December 05, 2016

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चौपालः बदलाव के बरक्स

विचारधारा से संस्कृति बनती है और संस्कृति से मनोविज्ञान। यही मनोविज्ञान हमारी क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मसलन, हमारा समाज पितृसत्तात्मक है तो उससे जो धर्म और संस्कृति बनी वह भी पितृसत्तात्मक बनी।

Author October 21, 2016 02:05 am

विचारधारा से संस्कृति बनती है और संस्कृति से मनोविज्ञान। यही मनोविज्ञान हमारी क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मसलन, हमारा समाज पितृसत्तात्मक है तो उससे जो धर्म और संस्कृति बनी वह भी पितृसत्तात्मक बनी। क्योंकि हम इस संस्कृति में जीते हैं, हमारा समाजीकरण इसी संस्कृति में होता है इसीलिए हमारा मनोविज्ञान भी इसी संस्कृति के अनुरूप ढल जाता है। हम अपनी प्रथाओं और रीतियों को नैसर्गिक/सत्य मानने लगते हैं। हमें लगता है कि जो हम कर रहे हैं वह अपनी मर्जी से कर रहे हैं, हम पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। यह बात उस वक्त खुल कर और सामने आ जाती है जब आप खुद को नास्तिक और मांसाहारी कहते हुए भी गाय और सूअर नहीं खाते। चलिए, गाय और सूअर को छोड़िए, सांप और कुत्ता नहीं खाते क्योंकि आपकी संस्कृति में ये खाद्य पदार्थ नहीं हैं। जब हम बुरका और करवा चौथ पर बात करते हैं तो हमें लगता है कि यह लड़कियों की मर्जी का मामला है और वे खुद तय कर रही हैं। उस वक्त हम पितृसत्ता के दबाव को भूल जाते हैं जो लड़कियों की चयन की आजादी को निर्धारित करता है।


याद रहे, जब तक विचारधारा नहीं बदलती तब तक आपकी संस्कृति नहीं बदलती और जब तक आपकी संस्कृति नहीं बदलेगी, आपका मनोविज्ञान नहीं बदलेगा और आपका व्यवहार वैसा ही रहेगा जैसी विचारधारा है। उदाहरण के लिए, मनुवाद/ ब्राह्मणवाद एक विचारधारा है। इस विचारधारा ने जो संस्कृति बनाई उसमें जातिवाद, छुआछूत, वर्ण व्यवस्था थी। हजारों सालों तक लोग मानते रहे कि वर्ण नाम की कोई चीज होती है। पर जैसे-जैसे मनुवाद/ ब्राह्मणवाद कमजोर हो रहे हैं, वैसे-वैसे संस्कृति बदल रही है और उसी के अनुरूप हमारा मनोविज्ञान भी बदल रहा है।
आज सती प्रथा समाप्त है क्योंकि उसके पीछे का विचार समाप्त हो गया लेकिन तमाम कानूनी बाध्यताओं के बावजूद दहेज प्रथा समाप्त नहीं हुई। दुर्भाग्य यह है कि विचारधारा में बदलाव बहुत धीरे-धीरे होता है और विचारधारा में बदलाव के लिए एक सामूहिक लड़ाई/ जनचेतना की आवश्यकता होती है जो पितृसत्ता के विरुद्ध लड़ाई में नजर नहीं आती।
’अब्दुल्लाह मंसूर, जामिया विश्वविद्यालय

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First Published on October 21, 2016 2:05 am

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