April 28, 2017

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दुनिया मेरे आगे: तनाव में मुस्कान…

ये घटनाएं नए दौर के काम के तनाव और उनसे उबरने के तात्कालिक और स्थानीय उपायों के उदाहरण हैं।

Author March 21, 2017 18:02 pm
प्रतीकात्मक चित्र।

उमेश चतुर्वेदी

इंदौर हवाई अड्डे पर प्रवेश से पहले सुरक्षा जांच। गेट पर महिला सुरक्षाकर्मी तैनात थी। आमतौर पर सुरक्षा जांच के दौरान पहचान पत्र नहीं मांगा जाता, सिर्फ बोर्डिंग पास देखा जाता है। लेकिन उस दिन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की महिला सहायक सब-इंस्पेक्टर ने बोर्डिंग पास ले लिया। उसे गौर से देखने के बाद उसने कहा- ‘आइडी दिखाइए।’ सुरक्षा बलों में मौजूद पुरुष जवानों के बीच आम दिखने वाली कड़क आवाज के बजाय उसकी आवाज में नरमी थी। पता नहीं हवाई अड्डे पर तैनाती का असर था या फिर स्त्री सुलभ व्यवहार। यात्री के चेहरे पर झुंझलाहट उभरी और उसने कहा- ‘यहां भी आइडी दिखानी पड़ेगी?’ जेब के हवाले हो चुके पर्स को निकाल कर झुंझलाहट में ही यात्री ने अपना पहचान पत्र निकाला और महिला अफसर की तरफ बढ़ा दिया। पहचान पत्र बढ़ाते वक्त उसने आवाज में कुछ ज्यादा ही नरमी दिखाई। जवाब में महिला अफसर झुंझलाई नहीं और तल्ख तेवर भी नहीं दिखाए।

शोखियों भरे अंदाज से अपनी नजर यात्री के चेहरे पर डाली। हल्की स्मित के साथ उसने वह कार्ड लिया। महिला अफसर की आवाज से यात्री की झुंझलाहट थोड़ी कम हुई नजर आई। लेकिन वह एक खास अंदाज में आता दिखा। अफसर तब तक मुस्कराते हुए बोर्डिंग पास और पहचान-पत्र यात्री को वापस कर चुकी थी। यात्री को शायद भूल का अहसास हुआ। झट से उसने अपना बैग एक्सरे मशीन में डाला और अपनी जांच कराने आगे बढ़ गया। दूसरा दृश्य वाराणसी के लालबहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उसी तरह का है। इंदौर की ही तरह औद्योगिक सुरक्षा बल की महिला अफसर ही सुरक्षा जांच के शुरुआती बिंदु पर तैनात थी। इतने में एक जापानी महिला वहां आई। जापानी महिला को देख कर महिला अफसर को थोड़ी चुहल सूझी। उसने भोजपुरी में संबोधित किया जिसका मतलब हिंदी में हुआ- ‘क्या मैडम, आइए।’ ऐसा कहते वक्त उसके चेहरे पर आई मुस्कान से समझा जा सकता है कि वह थोड़े मनोरंजन की मुद्रा में थी। यात्रियों की लंबी कतार थी।

भोजपुरी समझने वाला एक यात्री महिला अफसर की ओर मुड़ा। अफसर की तरफ देख कर कहा- ‘मैडम, क्या यह महिला भोजपुरी जानती है।’ अफसर ने हल्के से जवाब दिया- ‘अरे सर, जब हम भोजपुरी सीख गए तो यह मैडम भी बनारस आते-आते भोजपुरी सीख ही गई होंगी।’ फिर वह अपने काम में भिड़ गई। काम वही। यात्रियों के सामान और उनकी जांच की निगरानी करना। ये घटनाएं नए दौर के काम के तनाव और उनसे उबरने के तात्कालिक और स्थानीय उपायों के उदाहरण हैं। एकरस जिंदगी कई बार बोझिल हो जाती है। एक ही तरह का काम हर शख्स को परेशान करता है। अगर वह काम सुरक्षा बलों का हो तो उसके बोझिल होने का अनुमान लगाया जा सकता है। सुरक्षा बलों में हाल के दिनों तक सिर्फ पुरुषों का वर्चस्व रहा है। इसलिए उनसे आमतौर पर कड़क व्यवहार की ही उम्मीद की जाती रही है। सुरक्षा बलों में आम मान्यता है कि अगर जवान मीठी जुबान बोलने लगा तो उससे डरेगा कौन!

शायद यही वजह है कि सुरक्षाकर्मियों को अपने जज्बात को किनारे रख कई बार लोगों को फटकारना या पीटना पड़ता है। कड़कपन के इसी प्रशिक्षण का असर है कि जब उनसे कोई सवाल पूछा जाता है तो यह उन्हें अपने अस्तित्व को चोट पहुंचाता लगता है। कई बार उनका अपना तनाव खासा हावी हो जाता है। चूंकि कोमलता से अपने जज्बात को जाहिर करने की उन्हें न तो सीख मिली होती है और न ऐसा मौका मिलता है। ऐसे माहौल में उनके सामने हजारों मील पीछे छूटे घर-परिवार का दबाव बढ़ता है तो वह कभी आत्महत्या कर लेता है, कभी साथियों पर अपनी बंदूक का मुंह खोल देता है। हाल के दिनों में सुरक्षा बलों के बीच ऐसी घटनाएं खूब घटी हैं। सरकार भी इससे चिंतित है। मनोवैज्ञानिक भी जवानों की एकरस जिंदगी में जीवन के नवउल्लास घोलने का सुझाव दे रहे हैं।

ऐसा नहीं कि सुरक्षा बलों के लिए अहम प्रशिक्षण में भावनाओं पर काबू रखने के पहलू को अलग रखा गया होगा। लेकिन महिलाएं अपने स्तर पर लगातार ड्यूटी के बोझ और उससे उपजे तनाव से निपटने के अपने रास्ते निकाल रही हैं। वाराणसी और इंदौर हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच में लगी वे महिला अफसर दरअसल एकरस जीवन के एकाचार और उससे उपजी बोरियत दूर करने की कोशिश ही कर रही थीं। हो सकता है कि ऐसे जवान या अफसर और भी हों, जिन्होंने विपरीत हालात में भी ड्यूटी में कोताही बरते बिना हंसने-गुदगुदाने की राह खोज ली है। तनाव और उससे उपजी परेशानियों से जूझते जवानों से परेशान सुरक्षा बलों के सामने यह भी एक उदाहरण है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

74 साल की उम्र में अवॉर्ड मिलने को बिग बी मानते हैं खुशकिस्मती

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First Published on March 21, 2017 5:31 am

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