December 04, 2016

ताज़ा खबर

 

दुनिया मेरे आगे: मेरी पसंद

पसंद शब्द व्यक्ति या व्यक्तिव की सरलीकृत परिभाषा है। पसंद किसी व्यक्ति विशेष के ‘स्वधर्म’ की परिणति है।

Author November 28, 2016 05:03 am
प्रतीकात्मक तस्वीर।

पसंद शब्द व्यक्ति या व्यक्तिव की सरलीकृत परिभाषा है। पसंद किसी व्यक्ति विशेष के ‘स्वधर्म’ की परिणति है। स्वधर्म यानी उसकी दृष्टि, प्रकृति, भाव-अनुभाव, उसके अंतस और बाह्य की संवेदनात्मक बनावट। यह व्यक्ति के जीवन में उसकी रुचियों-अरुचियों और हर चुनाव में प्रतिनिधि होती है। उसके घर और बाहर, अपने पराए, मित्र और बैरी, आचार-व्यवहार, उसकी वेशभूषा, खानपान और रहन-सहन की शैली। इस अर्थ में मेरा हर चुनाव मेरी अनुकूलता में ही होता है। घर मेरे लिए कोई बड़ा आलीशान मूल्यवान फर्नीचर और सुविधाओं का स्थान नहीं है। घर, जहां बारिश की पहली बौछार के साथ मिट्टी की सौंधी महक आए, सूरज की किरणें भीतर आती हों, आसमान झांकता हो, रात में चंद्रमा और तारे धीमे प्रकाश के साथ चुप से भीतर आ जाते हों। मेरे मां-पिता के ‘घर’ को उनके स्वर्गवास के बाद मेरे भाई ने बिल्डर को देकर एक तिमंजला ‘मकान’ बनवा लिया। मैं वहां गई परेशान, मां के तुलसी के पौधे, धनिया, मेथी, मूली-गाजर की क्यारियां ढूंढ़ती रही। नींबू, पपीते, गुड़हल, कचनार के पेड़ कहां गए।

मोगरे की बेल ऊपर तक चढ़ गई थी। कहां गई? सुबह की सर्दी की धूप में बैठते, चाय पीते, अखबार पढ़ते थे। दोपहर में धूप पीछे आती थी, दक्षिण की ओर खुली जगह थी। तीन-चार बजे के बाद बार्इं तरफ, पश्चिम की ओर, खाना खाकर वहां बैठ कर बतियाते। अब वह सब जगह अंदर ले ली गई थी। कमरों में गहरे तेल रंग का पेंट था। रोशनी की जगह धुंधला-सा था। दिन में ही शाम-सा। लौट आई। सारे रास्ते रोती आई थी। आकर कहानी लिखी थी ‘घर बेघर’। मेरे घर में ड्राइंग रूम में हल्के परदे हैं। सोने के कमरों में परदे दूसरी तरह के। दीवारों का सफेद रंग ‘स्पेस’ देता है। फर्नीचर के रंग के साथ टकराता नहीं।
आार्किटेक्ट ने दीवारों में एसी विंडो बनाई थी। मैंने कभी वहां एसी नहीं लगाया। उन्हें बड़ा करके खिड़कियां बनवा दी, जहां से धूप और रोशनी आती है। घर में मक्खी, मच्छर, कीड़े-कॉक्रोच और छिपकली बर्दाश्त नहीं। मुझे अंधेरा पसंद नहीं है। रात में भी जीरो पावर का नीली रोशनी का बल्ब हर कमरे में जलता है। घर की सजावट के लिए मेरे बनाए तैल चित्र हैं और दूसरे कलाकरों की पेंटिंग और कलात्मक वस्तुएं हैं। मैं पहली मंजिल पर हूं। खुली जगह की कमी है। नीचे एक छोटी क्यारी को गोद ले लिया है और उसमें कई तरह के पौधे लगाए हैं। बोंसाई उगाती हूं।

मेरे परिचित बहुत हैं। लेखकों की एक बड़ी बिरादरी है, पर आत्मीय और स्नेही कुछ ही हैं। उनमें कुछ वरिष्ठ हैं, जो मेरे सलाहकार हैं। कुछ हमउम्र साथ-साथ बोलने बतियाने वाले और कुछ पाठक और शोधार्थी नई पीढ़ी के। उनके साथ मेरा संवाद और सहज स्नेहिल भाव मुझे ‘अपडेट’ रखता है। बहुत समझदार लोग मुझे अच्छे नहीं लगते। हमेशा समीकरण बैठाते, लाभ-हानि देखने वाले, हमेशा कुछ लक्ष्य लेकर चलने वाले मुझे नहीं भाते। साधारण लोग, गलतियां करने वाले, छोटी-मोटी भूलें करने वाले, भूल जाने वाले लोग ही मुझे अच्छे लगते हैं। मुझे बड़े महान या बड़े सत्ता वाले लोग बिल्कुल नहीं भाते। दरअसल, उनके बड़े होने के पीछे के अंधेरे से परिचित हूं। मैं सुबह पार्क में टहलने जाती हूं। वहां माली, दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर, गांव से आए छोटे-छोटे काम कर रहे, चौकीदार या किसी कैंटीन में वेटर या निर्माण कार्य में लगे मजदूर। इन सबके साथ बातें करना, इनकी जिंदगी के बारे में जानना अच्छा लगता है। ऐसे ही औरतें जो शराबी पतियों के उत्पीड़न से तंग होकर यहां आ गई हैं और मजदूरी करके बच्चे पाल रही हैं। ये मेरी खास दोस्त हैं। एक डायरी लिख रही हूं ‘दिल्ली मेरा गांव’। हर रोज एक नई कहानी मुझे मिल जाती है।

अगर मुझे कोई बात अच्छी नहीं लगती तो कह देती हूं। कहीं कोई गलत कह रहा हो या जो मेरी नजर में गलत हो तो उसको भी कहती हूं, रोकती हूं। उसके निराकरण का उपाय भी करती हूं। मुझे फिल्में देखना पसंद है। लेकिन अच्छे निर्देशक की अच्छी और कलात्मक फिल्में। टीवी धारावाहिक नहीं देखती। देखना चाहती हूं, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर कोई कार्यक्रम हो तो। शास्त्रीय संगीत सुनती हूं, मगर पुराने गाने नहीं। घरों में औरतों को बिना आंदोलन या नारेबाजी के अपने पक्ष में अपनी सोच, रुचि और अपनी इच्छा को पूरा करने का अधिकार हो, ऐसा जरूरी समझती हूं। सबसे बड़ी बात, सारी कमियों के बाद मैं ‘अपने को’, ‘अपने होने को’, अपनी कलात्मकता और सृजनशीलता को पसंद करती हूं और उसका सम्मान भी।

 

 

 

बैंक से नहीं बदलवा सकेंगे पुराने नोट; जानिए कहां-कहां चलेंगे 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 28, 2016 5:03 am

सबरंग