April 23, 2017

ताज़ा खबर

 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः चलनी दूसे सूप को

समकालीन दुनिया के वक्तव्य-वीरों का तुमुल कोलाहल परवान चढ़ा हुआ है।

दुनिया मेरे आगेः सीखने की समझ

कुछ समय पहले भोपाल में एक नाटक के मंचन के दौरान तोत्तोचान को देखने और उस पर फिर से गौर करने का मौका मिला।

हिंसा का मानस

पूरे विश्व में हिंसा और अहिंसा की नई मानवीय प्रवृत्ति पर तीखी बहस चल रही है।

दुनिया मेरे आगे: कविताओं का कारवां…

जब हम जिंदगी से जूझ रहे थे, तब कौन-सी कविता थी जिसने हाथ थाम कर हौसला दिया था! तपती दोपहरी में किस कविता ने...

भरोसे का जीवट

वे एक व्यवस्था का रूपक होती हैं। उत्तर प्रदेश में आंबेडकर नगर जिले के घुघुलपट्टी गांव में गुजरे अपने बचपन का वह हिस्सा मुझे...

दुनिया मेरे आगे- जड़ नजर

लड़की के हंसने का गलत मतलब निकालने की धारणा हर जगह मौजूद न हो, लेकिन महिलाओं के प्रति अलग-अलग क्षेत्रों में इस प्रकार के...

दुनिया मेरे आगेः पानी के बिंब

पानी के बारे में सोचने पर दो बिंब ज्यादा मुखर होते हैं। एक, सूखे से संबंधित और दूसरा, बाढ़ वाला।

दुनिया मेरे आगेः विचार बनाम बंदिशें

विचार की दुनिया में जब राजनीति का दखल होता है तो अमूमन हर पक्ष के लिए जगह धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है।

दुनिया मेरे आगे- भीड़ में सन्नाटा

जब दो या तीन दिन की छुट्टियां एक साथ आती हैं, तब हम बाहर भागने का प्रयास करते हैं।

सुख की उम्र

इस भागमभाग के दौर में अरस्तू जैसे दार्शनिक के लिखे को पढ़ने का समय हमारे पास नहीं है और न ही हम गांधी, कबीर...

आस्था का पैमाना

मंदिर में हार-मालाएं, प्रसाद वगैरह लेकर नहीं जाएं तो भगवान का दर्शन अधूरा होता है, तो दूसरी ओर श्रद्धालुओं के जेहन में डर...

भोज बनाम भूख

कुछ समय पहले जब एक जुमला जैसा सुना कि ‘थोड़ा पेट खाली, थोड़ी प्लेट खाली’ तो अच्छा लगा। यह एक गहरी बात है।

दुनिया मेरे आगेः अनेकांत की राह

सब जानते हैं कि श्रमण भगवान महावीर ने ‘अनेकं त दर्शन’ की उद्भावना की थी। उस काल में अनेक मत-मतांतरों के बीच गहरे तनाव...

दुनिया मेरे आगेः अंधेरे का सफर

मन रे... तू काहे न धीर धरे...! अचानक इस गीत को सुन कर मन अधीर हो गया और पिछले दिनों की कुछ घटनाओं और...

बदलाव की बुनियाद

परीक्षा में नकल रोकना एक सराहनीय पहल है। इसे और व्यापक होना चाहिए। लेकिन कुछ बुनियादी बातों पर भी ध्यान देना होगा।

कसौटी पर लिखना

लेखन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे व्यक्ति को आनंद का अहसास होना चाहिए। लेकिन वर्तमान समय में वह आनंद इस होड़ में कहीं खो...

खानपान का मजहब

आगे की ‘रणनीति’ पर कुछ विचार करने से पहले ही दोस्तों ने शायद मजाक सुझाया कि ‘तुम जैन मील मांग लेना! उसमें गारंटी है...

दुनिया मेरे आगेः व्हाट्सऐप अब आत्मप्रचार का ऐब बन चुका है

अमूमन रोज सुबह पांच-छह बजे ही मोबाइल बजना शुरू हो जाता है और लगभग आठ-नौ बजे तक जारी रहता है।

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