June 29, 2017

ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे- कोलकाता में एक दिन

नागार्जुन कोलकाता बार-बार आते थे। शोभाकांत कहते हैं कि कोलकाता से ही बाबा रूढ़िग्रस्त परंपरा से दो-दो हाथ करने और अपने नाम ‘यात्री’ को...

दुनिया मेरे आगे- जिजीविषा के सहारे

कुदरत की गोद में हम सभी निर्मल आनंद प्राप्त करते हैं। प्रत्याशित खतरों का आभास भी नहीं होता। हमारा अस्त-व्यस्त और अफरातफरी से भरा...

दुनिया मेरे आगे- कुएं का दायरा

अध्यापकों का तर्क यह होता है कि हमें तो पढ़ने का वक्त ही नहीं मिलता, बच्चे पढ़ना नहीं चाहते, हमें गैर-शैक्षणिक कामों में...

दुनिया मेरे आगे- शिक्षा का समाज

कुछ समय पहले अपनी एक कक्षा के बाद मैं उसी उपन्यास के बारे में सोच रही थी। दरअसल, एक दिन मैंने और मेरी साथी...

दुनिया मेरे आगेः अपनत्व की परिधि

सालों बाद अपने गांव में इस बार ज्यादा वक्त बिता पाया हूं। बचपन में हर साल गरमी की छुट्टियों में यहां आना होता था।

दुनिया मेरे आगेः जगह का समाजशास्त्र

किसी जगह का इस्तेमाल कौन कर सकता है और कौन नहीं- यह बात हमें उस समाज के बारे में कई पहलुओं को समझने में...

दुनिया मेरे आगे- पर्दे पर बहता मौसम

पिछले कुछ वर्षों में असम में ही बनी कुछ फिल्में देखी हैं जो असम में रहते हुए भी इस नम असमिया रंग को...

दुनिया मेरे आगे- अधिकार का भ्रम

परंपरा और समाज की न जाने कितनी जंजीरों को तोड़ने और कितनी बाधाओं को पार करने के बाद दमित या वंचना के शिकार वर्ग...

दुनिया मेरे आगे- वृद्धाश्रम में मां

बचपन में सुरेश की माता का बहुत स्नेह मिलता था। खेलकूद कर जब भी मित्र के साथ उसके घर आता, तो माताजी कुछ न...

दुनिया मेरे आगेः कुंठा का कारोबार

हाल ही में आॅनलाइन शॉपिंग की वेबसाइट ‘अमेजन’ पर बिक्री के लिए लगाए गए एक उत्पाद की फोटो किसी ने फेसबुक पर साझा की।

दुनिया मेरे आगेः शोर बनाम आस्था

दिनोंदिन लगातार बढ़ते जा रहे ध्वनि प्रदूषण से सभी परेशान हैं। अखबारों और टेलीविजन से कहीं ज्यादा सोशल मीडिया पर लोग अपने विचार जाहिर...

दुनिया मेरे आगे- प्रतिभा का दायरा

परीक्षाओं में बाजी मार ले जाने के मामले में अब हमारी लड़कियां आगे हैं। उनके किसी परीक्षा में पास करने का प्रतिशत और अंकों...

तंत्र में लोक

लोकतंत्र की सबसे सटीक परिभाषा अब्राहम लिंकन की मानी जाती है। यानी जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए व्यवस्था।

ताक पर तहजीब

रोज बदलते समाज के मूल्यों के बीच अच्छे और बुरे की परिभाषा भी तेजी से बदलती जा रही है। शुचिता एक नया अर्थ पा...

दुनिया मेरे आगे- सुविधा के संबंध

हम तो बचपन के दोस्त रहे हैं!’ तब उनका यही कहना था कि ‘आजकल संबंध जरूरत के हिसाब से ही तय होते हैं।’

दुनिया नेरे आगेः अंतहीन निगरानी

सोलहवीं शताब्दी के एक विचारक फ्रांसिस बेकन ने कहा था- ‘नॉलेज इटसेल्फ इज पॉवर’।

दुनिया मेरे आगेः हिंदी की जगह

हाल ही में एक मित्र की शादी का आमंत्रण पत्र मिला। मेरे सहित कई मित्र नियत दिन विवाह स्थल पर पहुंचे तो उनके साथ...

चांद रात की खुशी

कॉलोनी की सड़कों पर न बारिश का मजा, न खेलकूद की जगह। चारों तरफ बाजार ही बाजार है। गाड़ियों और लोगों का अंबार...

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