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दुनिया मेरे आगे- शिक्षा का समाज

कुछ समय पहले अपनी एक कक्षा के बाद मैं उसी उपन्यास के बारे में सोच रही थी। दरअसल, एक दिन मैंने और मेरी साथी ने हमारे शिक्षण-प्रशिक्षण के दौरान गणित पढ़ाने के लिए पाठ योजना बनाई।
Author June 26, 2017 05:46 am
प्रतीकात्मक चित्र।

लता नेगी

गिजुभाई बधेका के शैक्षिक उपन्यास ‘दिवास्वप्न’ में लक्ष्मीशंकर मास्टर बच्चों के जीवन में इसलिए बदलाव ला पाते हैं कि उनका अपने विद्यार्थियों के जीवन से गहरा रिश्ता था। कुछ समय पहले अपनी एक कक्षा के बाद मैं उसी उपन्यास के बारे में सोच रही थी। दरअसल, एक दिन मैंने और मेरी साथी ने हमारे शिक्षण-प्रशिक्षण के दौरान गणित पढ़ाने के लिए पाठ योजना बनाई। इस योजना में एक ढांचा होता है कि पाठ को हम कक्षा में किस तरह पढ़ाएंगे। हमारी पाठ योजना गणित विषय से संबंधित थी। आमतौर पर गणित को स्कूलों में एक मुश्किल विषय के रूप में देखा-समझा जाता है। अब तक पढ़ने-पढ़ाने के जो तौर-तरीके रहते हैं, उसे देखें तो इस धारणा में कुछ सच्चाई लगती है। हमने गणित में ‘समय’ से संबंधित विषय पर चर्चा करने के बारे में सोचा। हम दोनों ने विषय से संबंधित एक गतिविधि कराने की रूपरेखा तय की।

यह गतिविधि बच्चों के जन्मदिन से जोड़ कर बनाई गई थी। इसे तैयार करते हुए हमारे दिमाग में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 का संदर्भ ध्यान में था कि शिक्षक को किसी खास विषय को पढ़ाते हुए कोशिश यह करना चाहिए कि वह विद्यार्थियों और उनके आसपास के जीवन से जुड़ा हो। इससे विद्यार्थियों में विषय की समझ पुख्ता होती है और इसका इस्तेमाल वह अपने जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में कर सकता है। बहरहाल, यह गतिविधि बच्चों के जन्मदिन से संबधित थी तो हम काफी उत्साहित और आश्वस्त थे। दरअसल, हमारा मानना यह था कि जन्मदिन का मामला उनमें से एक विषय है जो सीधे बच्चों से जुड़ा है। मुझे लगता था कि चूंकि आजकल ज्यादातर बच्चे अपने जन्मदिन के बारे में जानते हैं और इसे लेकर खासे उत्साहित रहते हैं।

यह धारणा शायद हमारी अपनी और आसपास की जिंदगी से निकली थी, जिसमें जन्मदिन उपहारों और खास आयोजन का दिन होता है। अगले दिन अपनी कक्षा में हमने अपनी पाठ योजना के अनुसार पढ़ाने का काम शुरू किया। हम दोनों शिक्षकों ने अपनी योजना के अनुसार कक्षा में इस बात पर चर्चा शुरू की कि किस बच्चे का जन्मदिन कब आता है, वे अपना जन्मदिन किस तरह मनाते हैं, उस दिन क्या करते हैं! इस तरह के प्रश्नों से हमने उनके साथ संवाद शुरू किया। लेकिन हमें इस बात पर हैरानी हुई कि हमारे सवालों को लेकर बच्चों के बीच उत्साह उस तरह नहीं दिखा, जिस तरह हमने सोचा था।जब हमने इस बारे में जानने की कोशिश की, तब पता लगा कि कक्षा में बहुत कम बच्चों को अपनी जन्मतिथि के बारे में जानकारी थी या उन्हें याद था। ज्यादातर बच्चे इस बात से अनभिज्ञ थे। यह जान कर हमें बहुत आश्चर्य हुआ, क्योंकि इसकी कल्पना कर पाना हमारे लिए बहुत मुश्किल था। अपनी पाठ योजना बनाते समय हमने इस बारे में विचार भी नहीं किया था कि आज के दौर में भी क्या यह संभव है कि इतनी बड़ी तादाद में बच्चों को जन्मदिन के बारे में अनभिज्ञता हो। लेकिन ऐसा था। हम बड़ी दुविधा में थे कि क्या किया जाए। आपसी समझ से हमने बच्चों को कोई एक महीना चुनने को कहा और आगे चर्चा बढ़ाई। यह विकल्प का चुनाव था।

लेकिन इस घटना से कई बातें स्पष्ट हो गर्इं। हमारे आपास के रोजमर्रा के जीवन और शिक्षा में परस्पर संबंध होना चाहिए। अगर इस घटना को थोड़ा बारीकी से देखें तो हम बच्चों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का अंदाजा भी लगा पाएंगे। आमतौर पर मध्य या उच्च वर्ग के परिवारों में जन्मदिन मनाने की परंपरा उनके सामान्य जीवन का एक जरूरी हिस्सा हो चुका है। लेकिन हम जिन बच्चों से रूबरू थे, हो सकता है कि उनके घरों मे जन्मदिन जैसे जश्न की कोई पंरपंरा नहीं हो। जिंदगी की दूसरी समस्याओं में उलझे अपने परिवारों में इन बच्चों ने कभी अपनी जन्मतिथि जानने की जरूरत भी महसूस नहीं की हो। यह संभव है कि सिर्फ बच्चों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर एक नजर डालने भर से हम अपनी कक्षा में बाल केंद्रित शिक्षा को जगह नहीं दे सकते हैं, लेकिन इस विषय की अनदेखी भी शिक्षण संबंधी कई कमियों की वजह बन सकती है।

एक शिक्षक के तौर पर हमें ऐसे बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा जुड़ने की जरूरत है। इसलिए एक शिक्षक के लिए बच्चों की दुनिया को जानना अहम हो जाता है। बच्चों की सामाजिक परिस्थितियों के साथ जुड़ी शिक्षा से ही हम एक समझदार समाज की तरफ बढ़ सकते हैं। अगर शिक्षा का संबंध सिर्फ बाजार से है तो हम बेहतर इंसान बनाने से कोसों दूर चले जाते हैं। फिर जरूरी नहीं है कि कक्षा में शिक्षकों को हमेशा अपेक्षित उत्तर ही मिले। यानी किसी भी पाठ योजना के सफल होने या नहीं होने का सारा दारोमदार इस बात पर निर्भर करता है कि एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों के साथ कितना दूर है और किस तरह से जुड़ा है।

 

 

 

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