December 07, 2016

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दुनिया मेरे आगे: हास्य के विद्रूप

जब देश बिना उचित तैयारी के ‘मुद्रा परिवर्तन’ के अचानक फैसले से जूझ रहा है, ऐसे में भी लोगों को मजाक सूझ रहा है।

Author November 17, 2016 01:50 am
सोनम गुप्ता।

प्रियंका

बदलते समय ने बहुत सारे लोगों को स्त्री और दलित जैसी उत्पीड़ित-उपेक्षित अस्मिताओं के पक्ष में दिखावे के लिए ही सही, खड़े होने के लिए विवश तो किया, लेकिन इसने उनके भीतर की कुंठाओं, क्रूरताओं और घृणा को भी साफ कर दिया हो, यह भ्रम न ही रखा जाए तो अच्छा है। समय के साथ-साथ लोगों की चालाकियां भी अधिक बढ़ती जा रही हैं। शत्रुओं ने अपना अंदाज बदलना सीख लिया है। उन्हें पहचानना अधिक कठिन हो गया है। इसके बावजूद समय-समय पर उनकी चालाकियां ही खुद को ‘डिकोड’ करने के अवसर देती रहती हैं।

जब देश बिना उचित तैयारी के ‘मुद्रा परिवर्तन’ के अचानक फैसले से जूझ रहा है, ऐसे में भी लोगों को मजाक सूझ रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ दिनों पहले दस रुपए के नोट पर किसी का यह लिखा खूब प्रसारित हुआ कि ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’। इसे लिखे जाने और चारों तरफ फैल जाने की असल कहानी क्या है, नहीं पता। लेकिन मेरा खयाल है कि लोगों को इसमें किसी चोट खाए आशिक का दर्द नजर आया होगा और उसके लिए अभिव्यक्ति की चुनी गई जगह उन्हें आकर्षित कर रही होगी। सबसे बड़ा कारण यह रहा होगा कि इसमें मजे लेने की भरपूर संभावना दिखी होगी। अब मुद्रा परिवर्तन के दौर में सोशल मीडिया पर चलाई जा रही ‘अघोषित हास्य प्रतियोगिताओं’ में अचानक से इसके और भी नए-नए ‘क्रिएटिव वर्सन’ यानी रचनात्मक रूप सामने आने लगे हैं। यानी सोनम गुप्ता मशहूर हो गई है। नहीं, यह गलत शब्द होगा। मशहूर होना औरतों के हिस्से का दुर्लभतम सुख है। इसलिए ‘सही शब्द’ यह होगा कि वह बुरी तरह बदनाम हो गई है। यह दस रुपए के नोट पर उकेरी गई पहली ‘क्रिएटिविटी’ की शानदार सफलता है। उसमें निहित भावना का फलीभूत होना है।

इसे लिखने वाले ने कुछ तो मानवता दिखाई कि ‘सोनम गुप्ता’ का पता या उसकी पहचान जाहिर नहीं की! ऐसे में चूंकि कोई एक ‘टारगेट’ तय नहीं होता, इसलिए लोगों को यह अपने करतब दिखाने के लिए खुला मैदान लग रहा है। कोई खतरा नहीं और कुंठाओं के लिए आसानी से स्नेहक भी उपलब्ध हो रहा है। क्या इसे इस कोण से कोई नहीं सोचता कि यह सब एक साथ सोनम गुप्ता नाम की कई औरतों को असहज करता होगा? या फिर किसी का नाम सोनम गुप्ता सुन कर, प्रकट-अप्रकट एक टेढ़ी मुस्कान खिंच जाती होगी?यह विडंबना है, लेकिन सच है कि जहां सदियों से चली आ रही व्यवस्था ऐसी है कि औरतों को कोई दो कौड़ी की इज्जत के लायक भी नहीं समझता, वहीं की औरतें अपनी इज्जत और चरित्र की परवाह में ही अपना पूरा जीवन खपा देती हैं। इसलिए औरतों से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार उनके चरित्र, उनकी निष्ठा और इज्जत की धज्जियां उड़ाने वाले दुष्प्रचार हैं। आए दिन तकनीक के दुरुपयोग या धोखे से औरतों की निजी तस्वीरों, वीडियो या अपमानित करने वाली अन्य सामग्रियों को सार्वजनिक करने के काम धड़ल्ले से किए जा रहे हैं। प्रकट में इसे गलत कहने वाले अधिकतर लोग भी मनोरंजन की सामग्री ही समझते हैं। इस तरह कि प्रवृत्ति ने न जाने कितने लोगों को अकथनीय प्रताड़ना दी है और आत्महत्या तक के लिए विवश किया है।

बेवफाई की दास्तान तो औरतों को केंद्र में रख कर लिखे जाने की हमारे यहां परंपरा ही रही है, प्यार इकतरफा हो तब भी! सिरफिरे आशिकों के क्रूरतम तेजाबी हमले और उसके अपने मन ही मन तय कर ली की गई प्रेमिका के विषय में दुष्प्रचार आम बातें हैं। अगर किसी को ‘सोनम गुप्त बेवफा है’ जैसे बीज-वाक्य में सोनम गुप्ता का चुनौतियों और आशंकाओं से भरा भविष्य नहीं दिख रहा, बल्कि हास्य और मजे लेने की संभावनाएं दिख रही हैं, तो उसे अपनी संवेदनशीलता पर ठहर कर पुनर्विचार करना चाहिए। यह वह पहला पड़ाव है, जिसके बाद के खतरनाक रास्ते कई बार किसी स्त्री पर एसिड अटैक या आत्महत्या पर जाकर खत्म होते हैं। बल्कि कई बार यहां भी खत्म नहीं होते!

ऐसे अवसर लोगों की चालाकियों को ‘डिकोड’ करने यानी उनके सोच-समझ की परतें उघाड़ने के अच्छे अवसर होते हैं। ‘सोनम’ तुम भी इसे इसी तरह से देखो! धैर्य से इस तरह की टुच्ची मानसिकता का मुकाबला करना सीखो। उत्पीड़ित अस्मिताओं का शायद ही कोई मसीहा होता है। मसीहा होने का दावा करने वाले बहुत सारे लोग होते हैं, लेकिन उनकी अपनी सीमाएं होती हैं, अपना एजेंडा भी होता है और कई बार वे मसीहा के मुखौटे भर पहने हुए होते हैं। उत्पीड़ित अस्मिताओं को खुद ही अपनी जंग लड़नी होती है। इसलिए यह कोई नई बात नहीं है कि तुम्हें घबराने की जरूरत हो। हो सके तो ऐसे लोगों पर हंसो या कम से कम हंसना सीखो जो अपने क्रूर हास्यबोध के कारण इस दुनिया को मरघट में तब्दील कर देने में लगातार योगदान दे रहे हैं और उनकी मासूमियत ऐसी कि इसका उन्हें पता तक नहीं!

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First Published on November 17, 2016 1:49 am

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