ताज़ा खबर
 

स्वच्छता और पवित्रता

विष्णु नागर मोदीजी के स्वच्छता अभियान के नतीजे पूरी तरह हमारे सामने आ चुके हैं। स्थिति वही की वही है। यों इस अभियान की विफलता के बहुत से कारण हैं, मगर एक बड़ा कारण यह भी है कि खासकर हिंदुओं के लिए स्वच्छता और पवित्रता काफी हद तक दो भिन्न बातें हैं। इनमें परस्पर संबंध […]
Author July 1, 2015 17:22 pm

विष्णु नागर

मोदीजी के स्वच्छता अभियान के नतीजे पूरी तरह हमारे सामने आ चुके हैं। स्थिति वही की वही है। यों इस अभियान की विफलता के बहुत से कारण हैं, मगर एक बड़ा कारण यह भी है कि खासकर हिंदुओं के लिए स्वच्छता और पवित्रता काफी हद तक दो भिन्न बातें हैं। इनमें परस्पर संबंध होना अनिवार्य नहीं है। कोई स्वच्छ होने से पवित्र नहीं हो जाता और अस्वच्छ होने से कोई अपवित्र भी नहीं हो जाता। दलित-मुसलमान आदि हजार बार भी गंगा में नहा लें, तो ‘अपवित्र’ ही कहे जाएंगे और ब्राह्मण ‘देवता’ कई-कई दिनों से न नहाएं हों, तो भी वे ‘पवित्र’ रहेंगे, क्योंकि पवित्रता जाति और धर्म में अंतर्भुक्त है, व्यक्ति विशेष में नहीं और पवित्रता ही सर्वोपरि है, स्वच्छता नहीं। स्वच्छता घर के अंदर हो तो ही काफी है। हिंदू सुबह उठने के बाद सबसे पहले निवृत्त होगा, फिर नहाएगा, पूजा-पाठ करेगा और तब जाकर नाश्ता करेगा। सामान से भरे घर को जितना साफ रखा जा सकता है, उतना हिंदू उसे सुबह से ही साफ रखने का यत्न करेगा। यानी वहां पवित्रता और स्वच्छता पर्यायवाची हो सकते हैं। लेकिन घर से बाहर आते ही यह रिश्ता लगभग पूरी तरह टूट जाता है।

मान लिया जाए कि घर के ठीक बाहर कुत्ता-बिल्ली अगर कुछ कर गया है, तो हम पड़ोसी से इस आधार पर खूब झगड़ा कर सकते हैं और जरूरत पड़े तो और ज्यादा आगे बढ़ सकते हैं। मगर इसे खुद उठा कर फेंक नहीं सकते, क्योंकि यह हिंदू सवर्ण और श्रेष्ठिवर्ग का काम नहीं है और जिसका है, उसे पैसे का लालच देकर इसे साफ करवा सकते हैं। अगर यह किसी वजह से संभव नहीं है, तो घर में आने-जाने वालों को बार-बार इससे सावधान कर सकते हैं। घर के ठीक बाहर जो भी है, वह हमारा अपना विषय नहीं है, क्योंकि बाहर की गंदगी से हमारी और हमारे घर की पवित्रता नष्ट नहीं होती है, न स्वच्छता!

बाहर जाने पर हमारे लिए मंदिर पवित्र हैं, क्योंकि वहां हम दूध, पानी, फूल, पत्ते, नारियल की ऊपरी खोल आदि यहां-वहां बिखेरने के लिए स्वतंत्र हैं। ऐसी गंदगी, कीचड़ आदि से मंदिर की पवित्रता नष्ट नहीं होती, क्योंकि एक तो यह गंदगी हमने की है और दूसरे पवित्रता नदी की तरह मंदिर का भी स्वाभाविक गुण-धर्म है, जिसे कोई चीज स्थायी रूप से नष्ट नहीं कर सकती। गंगा-यमुना आदि नदियां भी स्वत: इतनी अधिक पवित्र हैं कि उन्हें नाले या कारखानों की गंदगी किसी भी हालत में नष्ट नहीं कर सकती! उस पवित्र जल में नहाने से रोग होते हों तो होते रहें, सब प्रभु का ‘प्रसाद’ है! हमें इसमें गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध कुछ करने की जरूरत महसूस नहीं होती, उन पर कोई क्रोध नहीं आता, खुद गंदगी फैलाने वालों को भी कोई पापबोध नहीं होता। हां, सरकार अगर कुछ करना ही चाहे तो जरूर कर ले, वरना पैसा ही खा ले, हम उसके भी साथ हैं, वरना कोई अंतर नहीं पड़ता।

बहुत से लोग ट्रेन आदि में अपनी जाति और धर्म के रक्षार्थ रोटी, परांठे या पूरी बनाने के लिए आटे को दूध में मसलते हैं, ताकि पास में बैठा व्यक्ति अगर दलित या मुसलिम समुदाय का भी हो तो उससे उसके खाने की पवित्रता नष्ट न हो। मेरी मां एक संभ्रात माने जाने वाले कायस्थ परिवार में खाना बनाती थीं। हर सोमवार को यह तय था कि वह उनके घर में बना खाना खाएंगी। उस दिन जब तक मां अपना खाना बना कर अलग नहीं रख देती थीं, उस परिवार का कोई व्यक्ति रसोईघर में झांक भी नहीं सकता था। जहां ब्राह्मण की पवित्रता दलित की छाया पड़ने से भी अपवित्र हो जाती है, उनके मंदिर में प्रवेश से नष्ट हो जाती है, वहां ऐसी व्यवस्थाएं स्वाभाविक हैं।

ऐसी सामाजिक व्यवस्था में, जहां ये नियम टूटते-टूटते भी नहीं टूट रहे- वहां स्वच्छता एक बाहरी, आयातित चेतना का दर्जा ही पा सकेगी। अभी पढ़ रहा था कि एक यादव ने अपनी जाति की पवित्रता को नष्ट न होने देने के लिए अपनी बेटी को एक दलित से विवाह करने से भरसक रोका ही नहीं, बल्कि उसे सबक सिखाने के लिए उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश भी की और उसकी हत्या होने की आशंका भी है। कुछ साल पहले मध्यप्रदेश में एक पिछड़ी जाति के परिवार की पवित्रता इससे नष्ट हो गई थी कि उसके पालतू कुत्ते ने एक दलित के घर की रोटी खा ली थी। जहां मंगल समझे जाने वाले कार्य एक विधवा औरत नहीं कर सकती, जहां मंदिर के पास मस्जिद होने से मंदिर की और हिंदू के घर के नजदीक मुसलमान का घर होने से हिंदू की पवित्रता नष्ट हो जाती हो, वहां स्वच्छता को जीवन-मूल्यों में से एक बनाना आसान नहीं है।

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- http://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- http://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. उर्मिला.अशोक.शहा
    Jul 3, 2015 at 12:26 pm
    वन्दे मातरम- स्वच्छता अभियान की शुरुवात हुई है क्या यह कम है.? शतकों पुरानी आदते सुधारने में थोड़ा टाइम लग सकता है क्या स्वच्छता अभियान के बारेमे जाग्रति होना यह काम उपलब्धि है? क्या ऐसे अभियान कांग्रेस के राज में शुरू हुए है? सिर्फ मोदी को निचा दिखाना मोदी की हर कोशिश को अंडर एस्टिमेट करके मोदी को बदनाम करना यही शायद मिडिया का प्रपंच है लेखक को देश की आबादी और आदतो के बारे में शायद जानकारी कम होगी जा ग ते र हो
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग