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दुनिया मेरे आगे- गिनती के दिन

थोड़े दिनों पहले एक दोस्त आया था। चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। उसकी नब्बे साल पार दादी कई दिनों से बिस्तर पकड़ी हुई थी।
Author September 11, 2017 00:56 am
प्रतीकात्मक चित्र।

थोड़े दिनों पहले एक दोस्त आया था। चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था। उसकी नब्बे साल पार दादी कई दिनों से बिस्तर पकड़ी हुई थी। उस दोस्त को दादी की बीमारी से कोई तनाव नहीं था, बल्कि तनाव था रात में भी किसी समय उठ कर उसकी सेवा करना। बात-बात में वह कह भी गया कि दादी के साथ मैं भी दिन गिन रहा हूं। इस ‘दिन गिनने’ का साफ मतलब था कि दादी का साथ छोड़ देना। किसी की मृत्यु के बारे में सोचना निर्ममता होती है, लेकिन सच यह है कि कई बार लोग निर्मम होते हैं। अक्सर हम आसपास सुनते हैं कि फलां व्यक्ति के दिन गिनती के हैं। यानी उसका इस दुनिया से फना हो जाने का वक्त करीब आ चुका है। कई बार कई परिणामों के लिए भी हम दिन गिनते हैं। कैलेंडर के पन्नों पर दिन गिनना लाजिमी है।

ये दिन की गिनती हमारी जिंदगी में खासा महत्त्व रखती है। नौकरी करने वालों के लिए दिन का महत्त्व और अधिक होता है। पहले तो वे साल भर में मिलने वाली छुट्टी के दिन गिनते हैं। फिर वेतन मिलने की तारीख के लिए दिनों की गिनती होती है। फिर जो बच गया तो पांचवें, छठे और सातवें वेतनमान मिलने के लिए दिनों की गिनती शुरू हो जाती है। बच्चे स्कूल जाने के लिए दिन गिनते हैं तो स्कूल नहीं जाने वाले न जाने के दिन गिनते हैं। परीक्षा के लिए दिनों की गिनती होती है तो परीक्षा परिणाम के लिए दिनों की गिनती शुरू हो जाती है। नई साड़ी के लिए महिलाएं तीज-त्योहार के दिन गिनती हैं तो पुरुष जश्न मनाने के लिए दिनों की गिनती करते हैं। बच्चे का परीक्षा परिणाम आया तो दोस्तों के साथ पार्टी के लिए दिन गिने जाते हैं।फौरी तौर पर गिनती के दिन और दिन की गिनती में कोई बड़ा फर्क नहीं दिखता है। लेकिन जब इसके गूढ़ अर्थों में जाते हैं तब पता चलता है कि दोनों के अर्थ एकदम अलग हैं।

एक व्यक्ति जब कहता है कि गिनती के दिन बचे हैं तो समझिए कि उसके जाने का वक्त आ गया है, लेकिन जब वही व्यक्ति दिनों की गिनती करता है तो खुद को व्यवस्थित कर रहा होता है। इसी तरह जब व्यक्ति से परे संस्था, सरकार और राजनीतिक दल दिनों की गिनती करने लगें तो इसके भी मायने बदल जाते हैं। खासतौर पर सत्ता के सिंहासन पर बैठे लोग जब दिन की गिनती करते हैं तो इसका अलग संदेश जाता है। हालांकि यह बात भी सच है कि सरकार के दिन गिनने की पुरानी परंपरा है। पहले भी सरकारें सौ दिन का कार्यकाल पूरा करने को एक उत्सव की तरह मनाती रही हैं और अब भी यह क्रम जारी है। सरकार जब दिन गिनती है तो समझिए कि उनके लिए यह किसी चुनौती से भरा हुआ है। उन्होंने पिछले जो भी दिन गुजारे हैं, वह सहज नहीं था।

एक समय था जब किसी सरकार के सौ दिन हो जाने के मौके पर जश्न मनाया जाता था। इन सौ दिनों में सरकार की उपलब्धियों की गणना की जाती थी और इसके बाद के दिनों की गिनती नहीं होती थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। दिन गिन-गिन कर सरकारें चल रही हैं। ऐसा लगता है कि जो दिन उन्होंने पूरे कर लिये हैं, उसकी उम्मीद नहीं रही होगी कि वे इतना चल जाएंगे। अब जब चल गए हैं तो जश्न मना लें! सालों की गिनती दिनों में बदल जाने के पीछे छिपे अर्थ को समझना जरूरी है।कई बार सरकार को इस बात का इल्म नहीं होता कि उन्होंने कितने दिनों का कार्यकाल पूरा कर लिया है। लेकिन नौकरशाह उन्हें इस बात का बराबर अहसास कराते रहते हैं कि सरकार के सौ दिन, पांच सौ दिन, हजार, दिन और इसी क्रम में बढ़ते हुए वे गिनती कराते चलते हैं। सरकारों को भी यह मुफीद लगता है कि इसी बहाने अपने कार्यों का अधिकतम प्रचार किया जाए। ऐसा भी नहीं है कि इसमें सब कुछ नकारात्मक ही है। भागमभाग के बीच जनता से संवाद करने का एक अवसर होता है। उनकी बात सुनने का और अपनी बात कहने का। अच्छा होता कि दिन की गिनती के साथ सरकारें उसी संख्या में जनहित के कार्यों की भी गिनती करें। यही नहीं, वे जो काम छूट गए हैं, उनका भी जवाब जनता को दें। दिन की गिनती को औपचारिक बनाने के बजाय कामयाबी का सबब बनाएं तो इससे अच्छा कुछ नहीं होगा।

 

 

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