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जले पर नमक

मध्यप्रदेश का व्यापक व्यापमं घोटाला, घोटालों पर संदिग्ध मौतों का होना और उस पर बरसों तक (2011 से 2015) राजनीतिक और प्रशासनिक ढील-पोल बरतने के बाद जब मामला पूरे देश की जनता के सामने आया तब भी प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर का यह बयान आना कि ‘मुझे तो इस बारे में कुछ बताया ही […]
Author July 22, 2015 08:44 am

मध्यप्रदेश का व्यापक व्यापमं घोटाला, घोटालों पर संदिग्ध मौतों का होना और उस पर बरसों तक (2011 से 2015) राजनीतिक और प्रशासनिक ढील-पोल बरतने के बाद जब मामला पूरे देश की जनता के सामने आया तब भी प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर का यह बयान आना कि ‘मुझे तो इस बारे में कुछ बताया ही नहीं जाता रहा है’ और देश के कानून मंत्री वीं. सदानंद गौडा का यह कहना कि ‘साधारण मामलों में प्रधानमंत्री का जवाब देना जरूरी नहीं है’, कितना जवाबदार लगता है, यह सोचने वाली बात है।

देश और प्रदेश के जिम्मेदार राजनेता कुछ करें या न करें, यह बाद की बात है। पर घोटालों के शिकार और उससे परेशान हजारों अभ्यर्थियों के ‘जले पर तो नमक’ छिड़कने का ऐसा काम तो न करें, जिससे उनके दिलों को गहरी चोट पहुंचे।

सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि जो सत्ता मिली है वह किसी खास की बदौलत नहीं, बल्कि आम लोगों के वोट से मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संदेश में यही कहा था कि ‘मैं प्रधानमंत्री नहीं, प्रधान सेवक हूं’।  फिर इस तरह की बयानबाजी क्यों की जा रही है।

महेश नेनावा, गिरधर नगर, इंदौर

 

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