस्ती की वह दुनिया

हमारी दोस्ती अक्सर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों जैसी होती है। अगर खुद की रिपोर्ट गड़बड़ है तो सबसे पहले बगल वाले की रिपोर्ट की ओर...

दुनिया मेरे आगे- जिंदगी के दो रंग

प्रेम में धोखा खाए हुए युवा लड़के-लड़कियां जहर खा कर या चलती ट्रेन के आगे आकर या नींद की गोलियां खाकर अपनी जिंदगी खत्म...

अंत्याक्षरी में कविता

दोहे और चौपाई की सीढ़ियां चढ़ते हुए हम वहां पहुंच जाते थे, जहां छायावादी कवियों की खूबसूरत गेय कविताओं का स्वाद जुबान पर चढ़ता...

दुनिया मेरे आगेः चलनी दूसे सूप को

समकालीन दुनिया के वक्तव्य-वीरों का तुमुल कोलाहल परवान चढ़ा हुआ है।

दुनिया मेरे आगेः सीखने की समझ

कुछ समय पहले भोपाल में एक नाटक के मंचन के दौरान तोत्तोचान को देखने और उस पर फिर से गौर करने का मौका मिला।

हिंसा का मानस

पूरे विश्व में हिंसा और अहिंसा की नई मानवीय प्रवृत्ति पर तीखी बहस चल रही है।

दुनिया मेरे आगे: कविताओं का कारवां…

जब हम जिंदगी से जूझ रहे थे, तब कौन-सी कविता थी जिसने हाथ थाम कर हौसला दिया था! तपती दोपहरी में किस कविता ने...

भरोसे का जीवट

वे एक व्यवस्था का रूपक होती हैं। उत्तर प्रदेश में आंबेडकर नगर जिले के घुघुलपट्टी गांव में गुजरे अपने बचपन का वह हिस्सा मुझे...

दुनिया मेरे आगे- जड़ नजर

लड़की के हंसने का गलत मतलब निकालने की धारणा हर जगह मौजूद न हो, लेकिन महिलाओं के प्रति अलग-अलग क्षेत्रों में इस प्रकार के...

दुनिया मेरे आगेः पानी के बिंब

पानी के बारे में सोचने पर दो बिंब ज्यादा मुखर होते हैं। एक, सूखे से संबंधित और दूसरा, बाढ़ वाला।

दुनिया मेरे आगेः विचार बनाम बंदिशें

विचार की दुनिया में जब राजनीति का दखल होता है तो अमूमन हर पक्ष के लिए जगह धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है।

दुनिया मेरे आगे- भीड़ में सन्नाटा

जब दो या तीन दिन की छुट्टियां एक साथ आती हैं, तब हम बाहर भागने का प्रयास करते हैं।

सुख की उम्र

इस भागमभाग के दौर में अरस्तू जैसे दार्शनिक के लिखे को पढ़ने का समय हमारे पास नहीं है और न ही हम गांधी, कबीर...

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