ताज़ा खबर
 

जीवन की लय

आजकल के जीवन को समझने के लिए हमें अपने आसपास की दुनिया तो देखनी ही होती है। वह सब कुछ देखना होता है, जिसके सहारे जीवन की धुरी को चलाया जाता है।
Author October 16, 2015 10:06 am

आजकल के जीवन को समझने के लिए हमें अपने आसपास की दुनिया तो देखनी ही होती है। वह सब कुछ देखना होता है, जिसके सहारे जीवन की धुरी को चलाया जाता है। जीवन को चलाने के लिए जितना संसाधनों की जरूरत पड़ती है, उससे कहीं ज्यादा विचारों की भी पड़ती है। हम किसके साथ हैं, कहां बैठते हैं, किससे बात करते हैं, यह तय करता है कि एक व्यक्ति के नाते हमारा क्या रास्ता होगा।

आदमी के आगे बढ़ने के रास्ते में बने उसके कदमों के निशान में उसके भावी जीवन के चिह्न भी होते हैं। इसलिए यह निर्धारित करते हुए उसके हर कदम को गौर से देखा जाना चाहिए। जो समाज अपने लोगों के पगचिह्न को ठीक से देखता-परखता है और उस हिसाब से अपनी राह और मंजिल चुनता है, उस पर आगे बढ़ता है, वह कम गलतियां करता है, क्योंकि वह पूर्वजों की हर गलती से सीखते हुए अपने कदम आगे बढ़ाता है। इस तरह से वह जीवन को जीने लायक सुविधाजनक बनाता है।

यह सब कुछ शुरुआती दिनों में ही दिख जाता है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे लोगों को अपने दायरे और परिचय में लाया जाए, जिनके लिए जीवन का हर क्षण एक चुनौती हो, एक मंजिल हो। सब बातों को उसकी तह में जाकर वह जानना चाहता हो। वह हमेशा आगे-आगे ही चलता है। कोई साथ चले तो ठीक, न चले तो भी ठीक। वह अपना काम समय से और सही ढंग से ही करेगा।

ऐसे लोग हमेशा अपने जीवन-व्यवहार से लोगों का ध्यान खींचते हैं और कार्य-संस्कृति का माहौल बनाते हैं। ऐसे लोग एक तरह से खुद पर शासन करते हैं। हालांकि वह कुछ भी विशेष नहीं करके, बस अपना काम कर रहा होता है। इसमें बस इतनी-सी बात है कि हर कार्य समय से और अपने हिसाब से हो तो किसी को किसी भी स्तर पर दिक्कत नहीं आएगी।

हम जिस संसार में रह रहे हैं, वह कितना हमारा अपना है और कितना वह अन्य के द्वारा बनाया जा रहा है। जो कुछ हो रहा है, उसमें हमारे होने का क्या अर्थ है! कुछ है भी या यों ही हम अपने अस्तित्व को लेकर बैठे हैं। यह इतना भर ही है या कुछ और है, इस बिंदु पर सोचने की जरूरत है। दुनिया को जानने का सबसे बेहतर स्रोत है कि हम अपने समय में मौजूद मीडिया और संसार को देखें-सुनें और पढ़ें।

एक संसार मीडिया बना रहा होता है और एक दूसरा संसार सोशल मीडिया और तकनीक रच रही होती है। इन सबके बीच हमें बहुत सजग होकर अपनी दुनिया रचनी होती है, जिसमें हम अपने हिसाब से रह सकें, कुछ विचार दे सकें और कुछ विचार के साथ जी सकें। यह सब बहुत ही सावधानीपूर्वक करने की जरूरत है। अपना संसार बनाना है तो वह कैसा हो, कितनी असहमति के प्रति आदर हो, उसमें कितना लोकतंत्र हो! उसमें हम कैसे रहें, जिसमें सब चीजें सहज तरीके से सामने आएं। यह आसान नहीं है। लेकिन चलना इसी संसार में है। हमारे किसी कृत्य से किसी को दुख न हो, पर यह केवल हमारे ऊपर निर्भर नहीं करता। संसार में अन्य की गति महत्त्वपूर्ण होती है।

इस गति पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। यहां केवल अपनी गलती मायने नहीं रखती है। अपनी गति के साथ संसार की सहभागिता और गति ही हमें सही ढंग से मंजिल पर ले जाती है। हर मंजिल पर हम अकेले नहीं होते। हमारे साथ अन्य का संसार होता है और इस संसार में हमारी गति और मंजिल होती है। यहां पूरे वजूद के साथ सब होते हैं। कोई भी गति अकेले की यात्रा नहीं होती। वह जो कुछ है, सबके साथ है। हम अपने रास्ते पर अपनी ही गति में अपने लय में चलें तो बेहतर होगा।

यों जीवन को देखा जाए तो यह एक लय है, जिसमें हम चलते हैं। लय में चलना और अपने क्रिया-व्यापार को लय में पूरा करना ही जगत के लय के साथ चलना होता है। जब इस तरह चलते हैं तो संसार को उसके अर्थों में देख पाते हैं। जीवन में किसी भी विचार पर चलना और धारण करना आसान नहीं है। हम जो कुछ धारण करते हैं, वह हमारे आचरण का हिस्सा होता है, तभी जाकर हम सही मायने में जीवन को जीते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.