May 24, 2017

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एक साथ चुनाव

जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में सरकार के 3426 करोड़ खर्च हुए, वहीं राजनीतिक दलों ने इसी चुनाव में लगभग 26000 करोड़ खर्च किए।

Author May 15, 2017 05:48 am
सांकेतिक तस्वीर

नीति आयोग ने सन 2024 से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया है ताकि चुनाव प्रक्रिया के कारण शासन व्यवस्था में पड़ने वाले व्यवधान को कम से कम किया जा सके। साथ ही चुनावों को लेकर कम से कम प्रचार करने पर भी नीति आयोग का जोर है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ कराने की हिमायत करते रहे हैं। ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा भारतीय चुनावी प्रक्रिया न केवल थकाऊ व उबाऊ है, बल्कि बहुत अधिक खचीर्ली भी है। जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में सरकार के 3426 करोड़ खर्च हुए, वहीं राजनीतिक दलों ने इसी चुनाव में लगभग 26000 करोड़ खर्च किए। चुनाव आयोग का मानना है कि विधानसभाओं के चुनाव में 4500 करोड़ का खर्च बैठता है। एक साथ चुनाव कराने से खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे सरकारें लोकलुभावन के बजाय विकासोन्मुख होने के लिए विवश होंगी।

आमतौर पर देखा जाता है कि चुनावों में केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री मुख्य चुनाव प्रचारक होते हैं, जिससे सरकारी काम बाधित होता है। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगती है, जिससे प्रशासनिक कार्यशीलता भी प्रभावित होती है। अगर एक साथ लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होते हैं तो सरकारी मशीनरी की कार्य क्षमता बढ़ेगी तथा आमजन को लाभ होगा। जातिवाद, संप्रदायवाद, भ्रष्टाचार व वोटरों की खरीद-फरोख्त जैसी बुराइयां दूर करने में मदद मिलेगी। भारत में हर साल कम से कम चार-पांच राज्यों में चुनाव होते हैं, जिससे विकास प्रक्रिया भी बाधित होती है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का मानना है कि बार -बार चुनाव कराने से सरकार का सामान्य कामकाज ठहर-सा जाता है। मसलन, मध्यप्रदेश में नवंबर 2013 में विधानसभा चुनाव हुए, फिर लोकसभा चुनाव और उसके तुरंत बाद नगर निकायों के चुनाव कराए गए और फिर पंचायत चुनाव हुए। इन चुनावों के चलते 18 महीनों में से नौ महीने तक आदर्श आचार संहिता के कारण वहां सरकारी कामकाज कमोबेश ठप रहा। चुनाव एक साथ कराने से समय की भी बचत होगी और इस समय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय उत्पादक कार्यों में लगाया जा सकेगा।

लोकसभा व विधानसभा के साथ चुनाव कराने में बहुत-सी चुनौतियों से पार पाना होगा। सबसे बड़ी चुनौती तो राजनीतिक दलों में आमराय बनाने की है। दूसरी चुनौती यह है कि किसी राज्य में मिलीजुली सरकार बनने के बाद अगर वह छह महीने के भीतर गिर जाए तो क्या अगले साढ़े चार साल तक राष्ट्रपति शासन रहेगा? संघीय लोकतंत्र को बनाए रखना और दलीय लोकतंत्र की खामियां भी इस पहल के समक्ष अन्य चुनौतियां हैं। लेकिन अगर देशहित में सभी राजनीतिक दलों के बीच चुनाव एक साथ कराने की सहमति बनती है तो यह भारतीय लोकतंत्र को और ज्यादा जीवंत तथा परिपक्व बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
’कैलाश मांजु बिश्नोई, मुखर्जीनगर, दिल्ली

कूटनीतिक कामयाबी

पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने रोक लगा दी है जो भारत सरकार की कूटनीतिक कामयाबी को साफ दर्शाता है। भारत हमेशा कहता रहा है कि कुलभूषण कोई जासूस नहीं है मगर पाकिस्तान इसे नकार कर फांसी की जिद पर अड़ा हुआ था। भारत सरकार का कहना था कि कुलभूषण एक व्यापारी हैं जिनका ईरान में अपना व्यवसाय है और पाकिस्तान ने उन्हें अगवा कर जासूस करार दे दिया। पाकिस्तान के नकारात्मक रुख की वजह से भारत सरकार द्वारा सोलह बार प्रयास किए जाने के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट जाना पड़ा जहां यह कामयाबी भी मिली।
’प्रदीप कुमार तिवारी, ग्रेटर नोएडा

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार से कहा- "आप लोगों को मांसाहार से नहीं रोक सकते, बूचड़खानों के लिए नए लाइसेंस बनाएं, पुराने रिन्यू करें"

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First Published on May 15, 2017 5:48 am

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