February 19, 2017

ताज़ा खबर

 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः गठबंधन के सहारे उम्मीद की नाव

बुंदेलखंड के चित्रकूट में कालूपुर के पास बंद पड़े जागेश्वर प्राइवेट अस्पताल के परिसर में गुलाबी साड़ी पहने कुछ महिलाएं पूड़ियां बना रही थीं।

दुनिया मेरे आगेः आधुनिकता की कठपुतली

बिहार के रोहतास जिले के हथनी गांव के सत्तर वर्षीय सुदामा का परिवार कई पीढ़ियों से कठपुतली के करतब दिखाता आ रहा है।

दुनिया मेरे आगे: शिक्षा और परीक्षा

परीक्षा के दिनों में इसका खौफ जिस तरह शुरू हो जाता है, शिक्षण तंत्र से बाहर निकल कर ही समझ में आता है कि...

दुनिया मेरे आगे- ममता का जीवन

जब वहां मौजूद बाकी भिखारी चले गए तो मैं उस महिला के पास पहुंचा। वह उस वक्त भीख में मिले चंद पैसों को समेट...

दुनिया मेरे आगे- अहसास के आईने में

प्रेम है तो जीवन है, अन्यथा जिंदगी नीरस और ऊबाउ है। प्रेम का धरातल बहुत विशाल है और इसकी सच्चाई की परख बहुत ही...

दुनिया मेरे आगे : कहां आए बसंत

वसंत उल्लास और उमंग का एक नाम है जो रोज भीतर उल्लसित होता है। लेकिन हमारे बीमार सपने वसंत को नहीं होने देते साकार।

दुनिया मेरे आगेः अमूर्तन की सीमा

आधुनिक चित्रकला के लिए परंपरा शुरू से ही खतरा बन कर सामने आई है। इस जोखिम से बचने के लिए नए चित्रकारों ने मूर्त-अमूर्त...

दुनिया मेरे आगेः निदा की चीजें

‘ये आसमान, ये बादल, ये रास्ते ये हवा... हर एक चीज है अपनी जगह ठिकाने पे। कई दिनों से शिकायत नहीं जमाने से...!’ छोटी...

इंसाफ की आस में

कुछ हफ्ते पहले एक सोशल नेटवर्किंग साईट पर एक बच्ची का पत्र बहुत वायरल हुआ जो उसने अपनी मृत्यु के पहले लिखा था।

दुनिया मेरे आगे: खौफ की कड़ियां

दिल्ली में साठ के दशक में हुई घटना को काफी पुरानी कह कर जाने भी दें तो भी उसी तरह की खबरें हर जगह...

दुनिया मेरे आगे: नाम के बहाने

मेरी एक मित्र ने हाल ही में अचानक अपने नाम में थोड़ा-सा परिवर्तन कर लिया। यह बदलाव थोड़ा हैरान करने वाला था।

दुनिया मेरे आगे- उत्साह का जीवन

कार्यशील लोगों को अपने कार्य और व्यवहार के लिए आलोचना का भी सामना करना होता है।

दुनिया मेरे आगेः पौरुष के मारे

पिछले दिनों रेडियो कार्यक्रम बनाने के सिलसिले में किशोर उम्र के लड़कों से बातचीत हो रही थी। उनसे पूछा गया कि आप पर दबाव...

दुनिया मेरे आगेः उम्र से आजाद रिश्ते

छोटे-बडे़ में उम्र का अंतर समझना हमेशा से मेरे लिए मुश्किल ही रहा है।

दुनिया मेरे आगे- लोक की कला

हिंदू, बौद्ध, इस्लाम धर्मों, लोक-वेद की परंपराओं और लोक कथाओं से मिथिला की सभ्यता और संस्कृति प्रभावित रही है।

दुनिया मेरे आगे: सरोकार का पाठ

लगभग दस-बारह साल पहले दिल्ली के पुस्तकालयों में खूब रौनक और चहल-पहल देखी जा सकती थी।

दुनिया मेरे आगे: बदलाव की परतें

मेरे एक वरिष्ठ मित्र 1960 के दशक में मास्को गए थे। वहां की बसों में लोगों को खुद से टिकट लेकर बस में बैठते...

दुनिया मेरे आगेः किसके लिए किताब

जब सभी आयोजन व्यापार-उद्योग का हिस्सा हो चले हैं तो साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन भी इससे अछूते क्यों रहते! हाल ही में दिल्ली का विश्व पुस्तक...

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