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चौपाल: घोषणा के खिलाफ, चिंता का विषय

आठ नवंबर 2016 को जब मोदी सरकार ने नोटबंदी की घोषणा की थी तब साफ तौर पर बताया गया था कि 500 और 1000 के नोट बैंकों में 30 दिसंबर 2016 तक जमा किए जाएंगे।
Author March 9, 2017 04:44 am

घोषणा के खिलाफ

आठ नवंबर 2016 को जब मोदी सरकार ने नोटबंदी की घोषणा की थी तब साफ तौर पर बताया गया था कि 500 और 1000 के नोट बैंकों में 30 दिसंबर 2016 तक जमा किए जाएंगे। अगर किसी कारणवश कोई ये नोट नहीं जमा कर पाया तो वह 31 मार्च 2017 तक रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) में पुराने नोट जमा कर सकता है। लेकिन अब आरबीआई का आदेश है कि 31 मार्च तक सिर्फ वही लोग पुराने नोट जमा कर सकते हैं जो नोटबंदी के दौरान देश से बाहर होने की वजह से अपने नोट जमा नहीं कर पाए थे। यह बात मोदी सरकार की घोषणा के खिलाफ है। पहले ऐसी बात नहीं कही गई थी तो अब आरबीआई नई बात कह कर क्यों लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है? मोदी सरकार को इस बारे में दिशा निर्देश जारी करना चाहिए।
बृजेश श्रीवास्तव, गाजियाबाद

 

चिंता का विषय

अमेरिका में भारतीयों के विरुद्ध नस्लभेदी वारदातें चिंता का विषय तो हैं ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान बनाए गए कथित मैत्रीपूर्ण संबंधों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। एक समय था जब मोदी समर्थक वहां के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप को भी मोदी का मुरीद बताते नहीं थकते थे। उनका दावा था कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से भारतीयों को विशेष फायदा पहुंचेगा। कुछ अतिउत्साही लोगों ने तो दोनों में समानताएं खोजते हुए ट्रंप को मोदी की नीतियों का प्रशंसक और अनुसरणकर्ता भी बताया था। लेकिन ट्रंप द्वारा प्रवासियों के खिलाफ अमेरिकी भावनाएं भड़काने का नतीजा प्रवासी भारतीयों पर जानलेवा हमलों और नस्लभेदी घणा के रूप में सामने आया है।
बहरहाल, ट्रंप को अमेरिका का राष्ट्रपति बने अभी कुछ ही दिन हुए हैं और उन्होंने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। अब वे लोग कहीं नजर नहीं आते जो कल तक ट्रंप को भारत का हितैषी मानते थे। इतना ही नहीं, मोदी का ध्यान भी सिर्फ अपनी पार्टी पर केंद्रित है। शायद वे भूल गए हैं कि अमेरिका में नस्लभेदी सलूक के शिकार होने वाले ये वही लोग हैं जो उनके आगमन पर अपने सारे काम छोड़ कर उनके स्वागत में जुटते रहे हैं।
कन्हैया लाल, जामिया मिल्लिया इस्लामिया

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