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दुनिया मेरे आगे – परदेस में अपनी बोली बानी

अपनी भाषा-बोली से लगाव, दुनिया की दूसरी भाषाओं और संस्कृतियों को समझने और उनके अंतर्संबंध की खोज की लालसा पैदा करता है।
Author September 28, 2017 06:12 am
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाने और अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने का अवसर मिलता रहा है। अपनी भाषा-बोली से लगाव, दुनिया की दूसरी भाषाओं और संस्कृतियों को समझने और उनके अंतर्संबंध की खोज की लालसा पैदा करता है। खाड़ी के देश, कतर में रहते हुए महसूस हुआ कि कैसे हिंदी वहां संपर्क भाषा के रूप में प्रभावी ढंग से काम कर रही है। कतर धनी लेकिन भूगोल के मानक से एक छोटा देश है। उसकी अपनी आबादी सात लाख आस-पास है और सत्रह-अठारह लाख लोग दूसरे देशों के हैं। भारत के लोगों को अरबी लोग ‘हिंदी’ कहते हैं और भारत को हिंदुस्तान। भारत के छह-सात लाख लोग कतर में हैं जिनमें बहुसंख्यक प्रवासी केरल से हैं। भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि के टैक्सी ड्राइवर, व्यापारी, मजदूर आपस में संवाद के लिए हिंदी का ही प्रयोग करते हैं। बसों के ड्राइवर बड़ी संख्या में अपने पंजाब से गए हैं। केरल के लोग टैक्सी ड्राइवरी से लेकर दुकान-रेस्टोरेंट, प्रॉपर्टी डीलिंग तक का काम करते हैं और भारत के अलावा नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका के लोगों के साथ संवाद के लिए हिंदी को माध्यम भाषा बनाए हुए हैं। मेज, किताब, मंजिल, दुकान, बाजार, मजबूर, सब्र जैसे शब्द अरबी-हिंदी-फारसी में समान अर्थ में प्रयोग होते हैं।

दोहा के सुकवाकिफ में, मैं एक दिन बाल कटा रहा था। नाई, नेपाल के रुपंदेही जिले का निकला। मैं नेपाल के रुपंदेही-लुंबिनी इलाके से अच्छी तरह वाकिफ हूं तो फिर उसने पूछा- मेरा घर कहां है। आजमगढ़ सुनते ही उसने मुझे बताया कि बगल में एक चाचा आजमगढ़ के हैं जो पैंतीस सालों से दोहा में हैं। फिर चाचा से मुलाकात हुई। भोजपुरी में बतकही हुई। रौनापार के रहने वाले चाचा को हमारा गांव याद था। उन्होंने बताया कि पहले, लाटघाट-महुला होते हुए दोहरीघाट-बड़हलगंज इक्के से जाते थे।नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में एक दोपहर मैं पैदल घूम रहा था। अंत में एक छोटे रेस्टोरेंट में घुसा। राजमा-चावल और आलू की सब्जी मंगाई। मैं उस वक्त अकेला ग्राहक था। रेस्टोरेंट का मैनेजर लाहौर का था तो हिंदी में बात शुरू हो गई। उसका परिवार 1970 में रोहतक से पाकिस्तान गया था। उसकी इच्छा थी कि दिल्ली और रोहतक देखे। मैनेजर ने अपनी तरफ से इस ‘भाई’ को मीठे चावल खाने को दिए! दरअसल, जब आप पाकिस्तान के लोगों से बात करते हैं तो आपको पता चलता है कि हम जो हिंदी-उर्दू बोलते हैं, दरअसल वह एक ही भाषा है, लिपि अलग है। इसलिए भारत-पाकिस्तान के बाहर, अक्सर उनमें अच्छी दोस्ती हो जाती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में मेरे साथ, मॉरिशस की हेम प्रभा देवी रामसर पढ़तीं थीं। हम हिंदी में बात करते थे। एक दिन मैंने पूछा, ‘भोजपुरी जानेलू’! जवाब मिला, ‘तनी-तनी, घर में बाबा-आजी बोलेलन’। मॉरिशस में क्रियोल, फ्रांसीसी और भोजपुरी का मिला जुला रूप भी प्रचलन में है। भारतीय मूल के गुयाना वाले कई लोगों से बात होती है तो कुछ ठेठ भोजपुरी के शब्द सुनने को मिलते हैं, चार पीढ़ी के बाद भी उनके भारतीय नाम और मौसी-काका, बरी-बारा, बखीर सुनना अच्छा लगता है। सूरीनामी हिंदी में खांटी शब्द जैसे मनई, पतोहिया, मुंडी, ससुर, गटई, मछरी सुनने को मिलता है लेकिन उनकी बोली में दूसरी भाषाओं के भी शब्द शामिल हो गए हैं।  अफगानिस्तान में काबुल के अलावा दूरदराज के इलाके में भी हिंदी धारावाहिक, फिल्मी गाने खूब चलते हैं। लोग हिंदुस्तानी लोगों को देख कर हिंदी बोलते हैं। कइयों ने फिल्मों से हिंदी सीखी है।

काबुल में एक सीडी-डीवीडी बेचने और किराए पर देने वाली दुकान का नाम है- संजय दत्त डीवीडी स्टोर। दुकानों में, मोबाइल पर और एफएम पर हिंदी गाने बजते हैं। फारसी और हिंदी में काफी शब्द समानार्थी हैं। संस्कृत का भी प्रभाव फारसी पर है। अंगूठी को अंगुष्ठिका, अश्व (घोड़ा) को अश्प, गाय को गऊ और बछड़े को गोशाला कहा जाता है। एक बार मैं अफगानिस्तान के फैजाबाद एअरपोर्ट से तलुकान जा रहा था। जब गाड़ी में बैठा तो मोटरवान (ड्राइवर को फारसी में यही बोलते हैं) ने पूछा- आप को गाने पसंद हैं? हां, सुनते ही उन्होंने मुहम्मद रफी की सीडी लगा दी। पिछले बीस-तीस सालों से वे रफी के फैन हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय हेग में कार्य करने वाली एक कानूनी सलाहकार के नाम में ‘बटोही’ देखकर मैं आश्चर्यचकित हुआ। अंग्रेजी में उनसे पूछा, आप कहां की हंै? पता चला- दक्षिण अफ्रीका की। फिर बटोही? उन्होंने बताया कि उन्हें बटोही का मतलब पता है और वे भारतीय मूल की चौथी पीढ़ी से हैं। उनसे पूछा कि भारत में कहां से गए थे उनके पितामह? मैं तब भकुआ गया जब उन्होंने सीधा कहा कि भारत के आजमगढ़ से!

 

 

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