ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे- बरसात के बाद

यों मौसमों की विदाई कोई नई बात नहीं है। गरमी के बाद बारिश का मौसम आता है। फिर शीत ऋतु की आहट भी ठंडी हवाओं के साथ सुनाई देने लगती है।
Author September 13, 2017 03:52 am
प्रतीकात्मक चित्र

एकता कानूनगो बक्षी

विदाई शब्द ही अपने आप में नमी से भरा होता है। शायद इसीलिए जब किसी की भी विदाई की बात होती है तो मन भीग-सा जाता है। कभी-कभी तो विदा होने वाले से प्रेम और आत्मीयता का हमारा इतना अधिक जुड़ाव हो जाता है कि आंखों से आंसुओं की बारिश होने लगती है। व्यक्ति हो या अपना कोई प्रिय प्राणी या फिर मौसम ही क्यों न हो, कहीं न कहीं उससे बिछुड़ते हुए मन भर उठता है। यों मौसमों की विदाई कोई नई बात नहीं है। गरमी के बाद बारिश का मौसम आता है। फिर शीत ऋतु की आहट भी ठंडी हवाओं के साथ सुनाई देने लगती है। लेकिन बरसात की विदाई कुछ ज्यादा ही संवेदनशील बना देती है। कहीं अल्पवर्षा से किसानों के आंसू तो कहीं अतिवर्षा से बाढ़ की तबाही! कहीं सिर्फ बादलों और बूंदों की लुका-छिपी के बावजूद ज्यादातर जगहों पर बरसात खुशियों का संगीत लेकर ही आती है। भीगे-भीगे प्यारे मौसम की बारिश के दिन इस बार अब लगभग विदा हो चुके हैं। गरम-गरम पकौड़ियों और दिलकश भुट्टे की दावतों के बहाने, गरम चाय की टपरी पर दोस्तों के चहकते-खिलखिलाते ठिकाने, कीचड़ में सनी फुटबॉल को एक-दूसरे पर उछालने की मस्ती, कागज की कश्ती को तैराने के मासूम खेल, उफनती बावड़ियों, कुंओं, नदी-तालाबों के लबालब नजारे, पहाड़ों को छलांगती पानी की चमकदार धाराएं, झरनों, प्रपातों का घने जंगलों और खाइयों में अचानक गुम हो जाना…! कितना कुछ था बरसात के मौसम में! लेकिन अब यह सब धीरे-धीरे क्षीण हो गया

यह भी सच है कि इस बार कुछ क्षेत्रों में खूब बारिश हुई तो कुछ की उम्मीदों पर बिजली भी गिरी होगी। कुछ क्षेत्रों में लोग बारिश का इंतजार ही करते रह गए होंगे और कहीं उम्मीद से ज्यादा बरसात ने खुशियों पर पानी फेर दिया होगा!अब अगर वे रोमांचक लम्हे बहुत याद आएंगे… गुदगुदाएंगे, तो कुछ दुख और करुणा से दिलो-दिमाग को भिगोते रहेंगे। कुछ लोग गड्ढे और फिसलन से बचने में कामयाब हो गए तो कुछ फिसल कर धड़ाम से गिर कर जमीन चाटने लगे। कहीं बारिश की बूंदें टप-टप के तराने सुनाती रहीं तो बहुत से अन्नदाताओं के चेहरों पर लहलहाती फसल ने मुस्कराहट बिखेर दी। रंग-बिरंगे छातों और बरसाती कपड़ों से अपने को बचाते, रोज कमाने-खाने वाले मेहनतकश लोगों की फौज की पूरे मौसम भाग-दौड़ और साथ-साथ चारों ओर हरियाली की चादर ओढ़े सद्यस्नाता प्रकृति, रंग-बिरंगे फूलों से सजी घाटियां, पहाड़…! जाती हुई बरसात का यह अनुपम उपहार ठंड के मौसम को भी खुशनुमा मनमोहक बनाए रखेगा।

हालांकि स्वास्थ्य के लिहाज से अब यह समय काफी सतर्क रहने की मांग करता है। मौसम के बार-बार बदलते मिजाज से अनेक बीमारियों के फैलने की आशंका इस समय बनी रहतीहै। बारिश के बाद के ठहरे हुए पानी में कई विषाणुओं के पनपने की पूरी संभावना रहती है। ऐसे में स्वच्छता और सही खानपान हमारी प्राथमिकता में होना चाहिए। किसी भी तरह की कठिन और कष्टप्रद स्थिति के उभरने से पहले ही कुछ बेहद जरूरी सावधानियां हम सबको बरतने की जरूरत होती है। यह हम सब पहले से जानते भी हैं, लेकिन इन्हें दोहरा लेना भी गलत नहीं होगा। जैसे कहीं भी अनावश्यक जल जमाव न होने दिया जाए, खुद को मच्छरों से बचाया जाए। मौसम के बदलाव के दिनों में बाहर का खाना खाने से बचने की कोशिश की जाए और जहां तक संभव हो, घर का बना ताजा भोजन किया जाए। नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना भी एक विवेकपूर्ण कदम होता है। ऐसे उपाय मौसम में हो रहे बदलाव के दुष्प्रभाव से बचने में काफी हद तक हम सबकी मदद कर सकते हैं।

जिस तरह बारिश के स्वागत से पहले हम नियमित तौर पर कुछ तैयारियां करते हैं, वैसे ही उसकी विदाई के बाद भी हमें उतने ही उत्साह के साथ कुछ जिम्मेदारियां निभा लेनी चाहिए। मसलन, बारिश के दौरान बने गड्ढों को भर देना चाहिए और आसपास भरे पानी में फिनाइल और कीटाणुनाशक द्रव की बूंदें डालते रहना चाहिए। संक्रमित आवारा पशु की रपट नजदीकी नगर निगम या पशु चिकित्सालय में करवाना चाहिए। अपना और अपने आसपास का ध्यान रखते हुए इस मनमोहक और खुशनुमा मौसम को विदाई देना चाहिए।
बारिश की विदाई के साथ ही काले बादलों के उमड़ने-घुमड़ने के दिन भी धीरे-धीरे लुप्त होने लगते हैं। ऐसे में अपने रोज के कामों से कुछ पल चुरा कर हाथ में गरम चाय की प्याली ली जाए और सुना जाए इस विदा होती बारिश की लगातार मद्धिम और दूर जाती कर्णप्रिय गूंज को। यह एक ऐसी विदाई है जिसमें अद्भुत सम्मोहन है। बरसात का बहुत पुराना वादा है हमारे साथ। वह जाएगी… और लौट कर फिर आएगी! हम सब जानते हैं कि अतिवृष्टि के समय तकलीफ देने वाली यही बारिश है जो अपने सामान्य रूप में धरती के लिए जीवन भी है!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.