June 23, 2017

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दुनिया मेरे आगे- जड़ नजर

लड़की के हंसने का गलत मतलब निकालने की धारणा हर जगह मौजूद न हो, लेकिन महिलाओं के प्रति अलग-अलग क्षेत्रों में इस प्रकार के खयाल अक्सर सुनने को मिलते हैं।

Author April 17, 2017 01:15 am
प्रतीकात्मक तस्वीर।

मुजतबा मन्नान 

जब मैं स्कूल में पढ़ता था, तब लड़कियों के लिए दो वाक्य बहुत प्रचलित थे। पहला, ‘हंसी तो फंसी’ और दूसरा, ‘लड़की की ‘ना’ का मतलब ही ‘हां’ होता है।’ जब मैंने पहली बार ये वाक्य सुने थे, तब समझ नहीं पाया था कि हंसने से कोई कैसे फंस सकता है और फंसने का क्या मतलब है! मेरे लिए आश्चर्य की बात थी कि किसी के ‘ना’ बोलने का मतलब ‘हां’ कैसे हो सकता है? जब मैंने कक्षा में साथ पढ़ने वाले दोस्तों से इन वाक्यों का मतलब पूछा तो मैं हंसी का पात्र बन गया। उसके बाद दोबारा इन वाक्यों का मतलब पूछने की मेरी हिम्मत नहीं हुई। लेकिन जब मैं ऊंची कक्षाओं में पहुंचा तो मुझे इन वाक्यों का मतलब समझ में आया। एक दिन मेरे दोस्त ने एक लड़की की तरफ देखने का इशारा किया। मैंने देखा कि एक लड़की दूर खड़े लड़के की तरफ देख कर हंस रही है। लड़की को हंसते हुए देख कर मेरे दोस्त ने कहा ‘भाई, पक्का! ये लड़की इससे फंस चुकी है!’ दोस्त की बात सुन कर मैंने कोई उत्तर नहीं दिया। फिर परीक्षा के आखिरी दिन मैंने देखा कि वह लड़का अपने दोस्तों के साथ खड़ा है और उसके दोस्त बार-बार उसको बोल रहे हैं- ‘भाई, जाओ आज तो बोल ही दो।’ दोस्तों की बात सुन कर वह लड़का उस लड़की के पास गया और उसने धीरे से लड़की को कुछ बोला। लेकिन लड़की की बात सुन कर लड़का चुपचाप वापस आ गया और उसने अपने दोस्तों को बताया कि ‘लड़की ने उसे ‘ना’ बोला है’ और उसे चेतावनी दी है कि ‘अपने दोस्तों को समझा लो, मुझे घूरना बंद कर दें, नहीं तो मैं प्रिंसिपल से शिकायत कर दूंगी।’ उस लड़के की बात सुनते ही उसका एक दोस्त जोर से बोला- ‘अरे भाई! तू इन लड़कियों को जानता नहीं है! लड़की की ‘ना’ का मतलब ही ‘हां’ होता है।’ उसकी बात सुन कर सभी दोस्त जोर-जोर से हंसने लगे और बार-बार लड़की का पीछा करने की सलाह देने लगे। परीक्षा के बाद दूसरे स्कूल में मेरा दाखिला करा दिया गया।

लेकिन स्कूल छोड़ने के बाद भी मेरी दिलचस्पी उस घटना में बनी हुई थी कि ‘आखिर उसके बाद क्या हुआ होगा’। मैं भी धीरे-धीरे इस बात में यकीन करने लगा था कि लड़की के हंसने का मतलब कुछ और ही होता है, क्योंकि स्कूल और घर के आसपास रहने वाले ज्यादातर लड़कों का यही मानना था। दूसरा, घर और मोहल्ले में लड़कियों को हंसने से मना किया जाता था और उन्हें न हंसने के लिए निर्देश दिए जाते थे। जैसे ‘लड़कियों को तेज आवाज में नहीं हंसना चाहिए, रास्ते में आवाज धीमी करके चलना चाहिए और लड़कों की तरफ नहीं देखना चाहिए’ आदि। फिर एक दिन दादाजी के साथ बस में सफर करते हुए मेरी नजर ट्रक के पीछे लिखे शब्दों पर पड़ी। ट्रक के पीछे लिखा हुआ था- ‘हंस मत पगली प्यार हो जाएगा।’ मैंने जिज्ञासावश दादाजी से इन शब्दों का मतलब पूछा तो दादाजी ने मुझे संतुष्ट कर देने वाला उत्तर नहीं दिया। लेकिन मेरा प्रश्न सुन कर आसपास बैठे लोगों में चर्चा शुरू हो गई और फिर सभी लोग लड़कियों के हंसने पर अपने-अपने विचार रखने लगे। जैसे ‘आजकल की लड़कियां खुलेआम हंसती हैं, हमारे समय में लड़की अदब में रहती… और लड़कियों को इतनी आजादी देना ठीक नहीं है’ आदि। उस समय मेरी समझ नहीं थी कि जो लोग बस में लड़कियों के हंसने पर टिप्पणी कर रहे हैं ऐसे लोगों की सोच और मानसिकता की वजह से ही इस प्रकार की धारणाओं को बल मिलता है। गौर करने वाली बात है कि बच्चों के मन में इस प्रकार की धारणाएं कैसे जन्म लेती होंगी? मुझे लगता है कि आसपास के माहौल में मौजूद लोगों की सोच और मानसिकता इस प्रकार की धारणा बनाने में सहायक होती है। अगर मैं भी अधिक समय तक उस माहौल में रहता तो शायद लड़कियों के प्रति इस प्रकार की धारणा मेरे अंदर भी घर कर चुकी होती।

हो सकता है कि लड़की के हंसने का गलत मतलब निकालने की धारणा हर जगह मौजूद न हो, लेकिन महिलाओं के प्रति अलग-अलग क्षेत्रों में इस प्रकार के खयाल अक्सर सुनने को मिलते हैं। अलबत्ता शहरी क्षेत्रों में धारणाओं के शब्द बदल जाते हैं, लेकिन उनके पीछे सोच और मानसिकता वही रहती है, जिसके चलते महिलाओं को पीछा किया जाना, छेड़छाड़, हिंसा और बलात्कार जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है।समय के साथ समाज में काफी बदलाव आया है। लेकिन महिलाओं के प्रति लोगों की सोच और मानसिकता में बदलाव दिखाई नहीं देता है। जब कभी मैं वापस उन्हीं लोगों के बीच जाता हूं, तब मुझे अक्सर ‘हंसी तो फंसी’ सुनाई दे ही जाता है और सड़क पर सफर के दौरान ‘हंस मत पगली प्यार हो जाएगा’ अपनी ओर ध्यान आकर्षित करता है।

 

 

 

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First Published on April 17, 2017 1:13 am

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